खेती बैंक अहमदाबाद में देश के विभिन्न स्थानों से पधारे निदेशकों एवं बोर्ड सदस्यों को संबोधित किया।
अहमदाबाद में गुजरात स्थापना दिवस समारोह ने गुजरात की संस्कृति और अर्थव्यवस्था में सहकारी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। नेताओं ने सहकारी नीति पर मोदी युग के प्रभाव, शाह के नेतृत्व वाले सुधारों और अमूल और इफ्को की वैश्विक प्रमुखता पर ध्यान दिया, जो विरासत और विकास की एकता पर जोर देते हैं।
गुजरात स्थापना दिवस के अवसर पर अहमदाबाद स्थित खेती बैंक में आयोजित कार्यक्रम में देशभर से आए निदेशकों और बोर्ड सदस्यों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सहकारिता क्षेत्र की भूमिका और गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कहा गया कि गुजरात स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि राज्य की संस्कृति, संस्कार और समृद्धि का प्रतीक है।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि "गुजरात" शब्द अपने आप में सकारात्मकता और विकास की भावना को दर्शाता है। साथ ही गुजराती भाषा की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इसकी संरचना अन्य भाषाओं की तुलना में अधिक समृद्ध और स्पष्ट है, जिससे संबंधों और भावनाओं की अभिव्यक्ति अधिक सटीक ढंग से होती है।
सहकारिता क्षेत्र पर चर्चा करते हुए कहा गया कि Narendra Modi के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन भारतीय सहकारी आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। वहीं Amit Shah के मार्गदर्शन में लागू किए गए नए मॉडल बायलॉज सहकारिता संस्थाओं को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम में सहकारिता आंदोलन के अग्रणी नेताओं के योगदान को भी याद किया गया। Udaybhansinhji द्वारा स्थापित IFFCO और खेती बैंक तथा Tribhuvandas Patel द्वारा स्थापित Amul और गुजकोमासोल जैसी संस्थाओं को आज वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव बताया गया।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में "सहकार से समृद्धि" के संकल्प के साथ देश का सहकारिता क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों से सहकारी संस्थाओं को नई मजबूती मिल रही है और यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।












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