• search

#HerChoice: 'मैं शादीशुदा नहीं हूं और इसीलिए तुम्हारे पिता नहीं हैं'

By Bbc Hindi
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts
    HerChoice
    BBC
    HerChoice

    मेरी सात साल की बेटी किसी भी अन्य बच्चे की तरह खुश, लापरवाह और जिज्ञासु है. वो अपने आसपास की दुनिया और अपनी ज़िंदगी को लेकर उत्सुक रहती है. लेकिन अक्सर वो एक सवाल पूछती है कि 'आई (मां), मेरे पापा क्यों नहीं हैं?'

    मैंने सिंगल रहने का निर्णय लिया था और उसे हमेशा सच बताती रही कि 'मैं शादीशुदा नहीं हूं और इसीलिए तुम्हारे कोई पापा नहीं हैं.'

    लेकिन मुझे नहीं लगता है कि वो इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट थी.

    मैंने बेटी को गोद लिया है और उस परिवार में आकर इस बच्ची का मन व्याकुल था, जहां मां तो है लेकिन पापा नहीं.

    जब वो पांच साल की थी तो एक दिन उसने कहा, "आई, आपने मुझसे कहा था कि जब लड़के-लड़कियां बड़े होते हैं तो शादी करते हैं और उनके बच्चे होते हैं. मेरी मां की भी ज़रूर किसी से शादी हुई होगी. और जब मुझे जन्म देने वाली मां का पता नहीं है तो उसी तरह जन्म देने वाला पिता का भी पता नहीं है. लेकिन ये न कहें कि मेरे पास पापा नहीं हैं."

    मैं रो पड़ी. उस दिन मुझे पता चला कि उसके सवाल पर मेरी प्रतिक्रिया से उसे कैसा महसूस हुआ होगा.

    उसके लिए यह एक आसान तर्क था. एक पांच साल की लड़की ने अपने सवाल का जवाब ढूंढ लिया था.

    उसने मेरे स्पष्टीकरण को निरर्थक बना दिया था. एक मां और इंसान के रूप में उसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि मैं उसे कैसा अहसास दे रही हूं.

    #HerChoice 12 भारतीय महिलाओं के वास्तविक जीवन की कहानियों पर आधारित बीबीसी की विशेष सिरीज़ है. ये कहानियां 'आधुनिक भारतीय महिला' के विचार और उसके सामने मौजूद विकल्प, उसकी आकांक्षाओं, उसकी प्राथमिकताओं और उसकी इच्छाओं को पेश करती हैं.

    वो कहती रहती, "आई, शादी कर लो..."

    मैंने समझाया, "ऐसा नहीं है कि मैं शादी नहीं करना चाहती हूं. कल को मैं शादी कर सकती हूं. लेकिन तभी, जब मुझे ऐसा व्यक्ति मिल जाए जो मुझे और तुम्हें समझ सके."

    जब वो बड़ी हो जाएगी और फिर मुझसे यही सवाल दोहराएगी तो भी मेरा जवाब यही रहेगा.

    'हां, मैं ग़ैर-मर्दों के साथ चैट करती हूं, तो?'

    HerChoice
    BBC
    HerChoice

    सिंगल होना किसी भी तरह से कठिन नहीं होता है. मैं अपनी बेटी के साथ सिंगल मां का जीवन खुशी से गुज़ार रही हूं.

    मैं पुरुषों से नफ़रत नहीं करती, मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं और मेरी बेटी भी मुझसे यह सीख रही है.

    इसका जवाब आसान नहीं है कि मैंने शादी क्यों नहीं की और सिंगल रहने के बाद भी मैंने बच्चा गोद लेने का फ़ैसला क्यों किया.

    लगभग 20 साल पहले जब मेरी शादी की उम्र थी, ज़्यादातर तथाकथित 'शिक्षित' युवा पुरुष इसी बात पर ध्यान देते थे कि बाहर से आप कैसे दिख रहे हैं.

    मेरे समुदाय में ज़्यादातर लोग बिज़नेस करते हैं और इसीलिए लड़के अधिक पढ़े-लिखे नहीं होते थे.

    मुझे कोई ऐसा व्यक्ति चाहिए था, जो अच्छा पढ़ा-लिखा, मज़बूत नैतिक मूल्यों वाला हो और जैसी मैं अंदर से हूं, उसे पसंद करे.

    इस खोज ने मुझे ख़ुद को जानने का मौका दिया. मैं महाराष्ट्र के एक रूढ़िवादी ग्रामीण परिवार में बड़ी हुई हूं.

    भारत की कई अन्य लड़कियों की ही तरह मैं अपने घर में अस्तित्वहीन थी. परिवार को मेरे इस नज़रिये से कोई फ़र्क नहीं पड़ता था.

    मेरे पिताजी ने मुझे उच्च शिक्षा दिलाई, जो तब उस समुदाय में असाधारण बात थी. मुझे एक अच्छी नौकरी भी मिली. मैं एक आत्मविश्वास से भरी लड़की थी.

    जैसे-जैसे ज़िंदगी आगे बढ़ी, मुझे यह असहास हुआ कि मैं अपने तरीक़े से एक आज़ाद ज़िंदगी जीना चाहती थी, किसी और की मर्ज़ी से नहीं.

    शादी, जो किसी भी व्यक्ति के जीवन में एक बहुत बड़ा निर्णय होता है, उस पर सिर्फ़ मेरा और मेरे अकेले का फ़ैसला होना चाहिए. कोई और मेरे जीवन का निर्णय क्यों करे?

    'मैंने कुंवारी मां बनने का फ़ैसला क्यों किया?'

    जब ठेके पर दारू ख़रीदने पहुंचीं लड़कियां

    मुझे लगा कि मैं वाकई अपने जीवन में एक आदमी या पति को जीवनसाथी के रूप में नहीं चाहती. और इसीलिए मैं सिंगल रही.

    मेरे माता-पिता ने इसे स्वीकार किया.

    मेरे जीवन में कुछ नहीं बदलता, यदि मैं अपनी कंपनी के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) कार्यक्रम के तहत अनाथ बच्चों के लिए काम करना नहीं शुरू करती.

    पढ़ाने, खेलने और बच्चों के साथ समय बिताने से मुझे बहुत खुशी मिलती थी. मुझे यह सब करने की और अधिक की इच्छा होती थी. लेकिन मैं क्या कर सकती हूं, इसकी भी एक सीमा थी और इससे दूर रहना भी मेरे लिए असहनीय था.

    तभी मैंने बच्चा गोद लेने को सोचा था. लेकिन इस उपाय ने मेरे सामने कई सवाल भी पैदा कर दिए.

    यह बच्चा परिवार के साथ कैसे संबंध जोड़ेगा? क्या मैं अच्छी सिंगल मां बन सकूंगी? क्या मैं बच्चे की देखभाल करते हुए उसे अकेले पाल सकूंगी?

    मैं ख़ुद से ये सवाल दो सालों तक पूछती रही. और यहां तक कि जब मैंने एक लड़की को गोद लेने का फ़ैसला ले लिया, तब भी इसे लेकर अनिश्चित थी.

    मैंने अपने दोस्तों से बात की, लंबी सांसें लीं और उन मुद्दों को लिखा जो मुझे परेशान कर रहे थे.

    क्या यह सब सिंगल मां बनने की ज़िम्मेदारी का अहसास था? मुझे अहसास हुआ कि इसके लिए मेरे दोस्तों और परिवार वालों का समर्थन कितना अहम होगा.

    #HerChoice 'गाली भी महिलाओं के नाम पर ही दी जाती है!'

    #HerChoice : जब मेरे पति ने मुझे छोड़ दिया....

    HerChoice
    BBC
    HerChoice

    जब मेरी छह महीने की सुंदर बेटी घर आई तो यह मेरे लिए त्योहार जैसा दिन था. उस दिन क़रीब 50 लोग उसके स्वागत के लिए मौजूद थे.

    जब वो घर आई, मेरी सभी शंकाएं दूर हो गईं. वो घर की प्यारी पोती बन गई और मैं एक आश्वस्त सिंगल मां.

    साथ ही मैंने अपने माता-पिता के घर से अलग अकेले रहने का फ़ैसला किया. इससे हमारे बीच रिश्ता और मज़बूत हो गया.

    मुझे कभी नहीं लगा कि मैं उसकी 'असली' मां नहीं हूं.

    उसके ज़हन में अपने पिता के विषय में जानने की जिज्ञासा के बावजूद मेरी बेटी मुझे बहुत प्यार करती है और वो अक्सर बोलती है कि मैं दुनिया की सबसे अच्छी मां हूं.

    जब वो मुझे काम करते हुए देखती है तो कहती है कि 'अब तुम मेरी पापा हो!' यह मेरे लिए बहुमूल्य है.

    एक गोद लिए बच्चे की ज़िंदगी आसान नहीं होती और हम दोनों उन कई और कभी-कभी असंवेदनशील सवालों का जबाव देना सीख रहे हैं जिसका जवाब समाज हमसे चाहता है.

    कई लोग मुझसे मेरी बेटी का अतीत जानना चाहते हैं, जो वाकई बीत चुका है. कोई यह प्रश्न क्यों पूछता है? और उससे यह सवाल क्यों पूछा जाए?

    इन सभी जटिलताओं के बावजूद हमारा जीवन बहुत सरल है, आनंद और प्यार से भरा है. इन सब से मेरी बहन प्रेरित हुई और अब उसने भी एक बेटी को गोद लिया है.

    मेरी बेटी मेरे जीवन का बहुत ही अहम हिस्सा बन गई है. अब मैं गोद लेने की प्रक्रिया को लेकर मां-बाप और बच्चों को सलाह देती हूं.

    मेरी बेटी स्कूल जाना पसंद नहीं करती इसलिए मैंने घर पर ही उसकी स्कूली-शिक्षा शुरू कर दी है.

    मैं उसे अपने ख़ुद के लिए निर्णय लेने में मदद करना चाहती हूं. ऐसा मुझे अपने बचपन के दिनों में नहीं मिला था, जिसके मेरे लिए बहुत मायने हैं.

    जब भी वो मुझसे कहेगी कि वो स्कूल जाना चाहती है तो मैं उसे लेकर जाऊंगी. यह उसकी अपनी पहचान है जो उसे कुशल बनाएगी, जैसी मैं हूं.

    मैं अकेली नहीं हूं, मैं सिर्फ़ अकेले रहना चाहती हूं. लेकिन जब मैं अपनी बेटी के साथ होती हूं तब सबसे ज्यादा खुश रहती हूं.

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    BBC Hindi
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    HerChoice I am not married and therefore your father is not

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X