दो सगे भाइयों ने रचाई एक ही दुल्हन से शादी, एक सरकारी अफसर तो दूसरा दुल्हा विदेश में, वजह कर देगी हैरान
Himachal Sirmaur brothers marry same Woman: जब आधुनिक दौर में रिश्तों की परिभाषाएं बदल रही हैं, ऐसे समय में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के एक सुदूर गांव से ऐसी ख़बर आई जिसने सबको चौंका दिया। यह न कोई फिल्मी कहानी है और न ही कोई कल्पना बल्कि एक सच्ची घटना है जिसकी चर्चा चारों ओर हो रही है।
हाटी जनजाति के दो सगे भाइयों ने परंपरा के अनुसार एक ही महिला से विवाह किया और यह फैसला उन्होंने पूरी पारदर्शिता और सहमति से लिया। इस बहुपति विवाह ने न सिर्फ गांव वालों की आंखों में आश्चर्य भरा, बल्कि पूरे देश में इस पर चर्चा शुरू हो गई। ट्रांस-गिरी के सुरम्य इलाके में तीन दिन तक चले इस विवाह समारोह में जहां लोक गीतों की मधुर धुनें गूंजीं, वहीं सोशल मीडिया पर इसके वीडियो भी जमकर वायरल हो रहे हैं।

दुल्हन सुनीता ने क्या कहा?
कुंहत गांव की रहने वाली सुनीता ने इस बहुपति विवाह पर चुप्पी नहीं साधी, बल्कि पूरे आत्मविश्वास से अपनी बात रखी। उनका कहना था, "मैं इस परंपरा से पहले से परिचित थी और मैंने यह निर्णय पूरी स्वतंत्रता के साथ लिया। यह कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर किया गया फैसला था।"
उन्होंने आगे कहा, "हां, यह परंपरा पुरानी है, लेकिन इसे निभाने या अपनाने का तरीका अब बदल चुका है। हमारे रिश्ते में सम्मान, पारदर्शिता और आपसी सहमति है - और मैं इसे मजबूती से स्वीकार करती हूं।"
एक भाई सरकारी अफसर, दूसरा विदेश में
शिलाई गांव के रहने वाले प्रदीप ने, जो कि एक सरकारी विभाग में कार्यरत हैं, बड़े आत्मविश्वास और गर्व के साथ कहा, हमने यह परंपरा खुले तौर पर निभाई क्योंकि हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व है। यह कोई छुपाने वाली बात नहीं, बल्कि हमारे परिवार की एकता और समझदारी का प्रतीक है। यह फैसला हम तीनों ने आपसी सहमति से और पूरे सम्मान के साथ लिया है।
दूसरे दूल्हे, कपिल नेगी, जो वर्तमान में विदेश में नौकरी करते हैं, ने भी अपने विचार बेहद साफ शब्दों में रखे, मैं भले ही विदेश में काम करता हूं, लेकिन इस विवाह के जरिए हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारी पत्नी को एकजुट परिवार का साथ, भावनात्मक स्थिरता और प्यार मिले। उन्होंने आगे जोड़ा, हमने हमेशा पारदर्शिता में विश्वास किया है। यह रिश्ता सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि विश्वास, ज़िम्मेदारी और साझेदारी का रूप है।"
हाटी जनजाति और बहुपति परंपरा
हाटी समुदाय हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित एक घनिष्ठ जनजातीय समूह है, जिसे तीन साल पहले अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा मिला था। इस समुदाय में बहुपति प्रथा सदियों से प्रचलन में रही है। हालांकि, बढ़ती साक्षरता और आर्थिक विकास के चलते अब इस परंपरा के उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं और ज़्यादातर विवाह गुपचुप तरीके से होते हैं, लेकिन समाज उन्हें स्वीकार करता है।
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाई.एस. परमार ने भी इस परंपरा पर शोध किया था और 'हिमालयी बहुपति प्रथा की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि' विषय पर लखनऊ विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परंपरा का एक प्रमुख कारण यह था कि पुश्तैनी ज़मीन का बंटवारा न हो। हालांकि आज भी जनजातीय महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
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