Haryana Chunav 2024: केवल सत्ता-सुख के लिए आप-कांग्रेस का बेमेल गठजोड़, दोनों भ्रष्ट विकास से नहीं मतलब
Haryana Assembly Election 2024: हरियाणा में आगामी चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन की चर्चा ज़ोर पकड़ रही है। इस गठबंधन को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए इसे भ्रष्ट और सत्ता-लोलुप बताया है। सैनी के अनुसार, यह गठबंधन किसी सिद्धांत या राज्य के विकास के लिए नहीं, बल्कि केवल सत्ता हथियाने के लिए किया जा रहा है।
इस गठबंधन की मूल प्रकृति को समझने के राजनीतिक हलकों में इसे "सुविधा का गठबंधन" या अवसरवादी अलायंस माना जा रहा है, जिसमें दोनों पार्टियां केवल अपने निजी हितों के लिए एक साथ आई हैं। यह गठबंधन केवल अपने राजनीतिक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए है।

वहीं प्रदेश में सत्ताधारी दल भाजपा का कहना है कि यह गठबंधन राज्य के संसाधनों को लूटने के इरादे से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सैनी के मुताबिक, दोनों पार्टियों का राज्य के विकास से कोई वास्ता नहीं है। उनकी प्राथमिकता केवल सत्ता में बने रहने की है, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी प्रकार के अपवित्र गठबंधन का सहारा लेना पड़े।
इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य यह है कि बीजेपी की सत्ता को चुनौती दी जा सके, क्योंकि बीजेपी के नेतृत्व में हरियाणा लगातार तरक्की कर रहा है। राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिकीकरण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिसने हरियाणा को विकास की दिशा में एक नई ऊँचाई दी है। ऐसे में, विपक्षी पार्टियों को इस बात का डर है कि वे अकेले चुनावी मैदान में बीजेपी को टक्कर नहीं दे पाएंगी, और इसलिए वे एकजुट होकर सत्ता प्राप्त करने का प्रयास कर रही हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आप और कांग्रेस के नेताओं को खुद पर भरोसा नहीं है कि वे अपने दम पर सत्ता में आ सकते हैं। यही कारण है कि वे आपसी मतभेदों को दरकिनार कर सिर्फ सत्ता की लालसा में एकजुट हो रहे हैं। इससे साफ है कि उनके पास राज्य के विकास के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।
इस तथाकथित 'अपवित्र गठबंधन' से जनता को केवल यह संदेश मिल रहा है कि आप और कांग्रेस केवल व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए राजनीति कर रही हैं। इस गठबंधन का एकमात्र उद्देश्य राज्य की जनता को धोखा देकर सत्ता हासिल करना और राज्य को विकास की पटरी से उतारना है। हरियाणा की जनता को यह समझना होगा कि यह गठबंधन सिर्फ और सिर्फ राज्य को लूटने और विकास को रोकने का एक और प्रयास है।
इधर आम आदमी पार्टी से गठबंधन की आश लगाए कांग्रेस के सामने भाजपा ने मजबूत चुनौती पेश कर दी है। यह चुनौती इस बार आई है भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की पहली सूची के रूप में। भाजपा ने पहली ही सूची में 67 नामों की घोषणा करते हुए ओबीसी, महिला, दलित, युवा और सवर्ण समुदाय को भी समानुपातिक प्रतिनिधित्व देते हुए तमाम सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास करती हुई लग रही है जबकि गठबंधन की आहट से इस बात के संकेत मिलते हैं कि कांग्रेस में आत्मविश्वास की कमी है या बहुत अधिक गुटबाजी।
उधर आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस के संभावित गठबंधन को लेकर कांग्रेस पार्टी के अंदर भी विरोध के सुर उभरने लगे हैं। कल पंजाब के पूर्व काबीना मंत्री प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी से गठबंधन करने से सिर्फ नुकसान ही होगा। पंजाब में इसका हस्र देख चुके हैं, पार्टी को आप से गठबंधन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।












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