Bihar Elections: वोटों का गणित सेट करने में BJP सबसे आगे, हर बार बढ़ा वोट शेयर और बनी नंबर-1
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Elections 2020) के रण में सभी पार्टियां पूरी ताकत से लड़ रही हैं। चाहे छोटी हों या बड़ी हर पार्टी वोटर को अपनी ओर लुभाने में लगी है। लेकिन अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो बिहार के विधानसभा चुनाव में वोटों का गणित सेट करने में अब तक बीजेपी ही सबसे आगे है। वैसे तो बीजेपी का वोट शेयर सबसे आगे हैं लेकिन अगर बात बिहार में चुनाव लड़ने वाली राष्ट्रीय स्तर की पार्टियों की तो बीजेपी के आस-पास भी कोई नहीं है।

2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी वोट शेयर के मामले में 24.42% के साथ पहले नंबर पर थी। छह राष्ट्रीय पार्टियों (भाजपा, बसपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस और एनसीपी) ने बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन बीजेपी के सिवा किसी का वोट शेयर दहाई में नहीं पहुंचा। बीजेपी और अन्य दलों के प्रदर्शन में अंतर को आप ऐसे समझ सकते हैं कि दूसरे नंबर पर रहने वाली कांग्रेस को 6.66 % वोट मिले थे। झारखंड अलग राज्य बनने के बाद अब तक राज्य में चार चुनाव हो चुके हैं। इनमें 2005 में फरवरी और अक्टूबर में हुए चुनाव के साथ ही 2010 और 2015 के चुनाव हैं।
Recommended Video
राष्ट्रीय पार्टियों में सबसे तेज बढ़त
अगर सभी छह पार्टियों के वोट शेयर की बात करें तो 2005 के फरवरी में 23.57% से बढ़कर 2015 में 36.6% हो गया। एक तरफ अन्य पार्टियों का कम ज्यादा हुआ वहीं बीजेपी ने सबसे तेज बढ़त हासिल की। यहां तक कि राज्य में जब एनडीए में अलगाव हुआ उसके बाद 2015 में हुए चुनाव में पार्टी को 24.42 प्रतिशत वोट मिले। जबकि 2005 (फरवरी) के चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 10.97 था। 2015 में बीजेपी वोट शेयर के मामले में सबसे बड़ी पार्टी बनी। राष्ट्रीय ही नहीं राज्य स्तरीय पार्टियां भी 20 प्रतिशत वोट शेयर नहीं पार कर पाईं थीं। हालांकि सबसे बड़े वोट शेयर के बावजूद सीट के मामले में बीजेपी 53 सीट के साथ आरजेडी (80) और जेडीयू (71) के बाद तीसरे नंबर पर थी।
2015 के चुनाव में बीजेपी के वोट शेयर बढ़ने की बड़ी वजह अधिक सीटों पर पार्टी का चुनाव लड़ना भी था। बीजेपी ने इस चुनाव में 157 सीट पर प्रत्याशी उतारे थे। इसके पहले 2010 के चुनाव में पार्टी ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 16.49% फीसदी हासिल किए थे जबकि पार्टी ने 91 सीटें जीतीं थीं। हालांकि सिर्फ ज्यादा सीटें पर चुनाव लड़ना ही बीजेपी के अधिक वोट पाने की वजह नहीं है। दूसरी राष्ट्रीय पार्टियां भी ऐसा कर चुकी हैं। बसपा ने 2015 में 228 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे लेकिन पार्टी को मात्र 2.07 प्रतिशत वोट मिले। बसपा हर बार 200 से ज्यादा सीटों पर उतारती रही है लेकिन पार्टी का वोट शेयर 4.41 से गिरकर 2.07 प्रतिशत पर पहुंच गया।
कांग्रेस भी लड़ी है सभी सीटों पर चुनाव
बीजेपी ने जहां 102 सीट से शुरू करके 157 सीट पर चुनाव लड़ा और अपना वोट प्रतिशत बढ़ाकर 10.97 से ले जाकर 24.41 पर पहुंचा दिया वहीं 2010 में कांग्रेस ने सभी 243 सीट पर प्रत्याशी उतारे थे लेकिन पार्टी को 8.37% वोट मिले थे। ये राज्य पुनर्गठन के बाद कांग्रेस का सबसे ज्यादा वोट शेयर भी था। पिछले चुनाव में कांग्रेस 41 सीट पर लड़ी और 6.66 प्रतिशत वोट मिले।
दूसरी राष्ट्रीय पार्टियों की बात करें तो 2005 में सीपीआई को जहां 1.36 प्रतिशत वोट मिले थे, 2015 में पार्टी ने एक प्रतिशत से भी कम की बढ़ोतरी की और 2.09 प्रतिशत वोट हासिल किए। वहीं सीपीएम को दोनों चुनावों में क्रमशः 0.61% और 0.71% वोट मिले। एक और पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी ने 2010 में 171 सीट पर प्रत्याशी उतारे और उसका वोट शेयर 1.82 फीसदी रहा।
क्षेत्रीय पार्टियों का वोट शेयर
अगर बात क्षेत्रीय पार्टियों के प्रदर्शन की करें तो 2005 में 175 सीटों पर चुनाव लड़कर आरजेडी को 23.45% वोट मिले जबकि 203 सीटों पर चुनाव लड़ी लोजपा को 11.10 प्रतिशत वोट हासिल हुए। जेडीयू ने 139 सीट पर चुनाव लड़ा था और पार्टी को 20.46 प्रतिशत वोट मिले थे। 2015 के चुनाव नए समीकरणों पर थे और जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस ने मिलकर लड़ा। जेडीयू और आरजेडी ने बराबर 101 सीट पर चुनाव लड़ा जिसमें जेडीयू को 16.83 फीसदी जबकि आरजेडी को 18.35 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं 42 सीटों पर लड़ी एलजेपी को 4.83 प्रतिशत प्राप्त हुए थे।












Click it and Unblock the Notifications