Heavy Rain Alert: क्या मानसून 2025 तोड़ देगा कई रिकॉर्ड, IMD अलर्ट में कब-कहां भारी बारिश की चेतावनी?
Heavy Rain Alert 2025: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बहुत भारी से अत्यंत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। बांग्लादेश के ऊपर बना दबाव अगले 12 घंटे में उत्तर-उत्तरपूर्व की ओर बढ़ते हुए एक चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र में परिवर्तित हो जाएगा।
न्यूज एजेंसी ANI ने आईएमडी के हवाले से खबर दी है कि अगले 7 दिनों तक पूर्वोत्तर भारत में व्यापक रूप से हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहने की संभावना है। असम और मेघालय में 30 मई और 1 जून को कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है, जबकि त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में 30 मई को ऐसे हालात बन सकते हैं। इसके अलावा, मेघालय में 30 मई को अत्यधिक भारी वर्षा (30 सेमी से अधिक) की भी संभावना जताई गई है।

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IMD Weather Forecast 2025, Northeast India Rainfall: सात दिन तक भारी बारिश की चेतावनी
असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा सहित उत्तर-पूर्वी राज्यों में अगले सात दिनों तक भारी वर्षा का दौर बना रह सकता है। साथ ही, 30 मई से 1 जून के बीच सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश का अनुमान है।
दक्षिणी भारत के केरल, तटीय कर्नाटक और तमिलनाडु के घाट क्षेत्रों में भी भारी बारिश जारी रहेगी। 30 मई को केरल और माहे में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है, जिसके बाद वर्षा की तीव्रता में कमी आ सकती है।
Kerala Rain Alert, South India Monsoon Update: बारिश के साथ तेज हवाएं
30 मई से 1 जून तक केरल, माहे और कर्नाटक के हिस्सों में व्यापक रूप से हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। वहीं, 30-31 मई को तमिलनाडु, पुदुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, यानम, रायलसीमा और तेलंगाना में बिखरी हुई हल्की से मध्यम वर्षा के साथ बिजली चमकने, गरज और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

30 मई को तटीय आंध्र प्रदेश, लक्षद्वीप और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश हो सकती है, जबकि तटीय कर्नाटक में 30 मई से 2 जून तक वर्षा जारी रह सकती है। केरल और माहे में 31 मई से 1 जून के बीच भी भारी बारिश की संभावना है।
Western Disturbance, Rain in North India: पश्चिमी विक्षोभ का कितना असर पड़ेगा?
उत्तर पश्चिम भारत में भी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण 30 मई से 3 जून तक जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में बिखरी हुई हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 40-50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाएं चलने की संभावना है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी इस दौरान छिटपुट वर्षा हो सकती है।

Dust Storm and Weather Alert Rajasthan: राजस्थान में धूलभरी आंधी के साथ बारिश का अनुमान
30 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में गरज के साथ 50-60 किमी प्रति घंटे की तेज हवाएं चल सकती हैं, जो 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। हिमाचल प्रदेश में 31 मई और 1 जून को ऐसी स्थिति बन सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल में 30-31 मई को, और उत्तराखंड में 30 मई से 1 जून तक कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पश्चिमी राजस्थान में 30 मई और 2 से 5 जून के बीच धूल भरी आंधी चलने की संभावना है।

पश्चिम भारत के कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात और मराठवाड़ा में 30 मई को हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के आसार हैं। कोंकण और गोवा में 30 मई से 2 जून तक कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। पूर्व और मध्य भारत में विदर्भ, छत्तीसगढ़, गंगा पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और बिहार में 30 मई से 1 जून तक हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। 30 मई को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, और 2-3 जून को विदर्भ में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है।

जून महीने के लिए औसत वर्षा सामान्य से अधिक
आईएमडी ने पहले ही अपने पूर्वानुमान में कहा था कि जून से सितंबर 2025 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान देशभर में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। जून महीने के लिए औसत वर्षा सामान्य से अधिक (लॉन्ग पीरियड एवरेज का 108% से ज्यादा) रहने का अनुमान है। जुलाई के लिए पूर्वानुमान जून के अंतिम सप्ताह में जारी किया जाएगा।
गौरतलब है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून 24 मई को केरल पहुंच गया, जो सामान्य तिथि (1 जून) से एक सप्ताह पहले है। यह 2009 के बाद पहली बार हुआ है जब मानसून इतनी जल्दी भारतीय मुख्यभूमि में प्रवेश कर गया। जहां एक ओर मानसून की अधिक वर्षा कृषि और जल संसाधनों के लिए लाभकारी मानी जाती है, वहीं दूसरी ओर इससे बाढ़, यातायात बाधा, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट और पारिस्थितिक तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है।
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