30 साल बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिली उस मंत्रालय की जिम्मेदारी जिसे कभी पिता ने संभाला था
नई दिल्ली, 08 जुलाई। कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को आखिरकार मोदी सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। बुधवार को मंत्रिमंडल विस्तार में सिंधिया को मोदी कैबिनेट में जगह मिली है और उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय का जिम्मा मिला है। दिलचस्प बात है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया ने भी 30 साल पहले इसी मंत्रालय को अपनी सेवाएं दी थी। पीवी नरसिम्हाराव की सरकार में माधवराव सिंधिया नागरिक उड्डयन मंत्री थे और अब उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

दोनों को मुश्किल हालात में मिली जिम्मेदारी
गौर करने वाली बाली बात है कि माधवराव सिंधिया नरसिम्हाराव की सरकार में वर्ष 1991 से लेकर 1993 तक नागरिक उड्डयन मंत्री रहे थे। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वह दौर काफी अहम माना जाता है क्योंकि देश उस वक्त उदारीकरण के दौर से गुजर रहा था। कुछ इसी तरह के हालात इस समय भी हैं। इस वक्त देश कोरोना महामारी से लड़ रहा है, तमाम अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पाबंदी लगी है, घरेलू उड़ान भी अभी पूरी तरह से चल नहीं रही है। ऐसे वक्त में ज्योतिरादित्य सिंधिया को उड्डयन मंत्रालय की बड़ी जिम्मेदारी मिली है।

दोनों के पास था पूर्व अनुभव
माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों के पास इस मंत्रालय को संभालने से पहले अन्य मंत्रालय को संभालने का अनुभव था। उड्डयन मंत्री बनने से पहले माधवराव सिंधिया राजीव गांधी की सरकार में रेल मंत्री रह चुके थे जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया मनमोहन सिंह की सरकार में संचार एवं आईटी मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा पिता-पुत्र के बीच एक और समानता की बात करें तो दोनों ही नेताओं को सौम्य और प्रखर वक्ता के रूप में जाना जाता है। कांग्रेस में आने से पहले माधवराव सिंधिया जनसंघ के लिए काम करते थे, वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कांग्रेस में लंबे समय तक रहने के बाद भाजपा में शामिल हुए हैं।
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आसान नहीं है राह
हालांकि उड्डयन मंत्रालय में माधवराव सिंधिया का कार्यकाल कुछ खास नहीं रहा था लिहाजा ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पिता के साथ इस समानता को जरूर खत्म करना चाहेंगे। माधवराव सिंधिया ने बतौर रेल मंत्री कई सुधार किए थे, जिसमे शताब्दी ट्रेनों की शुरुआत भी शामिल है। लेकिन वह इसी प्रदर्शन को उड्डयन मंत्रालय में दोहरा नहीं सके, उनके खिलाफ भारतीय एयरलाइंस के स्टाफ ने कई प्रदर्शन किए। जिसके बाद अंत में माधवराव सिंधिया को इस्तीफा देना पड़ा और बाद में एक विमान हादसे में उनकी मृत्यु हो गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उड्डयन मंत्रालय का जिम्मा ऐसे समय में संभाला है जब यह सेक्टर काफी मुश्किल में है। इस साल मई माह की बात करें तो सिर्फ 13 फीसदी यात्री ही विमान कंपनियों को मिले हैं। ऐसे में जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने एक मुश्किल चुनौती है कि जो काम उनके पिता नहीं कर पाए क्या वह खुद कर पाएंगे।












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