क्या हरियाणा में हाथ आई बाजी बीजेपी को दे रही है कांग्रेस? विधानसभा चुनावों में बदल सकता है समीकरण
Haryana Vidhan Sabha Chunav 2024: कांग्रेस हरियाणा विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने एक सीट 'आप' के लिए छोड़ी थी। लोकसभा चुनावों के नतीजों को देखने के बाद कांग्रेस के इस फैसले से भाजपा खुश हो रही होगी।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को हरियाणा और दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की अपनी सहयोगी आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाएं पूरी तरह से खारिज कर दी हैं।

कांग्रेस हरियाणा में नहीं करेगी 'आप' से गठबंधन
न्यूज एजेंसी पीटीआई से कांग्रेस नेता ने कहा है, 'पंजाब में कोई इंडिया 'जनबंधन' नहीं है। लोकसभा चुनावों में हरियाणा में हमने आम आदमी पार्टी को एक सीट दी थी, लेकिन मैं नहीं समझता कि विधानसभा चुनावों के लिए कोई इंडिया 'जनबंधन' होगा। दिल्ली में तो 'आप' ने खुद ही कहा है कि विधानसभा चुनावों में कोई इंडिया 'जनबंधन' नहीं होगा।'
जब जयराम से खास तौर पर दिल्ली और हरियाणा में गठबंधन को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'दिल्ली और हरियाणा में (गठबंधन की) कोई संभावना नहीं है।' हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में अक्टूबर में चुनाव होने हैं और दिल्ली में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव करवाया जाना है।
विधानसभा चुनावों में भाजपा को हो सकता है फायदा
कांग्रेस की ओर से जो घोषणा की गई है, वह बीजेपी के लिए खुश होने की वजह बन सकती है। लोकसभा चुनावों में हरियाणा की 10 सीटों में से बीजेपी और कांग्रेस ने 5-5 सीटें जीती हैं।
लेकिन, अगर इन 10 लोकसभा सीटों के हिसाब से दोनों दलों को राज्य की 90 विधानसभा क्षेत्रों में मिली बढ़त को देखें तो भाजपा की स्थिति कांग्रेस के मुकाबले बेहतर हो सकती है।
लोकसभा चुनावों में इंडिया ब्लॉक को 46 सीटों पर बढ़त मिली थी
2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी राज्य की 44 सीटों पर आगे रही थी और इंडिया ब्लॉक को कुल 46 सीटों पर बढ़त मिली थी। यह आंकड़ा बहुमत के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े को पूरा करता है। लेकिन, अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग चुनाव लड़ती है तो भाजपा का पलड़ा भारी पड़ सकता है।
लोकसभा चुनावों में बीजेपी सभी 10 सीटों पर अकेले लड़ी थी और कांग्रेस ने 9 सीटों पर मुकाबला किया था। एक सीट पर कांग्रेस के सहयोग से आम आदमी लड़ी थी। इनमें से कांग्रेस को 42 विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली है, जबकि आम आदमी पार्टी 4 सीटों पर बढ़त बना सकी है।
दिल्ली में गठबंधन की संभावना 'आप' पहले ही कर चुकी है खारिज
पिछले महीने दिल्ली सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी नेता गोपाल राय ने लोकसभा चुनावों में गठबंधन के बावजूद राजधानी की सभी सात लोकसभा सीटें हारने के बाद साफ किया था कि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा।
उन्होंने कहा था, 'इंडिया ब्लॉक सिर्फ लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए था। चुनावों में कई पार्टियां मिलकर लड़ीं और आप भी उसका हिस्सा थी। फिलहाल दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कोई गठबंधन नहीं है।'
शराब घोटाले की वजह से हारे- कांग्रेस
कुछ दिन पहले ही कांग्रेस के नेता अभिषेक दत्त ने राजधानी में इंडिया ब्लॉक की करारी शिकस्त के लिए दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के शराब घोटाला को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा था, 'मुझे लगता है कि अगर हमने उनके साथ चुनाव नहीं लड़ा होता तो, चुनावों में कांग्रेस की सीटें बढ़ जातीं। शराब घोटाले की वजह से लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को नुकसान हुआ।'












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