Gyanvapi Survey: ओवैसी ने क्यों कहा सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर 6 दिसंबर जैसा हाल न हो? जानें वजह
एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ज्ञानवापी एएसआई रिपोर्ट सार्वजनिक हो जाएगी, तो कौन जानता है कि चीजें कैसे आगे बढ़ेंगी। आशा है कि न तो 23 दिसंबर और न ही 6 दिसंबर की पुनरावृत्ति होगी।
Gyanvapi Survey: पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की 41 सदस्यों वाली 4 टीमें सर्वेक्षण कर रही हैं। अब इसे लेकर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार (5 अगस्त) को बड़ा बयान दिया है। ओवैसी ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद चीजें कैसे सामने आएंगी, और उम्मीद जताई कि यह हजारों बाबरियों के लिए बाढ़ के द्वार नहीं खोलेगा।
दरअसल, बीते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें एएसआई को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने की अनुमति दी गई थी। ताकि, यह पता लगाया जा सके कि 17 वीं शताब्दी की संरचना मुस्लिम पक्ष के दावे के बावजूद पहले से मौजूद मंदिर पर बनाई गई थी या नहीं। अभ्यास अतीत के घावों को फिर से खोल देगा।

कौन जाने आगे क्या होगा?
ओवैसी ने बाबरी मस्जिद विध्वंस का जिक्र करते हुए कहा कि उम्मीद है कि न तो 23 दिसंबर और न ही 6 दिसंबर की पुनरावृत्ति होगी। ओवैसी ने ट्वीट करके कहा कि एक बार जब ज्ञानवापी एएसआई रिपोर्ट सार्वजनिक हो जाएगी, तो कौन जानता है कि चीजें कैसे आगे बढ़ेंगी। आशा है कि न तो 23 दिसंबर और न ही 6 दिसंबर की पुनरावृत्ति होगी। पूजा स्थल अधिनियम की पवित्रता के संबंध में अयोध्या फैसले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का अनादर नहीं किया जाना चाहिए। आशा यह है कि एक हजार बाबरियों के लिए द्वार नहीं खोले जाएंगे।
एएसआई सर्वेक्षण 2 दिन
उधर, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने एएसआई से सर्वेक्षण के दौरान किसी भी आक्रामक कृत्य का सहारा नहीं लेने को कहा। वहीं, एएसआई अधिकारी आज लगातार दूसरे दिन ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वेक्षण कर रहे हैं।
अधिकारियों ने सतह मापने के लिए ज्ञानवापी परिसर के चारों कोनों पर डायल टेस्ट संकेतक लगाए। उन्होंने डेप्थ माइक्रोमीटर का उपयोग करके परिसर के विभिन्न हिस्सों को मापा और परिसर का आकार दर्ज किया। पूरे परिसर की रूपरेखा कागज पर बनाई गई है। दूसरे दिन के सर्वेक्षण के पहले भाग में परिसर और उसके क्षेत्र की कोडिंग भी की गई है।
41 सदस्यों की 4 टीमें कर रही सर्वेक्षण
एएसआई की एक टीम परिसर के बाहरी हिस्से का सर्वेक्षण कर रही है। वहीं, दूसरी टीम उस स्थान का सर्वेक्षण कर रही है, जहां परिसर के अंदर प्रार्थना (नमाज) की जाती है। एक टीम परिसर के अंदर बनी सीढ़ियों की मदद से गुंबद का सर्वेक्षण कर रही है, जबकि चौथी टीम पश्चिमी दीवार का सर्वेक्षण कर रही है।
सभी टीमें सर्वे के साथ फोटोग्राफी भी कर रही हैं। कुछ मशीनों की मदद के सबूत भी जुटाए जा रहे हैं। ज्ञानवापी मस्जिद की दीवारों और खंभों की दूरी भी मापी जा रही है। प्रत्येक ब्लॉक में खंभों की संख्या भी गिनी जा रही है।
ओवैसी ने क्यों याद दिलाई 6 और 23 दिसंबर?
आपको बता दें कि अयोध्या में साल 1992 की 6 और 23 दिसंबर इतिहास के पन्नों में दर्ज दिल हिला देने वाली घटनाएं थी। दरअसल, 6 दिसंबर को एक भीड़ ने अयोध्या में विवादित ढांचे को क्षति पहुंचाई थी। वहीं, 23 दिसंबर को कुछ लोगों ने रामलला की मूर्ति को विवादित ढांचे में रख दिया था।












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