कोरोना संक्रमित युवाओं के लिए काल बना हैप्पी हाईपोक्सिया, ऐसे चुपके से सुला देता है 'मौत की नींद'

नई दिल्ली, मई 13: इंडोनेशिया के एक अस्पताल में मार्च 2020 में एक कोविड -19 रोगी बुखार और खांसी की शिकायत लेकर पहुंचा था। वह चिकित्सकीय रूप से ठीक था और आसानी से घूम फिर रहा था, मोबाइल चला रहा था। उसका रक्तचाप, नाड़ी और शरीर का तापमान सामान्य था। लेकिन जब डॉक्टरों ने उसका ऑक्सीनज लेवल जाँचा, तो उसका ऑक्सीजन स्तर 77 प्रतिशत था। यह कोविड -19 के शुरुआती मामलों में से एक था, जहां रोगी को यह नहीं पता चल पा रहा था कि उसके शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो रही है। ऐसे मामलों को अब डॉक्टरों ने हैप्पी हाईपोक्सिया नाम दिया है।

हैप्पी हाईपोक्सिया के मामलों ने डॉक्टरों की परेशानी बढ़ा दी है

हैप्पी हाईपोक्सिया के मामलों ने डॉक्टरों की परेशानी बढ़ा दी है

हैप्पी हाईपोक्सिया के मामलों ने डॉक्टरों की परेशानी बढ़ा दी है। कोरोना के बहुत कम लक्षण या बिना लक्षण वाले युवा मरीजों में ऑक्सीजन का लेवल अचानक तेजी से गिरता है। ये कोरोना का एक ऐसा लक्षण है कि जिसमें न सांस फूलती है और न थकान महसूस होगी। लेकिन हैप्पी हाइपेक्सिया चोरी-चोरी अपना काम करता है। कुछ समय बाद मरीज की मौत हो जाती है। यही वजह है कि हैप्पी हाइपोक्सिया को 'साइलेंट किलर' भी कहा जा रहा है।

हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना की खतरनाक स्टेजों में से एक है

हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना की खतरनाक स्टेजों में से एक है

हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना की खतरनाक स्टेजों में से एक है। ये बीमारी कोविड मरीज को हार्ट अटैक जैसा झटका देती है और उसे मौत में मुंह में ढकेल देती है। हाइपोक्सिया का मतलब है- खून में ऑक्सीजन के स्तर का बहुत कम हो जाना। स्वस्थ व्यक्ति के खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन 95% या इससे ज्यादा होता है। पर कोरोना मरीजों में ऑक्सीजन सेचुरेशन घटकर 50% तक पहुंच रहा है। हाइपोक्सिया की वजह से किडनी, दिमाग, दिल और अन्य प्रमुख अंग काम करना बंद कर सकते हैं। कोरोना मरीजों में शुरुआती स्तर पर कोई लक्षण नहीं दिखता। वह ठीक और 'हैप्पी' ही नजर आता है।

हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण फेफड़ों में खून की नसों में थक्के जम जम जाते हैं

हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण फेफड़ों में खून की नसों में थक्के जम जम जाते हैं

जानकारों का कहना है कि युवाओं की इम्यूनिटी काफी स्ट्रांग होती है, ऐसे में उनका ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल नीचे भी आ जाता तो उन्हें कुछ महसूस नहीं होता है कि वे साइलेंट किलर हाइपोक्सिया की चपेट में आ चुके हैं। हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण फेफड़ों में खून की नसों में थक्के जम जम जाते हैं। इस कारण फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है, जिसके चलते ब्लड में ऑक्सीजन सेचुरेशन की मात्रा कम हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाइपोक्सिया के कारण दिल, दिमाग, किडनी जैसे शरीर के प्रमुख अंग काम करना बंद कर सकते हैं।

ये है हैप्पी हाईपोक्सिया के लक्षण

ये है हैप्पी हाईपोक्सिया के लक्षण

हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण 6 से 9 दिन के बीच आते हैं। कोरोना मरीजों को पल्स ऑक्सीमीटर पर अपनी ऑक्सीजन जांचने की सलाह दी जाती है। हैप्पी हाइपोक्सिया में होठों का रंग बदलने लगता है। वह हल्का नीला होने लगता है। त्वचा भी लाल/बैंगनी होने लगती है। गर्मी में न होने या कसरत न करने के बाद भी लगातार पसीना आता है। यह खून में ऑक्सीजन कम होने के लक्षण हैं। लक्षणों पर नजर रखने से जरूरत पड़ने पर तत्काल अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है।

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