पंजाब के पूर्व सीएम की हत्या करने वाले बलवंत सिंह की सजा गृह मंत्रालय ने कम की

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा कम कर दी है। राजोआना को साल 2007 में हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी। वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या का दोषी है। इस आदेश के बारे में पंजाब और चंडीगढ़ प्रशासन को अवगत करा दिया गया है।

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राजोआना की मौत की सजा को बदलकर उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया है। बता दें साल 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की चंडीगढ़ में हुए एक आत्मघाती बम धमाके में मौत हो गई थी। बलवंत सिंह और कुछ अन्य को इस मामले में दोषी ठहराया गया और राजोआना को एक अगस्त 2007 को चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी।

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    कब क्या हुआ?

    कब क्या हुआ?

    राजोआना की फांसी का मामला कई बार कानूनी उलझनों में फंसा है। जानकारी के मुताबिक पहले साल 2012 में 31 मार्च को फांसी मुकर्रर की गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी। इसका सीबीआई ने विरोध किया था। फिर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी कहा था कि राज्य सरकार राजोआना को फांसी देने के हक में नहीं है।

    बहन ने सार्वजनिक किया था पत्र

    बहन ने सार्वजनिक किया था पत्र

    इसके अलावा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भी फांसी की सजा की माफी के लिए राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी थी। राजोआना की बहन कमलजीत कौर ने भी राजोआना का एक पत्र सार्वजनिक किया था, जिसमें राजोआना ने कहा था कि उसे सरकार की हमदर्दी नहीं चाहिए। उसने अपने गुनाह के लिए जो सजा मांगी है, उसे उसी दिन, तारीख और समय पर दी जाए। वहीं फांसी की सजा पर रोक के लिए पंजाब में कई संगठनों ने प्रदर्शन भी किया था।

    2017 में दाखिल की थी याचिका

    2017 में दाखिल की थी याचिका

    राजोआना की बहन ने नवंबर 2017 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बलवंत सिंह की फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने की मांग की थी। लेकिन याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिका में उसने कहा था कि राजोआना पिछले 20 साल से जेल में बंद है। इस दौरान ना तो उसने अपनी सजा को चुनौती दी और न ही कानूनी सहायता मांगी। उसे फांसी सजा सुनाई कई साल हो गए हैं, इसलिए अब उसकी फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील किया जाए।

    अब ये फैसला गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव पर मानवीय स्नेह के आधार पर लिया गया है।

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