नागरिकता संशोधन कानून में विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट करने का कानून नहीं: MHA
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दिल्ली के जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जबरदस्त विरोध देखने को मिला है। तीन दिनों से जामिया के आसपास के इलाकों में प्रदर्शन हो रहा है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बसों को आग लगा दी, पुलिस के वाहन जला दिए और पत्थराबाजी की। जवाब में पुलिस ने भी आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के बीच गृह मंत्रालय की तरफ से इस कानून को लेकर कुछ अहम बातें बताई गई हैं।

गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, नागरिकता संशोधन कानून का किसी भी विदेशी के निर्वासन से कोई लेना-देना नहीं है। किसी भी विदेशी की सामान्य निर्वासन प्रक्रिया पहले से मौजूद कानून के अनुसार लागू होगी। ये कानून किसी भी भारतीय पर लागू नहीं होता है। वहीं, साथ ही ये भी जानकारी दी गई है कि सभी विश्वविद्यालयों में हालात शांतिपूर्ण हैं। इससे पहले, विरोध से लेकर कैंडल मार्च तक कुछ घटनाएं हुईं हैं।
सूत्रों के मुताबिक, 42 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से दो विश्वविद्यालयों (एएमयू और जामिया) को छोड़कर सभी शैक्षणिक सत्र सामान्य रहे हैं। एएमयू (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं फिलहाल टाल दी गई हैं। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शन पर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
पीएम मोदी ने कहा कि देश के कॉलेजों और विश्वविधालयों के युवा साथी अपने महत्व को समझें, जहां वे पढ़ रहे हैं उन संस्थानों का महत्व समझें। पीएम मोदी ने कहा, 'मैं देश के प्रत्येक नागरिक चाहे हिंदू हो या मुस्लिम, को ये कहना चाहता हूं कि इस कानून से किसी भी भारतीय नागरिक की नागरिकता पर कोई असर नहीं होगा। अमित शाह ने कहा कि विपक्ष लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। ये बिल तीन देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देता है, ये किसी की नागरिकता नहीं लेता है।












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