Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

तंबाकू और पान मसाला पर सरकार क्यों लगाने जा रही है नया सेस? संसद में पेश होने वाला है नया बिल

Health security se National security Cess Bill, 2025: संसद के शीतकालीन सत्र के पांचवें दिन (05 दिसंबर) केंद्र सरकार का एक अहम बिल लोकसभा में निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। नाम है - हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल (Health Security se National Security Cess Bill, 2025)। यह वही बिल है, जिसके जरिए पान मसाला और तंबाकू उद्योग पर एक नया सेस लगाने की तैयारी है।

खास बात यह है कि यह बिल सिर्फ लोकसभा से पास होते ही कानून बन सकता है। राज्यसभा इसमें केवल सुझाव दे सकती है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों। और सरकार तंबाकू पर नया कर लगाने पर इतनी जोर क्यों दे रही है।

Health security se National security Cess Bill 2025

🔵 सिर्फ लोकसभा से पास क्यों होता है यह बिल

'हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल' को मनी बिल के तौर पर पेश किया गया है। संविधान के तहत मनी बिल को लेकर विशेष प्रावधान हैं। ऐसे बिल सिर्फ लोकसभा में वोटिंग के जरिए पास होते हैं। राज्यसभा के पास इसे रोकने की ताकत नहीं होती। ऊपरी सदन केवल 14 दिन के भीतर अपनी सिफारिशें दे सकता है, जिन्हें लोकसभा मान भी सकती है और ठुकरा भी सकती है। यही कारण है कि यह बिल केवल लोकसभा की मंजूरी से ही कानून बन सकता है।

🔵 पान मसाला बनाने वाली मशीनों पर लगेगा सीधा सेस

इस बिल के तहत सरकार उन सभी फैक्ट्रियों पर सेस लगाएगी, जहां पान मसाला बनाने की मशीनें लगी हैं। इसमें फिल एंड सील मशीन, पाउच पैकिंग मशीन और टिन या डिब्बों में भरने वाली सभी मशीनें शामिल हैं। सेस की गणना मशीन की उत्पादन क्षमता के आधार पर होगी। यानी एक मिनट में कितने पाउच बनते हैं और उनमें कितना वजन भरा जाता है, उसी हिसाब से टैक्स तय होगा। सेस की रकम हर महीने की शुरुआत में जमा करनी होगी और अधिकतम सात तारीख तक भुगतान जरूरी होगा।

🔵 ₹1 करोड़ से ₹2.5 करोड़ तक जा सकता है मासिक सेस

  • सरकार ने सेस को चार श्रेणियों में बांटा है।
  • पहली श्रेणी में वे मशीनें आएंगी जो मिनट में 500 पाउच तक बनाती हैं।
  • दूसरी में 501 से 1000 पाउच,
  • तीसरी में 1001 से 1500 पाउच
  • और चौथी श्रेणी में 1500 से ज्यादा पाउच बनाने वाली मशीनें रखी गई हैं।
  • पाउच के वजन के हिसाब से यह सेस ₹1.01 करोड़ प्रति माह से लेकर करीब ₹2.5 करोड़ प्रति माह तक जा सकता है। नियम तोड़ने पर पांच साल तक की जेल का प्रावधान भी रखा गया है।

🔵 तंबाकू पर सेस क्यों लगाना चाहती है सरकार

सरकार का तर्क साफ है - यह सेस देश की स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। आंकड़े बताते हैं कि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा स्मोकलेस तंबाकू यानी गुटखा, पान मसाला और खैनी का इस्तेमाल करने वाला देश है। Global Adult Tobacco Survey के मुताबिक भारत में करीब 42 प्रतिशत पुरुष और 14 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। तंबाकू से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं और इलाज पर भारी खर्च आता है। सरकार चाहती है कि इस सेस से मिलने वाली राशि से स्वास्थ्य योजनाओं को मजबूत किया जाए।

🔵 क्या होता है सेस (What is cess in Hindi)

सेस सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक तरह का अतिरिक्त कर होता है, जिसे किसी खास मकसद या सेवा के लिए वसूला जाता है। यह टैक्स सामान्य करों जैसे आयकर या जीएसटी से अलग होता है। यानी सेस की रकम सीधे उसी काम में खर्च की जाती है, जिसके लिए इसे लगाया जाता है, न कि सरकार की आम आमदनी में जोड़ दी जाती है।

🔵 तंबाकू का बोझ और अरबों का नुकसान

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2016-17 में तंबाकू से होने वाली बीमारियों का आर्थिक बोझ करीब ₹1.77 लाख करोड़ तक पहुंच गया था। इसके बावजूद गुटखा पर बैन जमीन पर पूरी तरह असरदार नहीं हो पाया। सिगरेट और बीड़ी आज भी सिंगल स्टिक में खुलेआम बिक रही हैं। WHO की गाइडलाइन है कि तंबाकू पर एमआरपी का 75 प्रतिशत टैक्स होना चाहिए, लेकिन भारत अभी उससे काफी पीछे है।

🔵 विपक्ष के सवाल और सरकार की सफाई

इस बिल पर संसद में जमकर बहस हुई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस सेस के जरिए अपनी तिजोरी भरना चाहती है, क्योंकि पहले वाला कंपनसेशन सेस खत्म किया जा चुका है। कई सांसदों ने यह भी कहा कि इसका सीधा असर तंबाकू किसानों और बीड़ी रोलिंग में काम करने वाली महिलाओं पर पड़ेगा। विपक्ष का यह भी आरोप है कि इससे तस्करी बढ़ेगी और अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार का जवाब है कि यह कदम किसानों को धीरे-धीरे तंबाकू की खेती से बाहर निकालने और वैकल्पिक फसलों की ओर मोड़ने के लिए उठाया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भरोसा भी दिया है कि सेस से मिली रकम का एक हिस्सा राज्यों को स्वास्थ्य योजनाओं के लिए दिया जाएगा।

🔵 सवाल अब भी कायम

नाम भले ही Health Security se National Security Cess रखा गया हो, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि इस रकम का कितना हिस्सा सीधे तंबाकू विरोधी अभियानों में जाएगा। यही वजह है कि यह बिल राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक तीनों स्तरों पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

अब सबकी नजरें लोकसभा पर टिकी हैं, जहां इस बिल पर आज फैसला संभव है। अगर यह पास हो जाता है, तो तंबाकू उद्योग के लिए आने वाला समय पहले से कहीं ज्यादा महंगा और सख्त होने वाला है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+