हरियाणा में फिर से सुलगने लगा जाट आरक्षण का मुद्दा, मराठा आंदोलन की तरह बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा बीजेपी को मुंबई से लेकर दिल्ली तक परेशान किए हुए है। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी को इससे निकलने का विकल्प नहीं मिल रहा है। फिलहाल किसी तरह से आंदोलनकारियों से कुछ समय की मोहलत जरूर मिली है। लेकिन, अब हरियाणा में उसी तरह के आंदोलन को हवा देने की कोशिश शुरू हो चुकी है।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने जाटों को हरियाणा समेत कुछ अन्य राज्यों में भी केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल किए जाने की मांग पर फिर से जोर देना शुरू कर दिया है। इस महीने से ही वे इसके लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी में जुट चुके हैं।

मराठा आंदोलन के बाद जाट आरक्षण का गरम हो रहा मुद्दा
महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन की चपेट में वहां की बीजेपी, शिवसेना और अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी सरकार जिस तरह से आई है, उससे हरियाणा में भी जाट नेताओं को अपने लिए अच्छा अवसर दिखने लगा है। एक अनुमान के अनुसार हरियाणा में जाट जाति की आबादी 29% के करीब है।
जाटों को केंद्रीय ओबीसी लिस्ट में शामिल करने की मांग
ऐसे में इस जाति की ओर से कोई आंदोलन शुरू होता है और वह भी उसके अपने फायदे के लिए तो उसका सियासी संकेत समझा जा सकता है। शनिवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने दिल्ली में एक बैठक की है और मांग की है कि कई राज्यों और खासकर हरियाणा में जाटों को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल किया जाए।
इसके राष्ट्रीय संयोजक यशपाल मलिक ने कहा, 'केंद्र ने जाटों को केंद्रीय स्तर पर और हरियाणा में ओबीसी का दर्जा दिए जाने का अपना वादा नहीं पूरा किया है। अब अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए हमें फिर से आंदोलन शुरू करना ही होगा।'
2024 में लोकसभा चुनावों के बाद हरियाणा विधानसभा का भी चुनाव
उनके मुताबिक यह समिति कई राज्यों में अपनी मांगों को लेकर रैलियों की योजना बना रही है और ऐसी पहली रैली हरियाणा के रोहतक में 26 नवंबर को आयोजित की जाएगी। हरियाणा में अगले साल लोकसभा चुनावों के बाद विधानसभा चुनाव भी होने हैं और इस वजह से जाट आंदोलन की चर्चा गरम होने के मायने समझे जा सकते हैं।
बीजेपी ने हाल ही में ओबीसी नेता को सौंपी है प्रदेश की कमान
दरअसल, बीजेपी ने एक बार फिर से 2024 के लोकसभा चुनावों में हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। इससे पहले पार्टी ने राज्य में अपने जाट नेता ओम प्रकाश धनकड़ की जगह पर ओबीसी समाज के नेता नायब सिंह सैनी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी है।
कहा जाता है कि भाजपा के नए जातिगत समीकरण ने राज्य में हमेशा की मजबूत जाट आधारित राजनीति की पकड़ ढीली कर रखी है।
पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार अरविंद कुमार शर्मा ने जिस तरह से खासकर राज्य की रोहतक सीट पर कांग्रेस के दिग्गज जाट परिवार के नेता दीपेंद्र हुड्डा को हरा दिया था, उसे प्रदेश की जाट राजनीति के लिए बहुत बड़ा झटका माना गया था।
राज्य में पिछले 9 वर्षों से बीजेपी नेता मनोहर लाल खट्टर मुख्यमंत्री हैं। जाटों के प्रभाव वाले राज्य की राजनीति में एक गैर-जाट नेता को सीएम बनाए रखने को बीजेपी की ओबीसी राजनीति को सहेजने के तौर पर देखा जाता है। जबकि, माना जाता है कि राज्य में जाटों का समर्थन आमतौर पर कांग्रेस के अलावा इंडियन नेशनल लोकदल और जननायक जनता पार्टी के बीच बंटा हुआ है।
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