बुखार वाले मरीज को मानें कोविड का संदिग्ध, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिए राज्यों को निर्देश
नई दिल्ली, 31 दिसंबर: देश में एक बार फिर से कोरोना वायरस बेकाबू हो रहा है। लगातार ओमिक्रॉन के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति को काबू करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पूरी ताकत के साथ काम कर रहा है। दिल्ली और महाराष्ट्र से मिल रहे मामले देश में तीसरी कोरोना लहर के संकेत दे दिए हैं। ज्यादातर राज्यों ने नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। वहीं दिल्ली में कोरोना के मद्देनजर येलो अलर्ट तो महाराष्ट्र में भी कई पाबंदियां लगाई गई है। देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच शुक्रवार को केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कहा कि वे बुखार वाले मरीज को कोविड-19 मानें और उसका टेस्ट कराएं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी जगह पत्र लिखकर टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा कि बुखार से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को COVID-19 का संदिग्ध मामला माना जाना चाहिए। शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण और आईसीएमआर के डीजी डॉ. बलराम भार्गव ने सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा कि विभिन्न स्थानों पर चौबीसों घंटे आरएटी ( रैपिड एंटीटेन टेस्ट) बूथ स्थापित करें। साथ ही चिकित्सा और पैरामेडिकल स्टाफ को शामिल करने और घरेलू परीक्षण किट के उपयोग करने के भी निर्देश दिए।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने लेटर ने कहा कि देश के कई हिस्सों में पॉजिटिविटी रेट के साथ कोरोना के नए मामलों में काफी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ऐसे में संदिग्ध मरीजों और उनके संपर्कों में आने वालो का प्राइमरी लेवल पर ही टेस्ट करना, जो कि नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को रोकने के सबसे पहले उपायों में से एक है।
इसी के साथ मंत्रालय ने कहा कि खांसी, सिरदर्द, गले में खराश, सांस फूलना, शरीर में दर्द, स्वाद या गंध की हाल ही में कमी, थकान और दस्त के साथ / बिना बुखार वाले किसी भी व्यक्ति को कोरोना का संदिग्ध मामला माना जाना चाहिए, जब तक कि पता ना चल पाएं।












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