गुजरात में बीजेपी की जीत के पीछे क्या यही है सबसे असल वजह, जो किसी ने नहीं बताई

नई दिल्ली। गुजरात में बीजेपी ने एक बार फिर से जीत दर्ज की है। प्रदेश में 22 साल से सत्ता संभाल रही बीजेपी पर वहां की जनता ने एक बार फिर से विश्वास जताते हुए सत्ता सौंप दी। इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी, हालांकि पार्टी को जिस तरह का जनादेश मिला इससे एक बात तो साफ हो गई कि गुजरात की आवाम पर अभी भी भारतीय जनता पार्टी का जलवा कायम है। गुजरात में बीजेपी की जीत के पीछे सियासी जानकारों ने कई वजहें गिनाईं गईं। इनमें पीएम मोदी पर निजी हमले जैसे मणिशंकर अय्यर के 'नीच आदमी' वाले बयान का जिक्र किया गया।

गुजरात में बीजेपी की जीत के पीछे क्या यही है सबसे असल वजह...

दूसरी वजह मणिशंकर अय्यर के घर पर पाक के पूर्व विदेश मंत्री के साथ कांग्रेस नेताओं की बैठक का मुद्दा भी चुनाव में अहम माना गया। इसके अलावा कपिल सिब्बल के सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मुद्दे को कही गई बात को भी गुजरात चुनाव में कांग्रेस की हार की एक वजह बताई गई। भले ही सियासी जानकार गुजरात चुनाव में बीजेपी की जीत के लिए इन वजहों की बात कर रहे हों लेकिन वास्तव में बीजेपी के जीत की अहम वजह कुछ और ही है। वरिष्ठ पत्रकार देवप्रिय अवस्थी ने अपने फेसबुक वॉल पर ये वजहें बताईं हैं...

गुजरात में बीजेपी ने दर्ज की लगातार 6वीं जीत

गुजरात में बीजेपी ने दर्ज की लगातार 6वीं जीत

वरिष्ठ पत्रकार देवप्रिय अवस्थी के मुताबिक गुजरात चुनाव में बीजेपी की जीत में सबसे अहम वजह चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा और जीएसटी दरों में बड़ी रियायत का ऐलान करना रहा है। उन्होंने बताया कि जीएसटी दरों में बड़ी रियायत ने सूरत, अहमदाबाद, वडोदरा और राजकोट सरीखे बड़े शहरों के व्यापारियों और दूसरे मतदाताओं की भाजपा के प्रति नाराजगी कम कर दी। चुनाव नतीजों में ये बात साफ तौर से देखने को मिली।

बीजेपी की जीत पर वरिष्ठ पत्रकार देवप्रिय अवस्थी ने की टिप्पणी

बीजेपी की जीत पर वरिष्ठ पत्रकार देवप्रिय अवस्थी ने की टिप्पणी

कई बड़े अखबारों के संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार देवप्रिय अवस्थी ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है, "मेरी नजर में गुजरात में भाजपा की जीत का एकमात्र कारण चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और आचार संहिता लागू होने के बाद जीएसटी दरों में बड़ी रियायत की घोषणा है। इस घोषणा ने सूरत, अहमदाबाद, वडोदरा और राजकोट सरीखे बड़े शहरों के व्यापारियों और दूसरे मतदाताओं की भाजपा के प्रति नाराजगी कम कर दी और वहां एकतरफा जीत दर्ज करके पार्टी सत्ता में वापस आ सकी। चुनाव की घोषणा के बाद जीएसटी दरों में रियायत की घोषणा नहीं होती तो भाजपा गुजरात में सत्ता में वापस नहीं लौटती। भाजपा की जीत के पीछे इस कारण के अलावा कोई और कारण तलाशना सरासर बेवकूफी और बेईमानी है, लेकिन धंधेबाज चुनाव विश्लेषकों को टीवी चैनलों पर दिनभर की कवायद में यह कारण नजर ही नहीं आया।"

जीएसटी दरों में बड़ी रियायत ने दिखाया असर

जीएसटी दरों में बड़ी रियायत ने दिखाया असर

वरिष्ठ पत्रकार देवप्रिय अवस्थी ने गुजरात में बीजेपी की जीत को लेकर जिन बातों का जिक्र किया है, उनका असर भी गुजरात चुनाव में देखने को मिला है। जीएसटी को लेकर जिस तरह से सूरत समेत प्रदेश के दूसरे इलाकों में व्यापारियों की नाराजगी थी उसे जीएसटी दरों में रियायत के जरिए दूर करने की कोशिश की गई। चुनाव नतीजों में इसका असर भी देखने को मिला। खास तौर से सूरत में 16 सीटों में से बीजेपी के खाते में 15 सीटें गईं।

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