क्या हार्दिक के जरिये मोदी के गढ़ में सेंध लगा सकेगी कांग्रेस?
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों खासकर कांग्रेस और भाजपा ने अपने एजेंडे तय करने शुरू कर दिए हैं। जहां भाजपा खुद को राष्ट्रवाद और अयोध्या जैसे मुद्दों पर केंद्रित करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस ने भी कुछ अहम चुनावी संकेत देने शुरू कर दिए हैं। इस संदर्भ में दो-तीन प्रमुख संकेतों को हर कोई जरूर समझना चाहेगा। इसमें गुजरात में सीडब्ल्यूसी की बैठक करना, बैठक में पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल का कांग्रेस में शामिल होना और नवनियुक्त पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी का रैली में संबोधन। मतलब कांग्रेस की पूरी कोशिश गुजरात फतेह की लग रही है। यह सब कुछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गढ़ उस गुजरात में हुआ जहां के बारे में माना जाता है कि सब कुछ उन्हीं का है। इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है हार्दिक पटेल का कांग्रेस में शामिल होना। वैसे तो यह एक तरह से काफी पहले से तय हो गया था कि हार्दिक कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने खुद इस आशय की घोषणा कर दी थी। अब जबकि वह कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, तब यह सवाल जरूर ही हर किसी के दिमाग में स्वाभाविक रूप से होगा कि आखिर इससे कांग्रेस को कितना लाभ मिल सकता है और भाजपा को कितना नुकसान पहुंच सकता है।

कांग्रेस के लिए कितने फायदेमंद होंगे हार्दिक
इस सब पर कोई अंतिम राय बनाने से पहले कुछ अन्य बातों को भी समझ लेना जरूरी है। सबसे पहली बात यह है कि हार्दिक पटेल पादीदार आंदोलन के सबसे बड़े नेता के रूप में उभरे हैं। यह भी माना जाता है कि उनके पीछे राज्य के पाटीदारों के अलावा और भी बहुत सारे लोग जुड़े हैं। उन्होंने राज्य में न केवल बड़े आंदोलन और रैलियां की हैं बल्कि भाजपा को परेशान भी किया है। नेतृत्व के समक्ष इस आंदोलन से निपटने के लिए और हार्दिक को जनमानस से काटने के प्रयास भी कम नहीं किए गए। इसके बावजूद गुजरात में और गुजरात के बाहर हार्दिक पटेल को व्यापक जनसमर्थक मिलता रहा है। कहा यह भी जाता है कि वह पाटीदारों के एकछत्र नेता के रूप में उभरे हैं। इसके अलावा अन्य पिछड़े समुदायों के बीच भी उनको लेकर सकारात्मक भाव माना जाता है। हालांकि राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जाता है कि यह कोई ऐसा बड़ा समूह नहीं है जो पूरे प्रदेश में एक जैसी हैसियत रखता हो। इसके बावजूद एक मजबूत ताकत के रूप में हार्दिक पटेल को उनके विरोधी भी स्वीकार करते हैं।
ऐसे में अगर देखा जाए तो वोट के लिहाज से भले ही किसी तरह की दुविधा हो कि वे कांग्रेस के पक्ष में कितने लोगों को जोड़ पाते हैं। लेकिन इतना तो तय माना जा रहा है कि हार्दिक पटेल के कांग्रेस में शामिल हो जाने से कांग्रेस को एक अतिरिक्त ताकत तो मिली है। कांग्रेस भी यह मानकर चल रही है कि हार्दिक के आने से पूरे राज्य में उसे फायदा मिल सकता है। दरअसल, हार्दिक के शामिल होने को कांग्रेस कई स्तरों पर अपने लिए फायदा मान रही होगी। कांग्रेस के लिए गुजरात लंबे समय से ऐसा राज्य रहा है जहां उसका प्रदर्शन बहुत ही कमजोर रहा है। बीते करीब दो दशकों में वहां भाजपा की सरकार रही है। जबकि उससे पहले कुछ एक अपवादों को छोड़ दिया जाए तो कभी वहां कांग्रेस का शासन रहा करता था।

नए सिरे से खड़ा होना चाहती है कांग्रेस
गुजरात में लगातार खराब प्रदर्शन से एक तरह से यह लगने लगा था कि वहां अब पार्टी शायद ही कभी नए सिरे से खुद को स्थापित कर सकेगी। इस निराशा के दौर में कांग्रेस को कुछ सफलता बीते विधानसभा चुनाव में मिली जब उसने सत्ताधारी भाजपा को कड़ी टक्कर दी और एक तरह से साबित करने की कोशिश की कि अगर मजबूती से चुनाव लड़ा जाए तो गुजरात में मोदी के गढ़ को ध्वस्त किया जा सकता है और कांग्रेस को नए सिरे से स्थापित किया जा सकता है। गुजरात से राज्यसभा की एक सीट के लिए हुए चुनाव भाजपा की तमाम कोशिशों को धता बताते हुए कांग्रेस प्रत्याशी अहमद पटेल की जीत ने भी पार्टी के भीतर एक नया विश्वास जगाया था। बीते विधानसभा चुनाव में ही एक अन्य सामाजिक नेता अल्पेश ठाकुर के आने से कांग्रेस को काफी लाभ हुआ था। ठाकुर विधानसभा चुनाव भी जीते। इससे गुजरात को लेकर कांग्रेस नेतृत्व खासकर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के भीतर यह विश्वास नए सिरे से जगा है कि वे गुजरात फतेह कर सकते हैं और मोदी के गढ़ में सेंध लगा सकते हैं।
कांग्रेस का हार्दिक पटेल को साथ लेकर इस दिशा में बढ़ाया गया एक कदम माना जा सकता है। लेकिन यह कांग्रेस की इच्छा के अनुरूप कितना होगा, कहा नहीं जा सकता। सभी के साथ भाजपा को भी यह पहले से पता था कि हार्दिक पटेल कांग्रेस के साथ जाने वाले हैं। ऐसे में उसकी ओर से भी पहले से तैयारियां की जा रही थीं। भाजपा की यह पूरी कोशिश है कि कैसे हार्दिक पटेल से होने वाले कांग्रेस को लाभ को कम किया जाए। इसमें सबसे अहम भूमिका केंद्र की ओर से दिए गए 10 फीसदी आरक्षण को भी माना जा सकता जिसके बारे में भाजपा मानकर चल रही है इसके जरिये उसने हार्दिक की मजबूत काट पेश की है। इसके अलावा, राज्य की पाटीदार से लेकर अन्य पिछड़ी जातियों को लुभाने में भी भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अभी कांग्रेस के एक विधायक वल्लभ धारविया को अपने पक्ष में कर लिया है जिनका एक समुदाय सतवरा में बहुत प्रभाव माना जाता है। कांग्रेस के ही एक अन्य विधायक जवाहर चावड़ा को कैबिनेट मंत्री बनाकर ओबीसी समुदाय को साधने की कोशिश की है। इसके अलावा हार्दिक पटेल के पटेल समुदाय को अपने पक्ष में करने के लिए भी भाजपा लगातार हरसंभव कोशिश कर रही है।

क्या हार्दिक से कांग्रेस को बड़ा लाभ होगा?
ऐसे में यह कहना बहुत समीचीन नहीं लगता कि हार्दिक पटेल के कांग्रेस में आने से पूरे राज्य में कोई बहुत बड़ा लाभ मिल सकता है। लेकिन इतना तो समझा ही जा सकता है कि कांग्रेस ने अपने तुरुप के पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं और प्रारंभिक तौर पर भाजपा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस की इस कोशिश का इतना लाभ तो जरूर मिलता दिख रहा है कि वह कम से कम राज्य में चुनावी विमर्श में खुद को स्थापित करने में कामयाब हो सकती है कि उसे कम करके न आंका जाए। इसके विपरीत इसके जरिये वह यह स्थापित करने में भी सफल हो सकती है कि राज्य की सत्ता की दावेदार भी हो सकती है। कम से कम इतना तो कहा ही जा सकता है कि हार्दिक पटेल के आने से कांग्रेस के पक्ष में कुछ सकारात्मक चीजें हो सकती हैं। हालांकि हार्दिक के जामनगर से चुनाव लड़ने की भी चर्चाएं हैं। लेकिन यह तो तभी पता चलेगा जब टिकटों का बटवारा हो जाएगा। अगर हार्दिक जामनगर से प्रत्याशी होते हैं, तो इसकी संभावना हो सकती है कि वहां से अप्रत्याशित परिणाम आ जाए। फिलहाल हार्दिक पटेल के कांग्रेस में आने से यह तो हुआ है कि मोदी के गढ़ में कांग्रेस को अपेक्षाकृत मजबूती मिलने से शायद ही कोई इनकार करे।












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