कौन हैं ये महिला अफसर? कांवड़ियों के पैर दबाने का Video हुआ Viral, जानिए उनकी संघर्ष की पूरी कहानी
Muzaffarnagar CO Rishika Singh Kanwar Yatra Video: कांवड़ यात्रा जहां लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी होती है, वहीं यह प्रशासनिक व्यवस्था और सेवा भावना की भी असली परीक्षा बन जाती है। उत्तर प्रदेश पुलिस इस चुनौती को सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता के साथ निभा रही है। इसका जीवंत उदाहरण तब देखने को मिला जब मुजफ्फरनगर की सीओ फुगाना ऋषिका सिंह ने न सिर्फ ड्यूटी निभाई, बल्कि कांवड़ियों की सेवा में खुद को समर्पित कर दिया। महिला शिवभक्तों के पैर दबाते और उनका हालचाल लेते हुए उनका एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया, जिसे देखकर लोग कहने लगे 'यही है असली सुशासन!'
उनकी इस मानवतावादी पहल की सराहना अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच चुकी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी ऋषिका सिंह की तारीफ की है। अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि, 'सेवा का भाव अच्छा है अगर उसके पीछे का भाव अच्छा है।'

कौन हैं ऋषिका सिंह?
सीओ ऋषिका सिंह आज सोशल मीडिया पर सिर्फ अपने पद और वर्दी के लिए नहीं, बल्कि अपने सेवा भाव और मानवीय संवेदना के लिए चर्चा में हैं। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर भी उतना ही प्रेरणादायक है। 18 अक्टूबर 1993 को लखनऊ में जन्मीं ऋषिका अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। जब उन्होंने दिल्ली जाकर UPSC की तैयारी शुरू की, तो उनके परिवार को आस-पड़ोस और रिश्तेदारों से ताने सुनने पड़े, लड़की है, क्यों इतना बड़ा सपना देख रही है? मगर ऋषिका ने हार नहीं मानी।
लखनऊ के एक स्कूल से कॉमर्स की पढ़ाई के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलतराम कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स किया। शुरुआत में एमबीए करने का इरादा था, लेकिन समाज के लिए कुछ सार्थक करने की भावना ने उन्हें सिविल सर्विस की ओर मोड़ दिया। बीकॉम के बाद करीब दो साल तक वे करियर को लेकर असमंजस में रहीं-कभी शिक्षक बनने की सोची, तो कभी कुछ और। लेकिन अंततः उन्होंने यूपीएससी का रास्ता चुना। दिल्ली में रहकर दिन के 14-14 घंटे पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या बन गई। मेहनत रंग लाई और वर्ष 2022 में यूपीपीएससी परीक्षा में उन्होंने 80वीं रैंक हासिल कर डीएसपी पद पर चयनित हुईं।
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फुगाना सर्किल में है तैनात
सीओ (क्षेत्राधिकारी) ऋषिका सिंह वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के फुगाना सर्किल में तैनात हैं। वे पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज, मुरादाबाद से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद 2022 बैच की पीपीएस अधिकारी के रूप में पहली पोस्टिंग में फुगाना क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान उनकी सक्रियता और सेवा भाव को लेकर वे इन दिनों विशेष रूप से सुर्खियों में हैं।
वायरल वीडियो में क्या है?
वीडियो में जो दृश्य सामने आया है, वह सामान्य प्रशासनिक गतिविधियों से हटकर एक ऐसा भावनात्मक क्षण बन गया है, जिसने लाखों लोगों का ध्यान खींचा है। वर्दी में तैनात सीओ ऋषिका सिंह का यह वीडियो इस समय इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वह महिला कांवड़ियों के पैरों को दबाते हुए नजर आ रही हैं। यह दृश्य इसलिए चर्चा का विषय बना, क्योंकि आम तौर पर पुलिस अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले सख्त स्वरूप में देखा जाता है। लेकिन यहां एक महिला अधिकारी अपने फर्ज से कहीं आगे जाकर श्रद्धालुओं की सेवा में जुटी हुई नजर आती हैं।
वीडियो में ऋषिका सिंह सिर्फ कांवड़ियों की शारीरिक थकान को दूर करने का प्रयास नहीं कर रहीं, बल्कि उनका हालचाल पूछकर यह भी सुनिश्चित कर रही हैं कि यात्रा उनके लिए सुरक्षित और सहज बनी रहे। यही मानवीय पहलू इस वीडियो को खास बनाता है। इस तरह की तस्वीरें दुर्लभ होती हैं, जब वर्दी सेवा का प्रतीक बन जाती है और अफसर संवेदना की मिसाल।
श्रद्धालुओं का रख रही हैं विशेष ध्यान
ऋषिका सिंह लगातार अपनी निस्वार्थ सेवा से इन श्रद्धालुओं को राहत पहुंचा रही हैं। वह केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि श्रद्धालुओं के थके हुए हाथों और पैरों की मालिश कर उनके कष्ट भी कम कर रही हैं। इसके साथ ही वह लगातार यह सुनिश्चित कर रही हैं कि महिला कांवड़ियों के लिए विशेष शौचालयों की व्यवस्था हो, उन्हें समय पर चिकित्सकीय सहायता मिले और यात्रा के दौरान किसी को भी असुविधा न हो।
किसी तरह की परेशानी न हो, इसका रख रहे हैं विशेष ध्यान
ऋषिका सिंह ने कहा, हमारी पुलिस, विशेष रूप से मुज़फ्फरनगर पुलिस, प्रशासन और हमारे अधिकारी लगातार मैदान में मौजूद रहते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, यातायात सुचारू रूप से चलता रहे और स्थानीय लोगों को भी कोई दिक्कत न हो।
उन्होंने आगे कहा, इसके अलावा, हम महिला कांवड़ियों के लिए विशेष शौचालय बना रहे हैं और उन्हें चिकित्सकीय सहायता भी प्रदान कर रहे हैं। हमने आकस्मिक स्थितियों से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर ली हैं और अभ्यास भी कराए जा रहे हैं, ताकि किसी अप्रत्याशित घटना से निपटा जा सके। हमारी तैयारी पूरी है, इसलिए मुझे नहीं लगता कि यह कोई कठिन कार्य होगा।
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