इस होटल ने अपने इस suite को दिया फुटबॉलर Diego Maradona का नाम, जानें खास वजह
कुन्नूर के इस होटल ने अपने इस suite को दिया फुटबॉलर Diego Maradona का नाम, जानें खास वजह
बेंगलुरु। अर्जेंटीना के फुटबॉल खिलाड़ी डिएगो माराडोन जो की करोड़ो दिलों पर राज करते हैं उनका हार्ट अटैक से 25 नवंबर2020 को निधन हो गया। नवंबर महीने में ही उनकी ब्रेन सर्जरी भी हुई थी।ब्रेन में बल्ड क्लाटिंग होने की समस्या के चलते उनकी ये ब्रेन सर्जरी हुई थी। माराडोना को दुनियाभर में प्रशंसक है। वर्ष 1986 विश्व कप में अर्जेंटीना की जीत में माराडोना की जानदार परफार्मेंस के लिए याद किया जाता है। माराडोना की मौत से करोड़ों दिलों को झटका लगा है। माराडोना की मौत के बाद केरल स्थित कुन्नूर के एक होटल ने खिलाड़ी की याद में अपने होटल का एक Hotel suite ही समर्पित कर दिया है।

मराडोना कन्नून यात्रा के दौरान इसी Diego होटल में 23 October 2012 को ठहरे थे। Diego होटल में जिस suite में मराडोना ठहरे थे उसका नाम होटल प्रबंधन ने माराडोना के नाम पर कर दिया है। इतना ही नहीं उस कमरे को खिलाड़ी को समर्पित करते हुए उनकी याद में उसे सजाया है। इस कमरे में खिलाड़ी द्वारा होटल में स्टे के दौरान यूज की सामग्रियों, प्लेट, कटलरी समेत अन्य वस्तुओं को करीने से सजाया है। होटल के प्रबंध निदेशक ने कहा कि माराडोना द्वारा वापस इस्तेमाल की गई सभी चीजें उनकी स्मृति में यहां रखी गई हैं।'' कन्नूर आने वाले पर्यटक यहां आकर इस सबको देख सकते हैं।


माराडोना का करियर
माराडोना ने चार बार विश्व कप में अर्जेंटीना का प्रतिनिधित्व किया और साल 1991 में ड्रग्स टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे और उन्हें 15 महीने तक खेलने पर बैन लगा दिया गया था। इसके बाद वर्ष 1997 में अपने जन्मदिन पर ही उन्होंने फुटबाल से रिटारमेंट ले लिया था उस समय वो महज 37 वर्ष के थे। माराडोना 2008 में अर्जेंटीना की टीम के कोच भी बनाए गए थे, 2010 में उन्होंने इस पद को छोड़ दिया था। 1997 में रिटायरमेंट लेने के बावजूद अभी तक वो फुलबॉल जगत के बेताज बादशांह हैं। वर्ल्ड कप में जिस गोल को मारकर उन्होंने ये प्रसिद्धि पाई थी उस गोल को फुटबॉल जगत में हैंड ऑफ गॉड कहा जाता है।
जानें Hand of God क्यों कहा गया इसे
ये गोल माराडोना ने अर्जेंटीना के लिए इंग्लैंड के खिलाफ 22 जून 1986 के वर्ल्ड कप में किया था। माराडोना ने उछलकर गेंद को गोल पोस्ट में डालने की प्रयास किया और वो गेंद को सिर से मारना चाहते थे लेकिन इसके बजाय गेंद उनके हाथ से लगी और गोलकीपर पीटर शिल्टन से बचते हुए नेट के अंदर चली गई। कीपर ने उसे ये ही समझा कि वो सिर से मारी गई है और उसने गोल दे दिया और माराडोना की वजह से अजेंटीना वर्ल्ड विजेता बना था।












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