Hamida Banu पाकिस्‍तान से 22 साल बाद इंडिया लौटी, जानें कैसे हुई वतन वापसी, क्‍यों गई थी बॉर्डर पार?

Hamida Banu Return from Pakistan: भारतीय महिला हमीदा बानू की 22 साल बाद पाकिस्‍तान से सकुशल वतन वापसी हुई है। भारत में कदम रखते ही हमीदा बानू भावुक हो गई और मीडिया के सामने आपबीती बयां की, जो रह किसी को झकझोर देने वाली है।

नयूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में 22 साल से ज़्यादा समय के बाद पाकिस्तान से भारत लौटीं हमीदा बानू कहती हैं, "मैं साल 2002 में पाकिस्तान गई थी। वहां हालात बहुत दयनीय थे, मगर सरकार के स्‍तर पर कोई परेशानी नहीं हुई। मैं पाकिस्‍तान में एक सिंधी से शादी करके उसके घर में रही।

Hamida Banu India Pakistan

हमीदा बानू कहती हैं कि पाकिस्‍तान के कई लोगों ने उनके वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किए थे। एक साल पहले भारतीय दूतावास ने मुझसे संपर्क किया और कहा कि मैं भारत जा सकती हूँ। आज मैं भारत लौट आई हूँ..."

हमीदा बानू कहती हैं कि मैं भारत में मुंबई में रहती थी। धोखे से मुझे दुबई के रास्‍ते पाकिस्‍तान पहुंचाया गया। पाकिस्‍तान में बहुत तकलीफें झेलीं। अब जाकर वतन वापसी हो पाई है। हमीदा बानू को दिसंबर 2024 में अमृतसर, पंजाब के रास्‍ते भारत लाया गया है।

मुंबई की रहने वाली हमीदा बानो आखिरकार 22 साल बाद भारत लौट आई हैं। उनकी घर वापसी की यात्रा पंजाब के वाघा बॉर्डर से शुरू हुई थी। दो दशक पहले वह मानव तस्करी का शिकार हो गई थीं। दो साल पहले एक पाकिस्तानी यूट्यूबर ने उनकी कहानी शेयर की, जिसके बाद आखिरकार वह वापस लौट आईं।

2002 में हमीदा दुबई जाना चाहती थी, लेकिन उसे पाकिस्तान भेज दिया गया। इससे पहले वह दोहा में नौ महीने और दुबई में छह महीने काम कर चुकी थी। सऊदी अरब में उसने तीन महीने काम किया और फिर अप्रत्याशित रूप से पाकिस्तान चली गई।

हमीदा के पिता का नाम गुल मोहम्मद था और उनकी माँ का नाम अमीना बानो था। वह सात भाई-बहनों में से एक हैं, जिनमें चार भाई और तीन बहनें हैं। उनका परिवार मुंबई में कुर्ला कुरैश नगर रेलवे स्टेशन के पास रहता था।

उसके पति की मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण उसके पास न तो रहने के लिए घर था और न ही भोजन। अपने बच्चों यूसुफ, फजल, यास्मीन और प्रवीण का भरण-पोषण करने के लिए उसने विदेश में काम करने का फैसला किया।

हमीदा ने बताया कि इस मुश्किल समय में उसके पास पैसे नहीं थे, सिवाय उसके सलवार में छिपे कुछ पैसों के। उसने एक बार अपने परिवार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन पाया कि नंबर बदल गए हैं। इससे उसकी उम्मीदें टूट गईं और वह इस्लामाबाद पहुंच गई, जहां उसने आखिरकार दोबारा शादी कर ली। उन्होंने बताया कि दुबई जाने के नाम पर विभिन्न राज्यों से उनके साथ करीब 500 महिलाओं की तस्करी की गई। उनका पता अभी तक अज्ञात है।

दो साल पहले इस्लामाबाद में हमीदा की मुलाक़ात वलीउल्लाह महरूफ़ नामक एक स्थानीय यूट्यूबर से हुई, जिसने मुंबई में उसके परिवार को खोजने में मदद की। 2022 में, उसके प्रयासों से वह अपने बेटों, बेटियों, बहन और भाई से फिर से जुड़ गई।

भारत और पाकिस्तान के बीच दस्तावेज़ प्रक्रिया में दो साल लग गए, उसके बाद ही वह घर लौट सकी। महरूफ़ के लगातार प्रयासों की बदौलत धीरे-धीरे रास्ते खुल गए।

हमीदा की कहानी मानव तस्करी के शिकार लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों और सीमा पार परिवारों को फिर से जोड़ने में मीडिया की शक्ति को उजागर करती है। प्रियजनों से सालों तक अलग रहने के बाद उनकी वापसी एक नया अध्याय शुरू करती है।

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