गुजरात चुनावः कहां हैं शंकर सिंह वाघेला?

शंकर सिंह वाघेला
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गुजरात में 'बापू' कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला इस बार के विधानसभा चुनाव में कहां हैं?

गुजरात में राज्यसभा चुनावों से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला कांग्रेस से अलग हो गए. अपने दशकों पुराने राजनीतिक करियर में वह भाजपा और जनसंघ में भी रहे हैं.

दोबारा भाजपा में शामिल होने की अटकलों को धता बताते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव में पहले जन विकल्प मोर्चा बनाया है. गांधीनगर में अपने घर पर बीबीसी हिंदी के साथ में उन्होंने कहा कि उनका मोर्चा ट्रैक्टर के निशान पर सभी 182 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है.

लेकिन कांग्रेस-भाजपा की लड़ाई में उनका मोर्चा कहां ठहरता है, पूछने पर वह कहते हैं, "हमें भाजपा और कांग्रेस दोनों का अनुभव है. हम कांग्रेस के 'बापू', भाजपा के 'बापू', प्रशासन के 'बापू' रहे. इस अनुभव के हिसाब से मैं कहता हूं कि जनता के दिलो-दिमाग में हम हैं."

वाघेला का कहना है कि आज के समय में कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों के पास गुजरात में भरोसे लायक नेतृत्व नहीं है.

राजनीतिक सक्रियता नहीं

गांधीनगर में जब उनके आलीशान और बड़ी ज़मीन पर फैले बंगले में उनसे मुलाक़ात हुई तो वहां कोई राजनीतिक सक्रियता नहीं दिखी. उनके मोर्चे के कार्यकर्ताओं की कोई भीड़ भी नहीं दिखी, जैसी चुनावों के दौरान अक्सर नेताओं के ठौर-ठिकानों पर होती है.

इस पर वाघेला ने कहा, "अगर हम आपको समय नहीं देते तो लोगों के बीच होते. सबके काम करने का अपना तरीका होता है. हमारे दफ़्तर में लोग बैठे हैं."

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'भाजपा का ग्राफ़ नीचे जा रहा है'

वह बताते हैं कि साल 1995 में रिटायरमेंट के बाद ख़ुद से संवाद करने के लिए यह बंगला बनवाया था. लेकिन राजनीति में ऐसी स्थितियां पैदा हुईं कि रिटायर नहीं हो पाया.

वह कहते हैं, "भागने का संदेश नहीं आना चाहिए. सामने से राजनीति छोड़ें, ऐसा होना चाहिए."

शंकर सिंह वाघेला के ड्रॉइंगरूम में सरदार पटेल, भीमराव आंबेडकर और भगवान कृष्ण की तस्वीरें लगी हैं. ओम् की दो बड़ी कलाकृतियां हैं.

क्या वाघेला के चुनाव लड़ने से कांग्रेस के वोट बंटेंगे और भाजपा को फ़ायदा होगा?

इस पर वाघेला कहते हैं, 'यह मतदाताओं का अपमान है. लोग दिमाग के टेढ़े नहीं हैं कि किसी के कहने मात्र से वोट दे दें. मैं बार-बार दिल्ली का उदाहरण देता हूं कि अरविंद केजरीवाल ने क्या कांग्रेस या भाजपा के वोट काटने के लिए आप पार्टी शुरू की थी. क्या दोनों पार्टी ख़त्म हो गईं?'

वाघेला का कहना है कि भाजपा का ग्राफ़ काफ़ी नीचे जा रहा है और लोग कांग्रेस को वोट देना नहीं चाहते. इसलिए वह विकल्प देना चाहते हैं.

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वाघेला के वादे

क्या वह गंभीरता से चुनाव लड़ रहे हैं, पूछने पर कहते हैं, "हम प्रचार में नंबर एक हैं. हम अडानी अंबानी से पैसे लेने वाले नहीं हैं और उम्मीदवारों को पैसे देने वाले नहीं हैं. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पुलिसवाले और शिक्षक ये सब हमारे वोटर हैं."

हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश के सवाल पर शंकरसिंह वाघेला ने कुछ नहीं कहा. उन्होंने कहा, "जिस सवाल का मैं जवाब देना नहीं चाहता, उसे दोहराने का कोई मतलब नहीं है."

उनका कहना है कि हमारी पूर्ण बहुमत वाली सरकार होती तो हम शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं मुफ़्त कर देते.

वह गुजरात में बेरोज़गारों को नौकरी देने और नौकरी न मिलने तक बेरोज़गारी भत्ता देने की बात भी करते हैं.

वह कितनी सीटें जीतने की उम्मीद रखते हैं, इस सवाल पर वाघेला कहते हैं, "वोटर को हल्के में नहीं लेना चाहिए. दिल्ली में जो नतीजा आया, किसी ने क्या ऐसा सोचा था."

वह कहते हैं, "ह्यूमन टच कहां है आज राजनीति में. मानवता मर गई है. साज़िश और मैच फिक्सिंग हो रही है. लोगों को मानवीय स्पर्श चाहिए."

अहमदाबाद की सड़कों पर वाघेला की तस्वीरों वाले बैनर लगे हैं, जिसमें लोगों से मानवतावादी संवेदनशील सरकार लाने की अपील की गई है.

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