Gujarat Wolves Census: गुजरात के 13 जिलों में भेड़ियों का राज! टॉप पर भावनगर, जानें कहां कितनी आबादी?
Gujarat Wolves Census: गुजरात वन और पर्यावरण विभाग की हालिया जनगणना ने भारतीय भेड़ियों (Bhediya) की आबादी का अनुमान 222 लगाया है। यह सर्वेक्षण 2023 में गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (GEER) फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया था। इसने 13 जिलों में भेड़ियों के वितरण और उनके आवासों के बारे में अहम जानकारी दी है।
गुजरात में भेड़ियों की बढ़ती संख्या और उनके आवासों की पहचान वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यह एटलस और संरक्षण रणनीतियां न केवल भेड़ियों के लिए बल्कि राज्य के समग्र पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित होंगी।

कहां पाए गए सबसे ज्यादा भेड़िये?
गुजरात के विभिन्न जिलों में भेड़ियों की संख्या अलग-अलग है...
- भावनगर: सबसे अधिक 80 भेड़िये
- नर्मदा: 39 भेड़िये।
- बनासकांठा: 36 भेड़िये।
- सुरेंद्रनगर: 18 भेड़िये।
- जामनगर और मोरबी: 12-12 भेड़िये।
- कच्छ: 9 भेड़िये।
इसके अलावा, पोरबंदर, मेहसाणा, नवसारी, पाटन, अरावली, और सूरत जैसे जिलों में भी भेड़ियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
भेड़ियों का आवास और उनकी भूमिका
गुजरात में भेड़िये मुख्य रूप से वन और रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाए जाते हैं...
भावनगर का भाल क्षेत्र
- इसमें वेलावदर ब्लैकबक नेशनल पार्क और धोलेरा शामिल हैं।
- भेड़िये यहां ब्लैकबक की आबादी को नियंत्रित करने में शिकारी के रूप में अहम भूमिका निभाते हैं।
नर्मदा का शूलपानेश्वर अभयारण्य:
- यह क्षेत्र भी भेड़ियों के लिए महत्वपूर्ण आवास है।
संरक्षण के लिए एटलस का विकास
GEER फाउंडेशन और वन विभाग ने एक एटलस विकसित किया है, जो भेड़ियों के आदर्श आवासों की पहचान करता है।
- आवास का प्रकार: यह मुख्य रूप से खुले स्क्रब क्षेत्र और जल स्रोतों वाले घास के मैदानों पर आधारित है।
- महत्वपूर्ण गलियारे: यह एटलस भेड़ियों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए आवासों को जोड़ने वाले गलियारों की पहचान करता है।
संरक्षण रणनीतियों की योजना
यह एटलस भेड़ियों के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- संरक्षण: गलियारों के माध्यम से भेड़ियों की आबादी के बीच आनुवंशिक विविधता को बनाए रखना।
- सुरक्षा: उन क्षेत्रों को सुरक्षित करना जो भेड़ियों के आवास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- रिसर्च: वन कर्मचारियों के निरंतर अवलोकन और विशेषज्ञों की मदद से आवासों का बेहतर संरक्षण।
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