गुजरातः सोशल मीडिया पर कांग्रेस बीजेपी को ऐसे दे रही है पटखनी
सोशल मीडिया और इंटरनेट के ज़रिये राजनीतिक लामबंदी अब तक कांग्रेस की विशिष्टता नहीं थी.
यह जनमत को प्रभावित करने वाला वह उर्वर मैदान था, जिस पर पहला हल भाजपा ने 2014 के आम चुनावों से पहले चलाया था और लंबे समय तक ऐसा लगता रहा कि कांग्रेस उस कौशल को साध ही नहीं पाई है.
लेकिन इस बार के गुजरात विधानसभा चुनावों में हालात ऐसे नहीं हैं.
इस चुनाव में कांग्रेस का नारा- 'विकास गांडो थयो छे' यानी 'विकास पागल हो गया है', दिल्ली तक चर्चित हो गया है.
भाजपा ने 'हूं छूं विकास, हूं छूं गुजरात' नारे के साथ अपने पछाड़ खाते कैंपेन को स्थिर किया है और अब मुक़ाबला कर रही है.
गुजरात का इंटरनेट युद्ध इस बार दिलचस्प है, जहां दोनों तरफ़ तेज़-तर्रार नौजवानों की फौज़ें एक-दूसरे के प्रचार की हवा निकालने में लगी हुई है.
बीजेपी को सोशल मीडिया में पटक पाएगी कांग्रेस?
...तो गुजरात में 'विकास पगला गया है'!
कांग्रेस: 20 हज़ार वॉलंटियर्स का दावा
अहमदाबाद के सत्यम मॉल की तीसरी मंज़िल पर गुजरात कांग्रेस आईटी सेल का दफ़्तर है. आईटी सेल के प्रमुख रोहन गुप्ता हैं. प्रदेश में आईटी सेल के आठ उपाध्यक्ष हैं. इन्हीं में से एक हैं हीरेन बैंकर.
कांग्रेस के आईटी दफ़्तर में करीब 10-12 नौजवान काम कर रहे हैं, जिनसे बात करने की इजाज़त हमें नहीं मिली. हीरेन अभी एक वीडियो देख रहे हैं, जिसमें दो लोग गुजरात की अस्मिता पर तर्क-वितर्क कर रहे हैं और फिर एक तीसरा व्यक्ति उन्हें अपनी दलीलों से यह समझाने की कोशिश करता है कि गुजरात की अस्मिता गुजरातियों से है, भाजपा से नहीं और लोगों ने विकास किया है, किसी सरकार ने नहीं.
हीरेन बैंकर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियर हैं और अभी गुजरात यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई भी कर रहे हैं. वह चार साल से कांग्रेस आईटी टीम से जुड़े हैं.
हीरेन बताते हैं कि अहमदाबाद में 20-25 पेशेवर लोग कांग्रेस आईटी सेल के लिए काम करते हैं. इसके अलावा हर ज़िले में करीब 250 पदाधिकारी बनाए गए हैं. उनका दावा है कि पूरे गुजरात में करीब बीस हज़ार वॉलंटियर उनके लिए काम कर रहे हैं.
वह बताते हैं, "करीब हज़ार लोग ट्विटर पर सक्रिय हैं जो किसी ट्रेंड की शुरुआत करते हैं. उसे हमारे वॉलंटियर्स फॉलो करते हैं."
व्हॉट्सएप की तैयारी
हीरेन बताते हैं कि 'विकास गांडो थयो छे' के बाद उनकी टीम ने ऐसे ही दो और कटाक्षपूर्ण अभियान चलाए. एक, 'मारा हाड़ा छेतरी गया', यानी मेरा साला मुझे मूर्ख बना गया. दूसरा, 'जो जो छेतराता नहीं' यानी 'कहीं कोई आपको ठग न ले'.
स्मार्ट फ़ोन क्रांति के बाद चुनाव प्रचार में नारों की भूमिका अब असंदिग्ध रूप से महत्वपूर्ण हो गई है. गुजरात में कांग्रेस ने पहले 'कांग्रेस आवे छे, नवसर्जन लावे छे' अभियान चलाया और अब 'खुश रहे गुजरात' अभियान चला रही है.
हीरेन का दावा है कि उनकी पार्टी ने गुजरात भर में करीब 40 हज़ार व्हॉट्सएप ग्रुप बनाए हैं. कई ग्रुप पेशे के हिसाब से बंटे हुए हैं. वह बताते हैं, 'व्यापारियों के ग्रुप में हम जीएसटी के नुकसान से जुड़ी बातें भेजते हैं. छात्रों तक बेरोज़गारी की समस्या पहुंचाने की कोशिश रहती है.'
कैसे करते हैं भाजपा को काउंटर
हीरेन कुछ उदाहरणों से बताते हैं कि वह भाजपा के सोशल मीडिया प्रचार को कैसे काउंटर करते हैं. वह बताते हैं, 'भाजपा ने धन्यवाद नरेंद्रभाई कैंपेन चलाया था, जिसके जवाब में कांग्रेस ने धन्यवाद मोटाभाई कैंपेन चलाया. हम लोगों ने लिखना शुरू किया कि पेट्रोल 80 रुपये पहुंच गया, धन्यवाद मोटाभाई. इतने लोग बेरोज़गार हो गए, धन्यवाद मोटाभाई.'
हीरेन का कहना है कि भाजपा ने 'गरजे गुजरात' नाम से एक कैंपेन शुरू किया, जिसके जवाब कांग्रेस ने 'जो गरज़ते हैं, वे बरसते नहीं' से दिया. हीरेन कहते हैं, 'इसके बाद उन्होंने न सिर्फ अपना कैंपेन वापस ले लिया बल्कि उसे अपना मानने से भी इनकार कर दिया.'
हीरेन बताते हैं कि इसी तरह भाजपा के कैंपेन 'अड़िखम गुजरात' का भी हमने काउंटर किया. वह बताते हैं, 'हमने लिखा कि जब वो आपके पास आए पूछने के लिए तो आप अपने सवाल पर अड़िखम रहना. वे कोई और बात करेंगे तो आप 30 लाख बेरोज़गार की बात पर अड़िखम रहना. वो किसी योजना की बात करें तो आप सरकारी अस्पताल की बात पर अड़िखम रहना.'
भाजपा आईटी सेल की तस्वीरें नहीं मिलीं
कुछ अधिक कोशिशों के बाद भाजपा के प्रदेश आईटी और सोशल मीडिया संयोजक पंकज शुक्ला से एक सड़क पर ही मुलाक़ात हुई. उन्होंने दफ़्तर दिखाने और उसकी तस्वीरें भेजने से भी इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि दो दिन बाद उनके राष्ट्रीय आईटी प्रमुख अमित मालवीय आ रहे हैं, तभी मीडिया हमारे आईटी सेल की तस्वीरें ले सकेगा.
पंकज शुक्ला का परिवार दो पीढ़ी पहले उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद से आकर यहां बस गया था.
पंकज संख्या के स्तर पर बहुत साफ़गोई से बात नहीं करते, लेकिन कहते हैं कि भाजपा कैडर आधारित पार्टी है और पूरे गुजरात में सोशल मीडिया पर भी उनका कैडर सक्रिय है. उनका कहना है कि 15-20 लोगों की टीम कंटेंट बनाती है, जिसे उनके कार्यकर्ता ज़िले, ज़ोन, मंडल और विधानसभाओं और पोलिंग बूथ तक के स्तर तक बने व्हॉट्सऐप ग्रुपों तक पहुंचाते हैं.
वह कहते हैं, 'बूथ बूथ तक, हर व्यक्ति के मोबाइल पर भाजपा का साहित्य और हमारी सरकार की उपलब्धियां याद दिलाने का काम हो रहा है.'
'अब हम हावी हो गए हैं'
पंकज का कहना है कि 'विकास गांडो थयो छे' अब पुरानी बात हो चुकी है.
उन्होंने कहा, 'यह सवाल दो महीने पहले आप मुझसे पूछते तो कुछ प्रतिशत वैध होता. लेकिन अब सोशल मीडिया पर हम बहुत अच्छी स्थिति में हैं और हावी हो गए हैं. आप किसी तीसरे आदमी से भी पूछ लीजिए.'
'गरजे गुजरात' वाले नारे पर पंकज कहते हैं कि यह कैंपेन कभी भाजपा का था ही नहीं. वह कहते हैं, 'झूठ बोलना और ज़ोर से बोलना कांग्रेस की परंपरा रही है. हमारा ऐसा कोई कैंपेन था ही नहीं. टाउनहॉल के कार्यक्रम हमने अड़िखम गुजरात के नारे के साथ किए और वे बहुत अच्छी तरह चले. अब हमारा अभियान 'हूं छूं विकास, हूं छूं गुजरात' है और हर व्यक्ति इससे ख़ुद को जोड़कर देखता है.'
पंकज स्वीकार नहीं करते कि डेढ़ दो महीने पहले भी कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कोई बढ़त बनाई थी. वह कहते हैं, 'प्रयास किया था कांग्रेस ने. प्रिंट मीडिया और इधर उधर थोड़ा छपवाकर हवा बनाने का प्रयास किया था. लेकिन ऐसी कोई हवा नहीं बनी थी. और वह डेढ़-दो महीने पहले की बात है.'
भाजपा के पंकज और कांग्रेस के हीरेन दोनों मानते हैं कि बीते चुनावों में फेसबुक की भूमिका सबसे अहम होती थी, लेकिन अब घर घर में व्हॉट्सऐप पहुंच गया है और उसकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. हालांकि दोनों ही पार्टी के आईटी प्रमुखों ने सोशल मीडिया कैंपेनिंग का बजट पूछने पर गोल-मोल जवाब दिए.
संदीप पंड्या भी गुजरात कांग्रेस के आईटी उपाध्यक्षों में से एक हैं. उन्होंने कहा कि उनके नेता अब ख़ुद लग गए हैं और इससे कार्यकर्ताओं में उत्साह है.
वह बताते हैं, 'सूरत में एक सभा थी उनकी. 75 हज़ार लोग थे. वहां राहुल गांधी को 'जय सरदार जय पाटीदार' बोलना था. लेकिन उसके साथ वह एक कदम आगे बढ़कर 'जय भवानी, भाजपा जवा नी' (जय भवानी, भाजपा जाएगी) भी बोल गए. इतनी मज़बूत टीम है उनकी. इससे हम लोगों का उत्साह भी बढ़ा रहता है.'
जाते जाते संदीप पंड्या ने एक और बात कही. बोले कि चुनाव नतीजे चाहे जो हों, गुजरात कांग्रेस में ऐसा आत्मविश्वास पहले कभी नहीं था और गुजरात भाजपा में ऐसी असुरक्षा कभी नहीं थी.












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