Gujarat: जैन मुनि को कॉलेज छात्रा से दुष्कर्म के मामले में 10 साल की सजा, कोर्ट ने माना दोषी
Gujarat Court Sentences Jain Monk: गुजरात के सूरत जिले की एक सत्र अदालत ने सात साल पुराने एक दुष्कर्म मामले में जैन दिगंबर संप्रदाय के मुनि शांतिसागरजी महाराज को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगाया है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ए.के. शाह ने शनिवार को यह सजा सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत पीड़िता की गवाही, अन्य गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज इस मामले में आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त हैं।

क्या था मामला?
अभियोजन के अनुसार, यह घटना 1 अक्टूबर 2017 को सूरत की जैन धर्मशाला में घटी थी। पीड़िता, जो उस समय 19 वर्ष की कॉलेज छात्रा थी, अपने पिता और भाई के साथ वडोदरा से सूरत आई थी। वे लोग महावीर दिगंबर जैन मंदिर में दर्शन करने के बाद मुनि शांतिसागरजी से मिलने धर्मशाला पहुंचे थे, जहां वे रुके हुए थे।
मुनि ने पीड़िता के पिता और भाई को अलग-अलग कमरों में बैठाकर कुछ धार्मिक मंत्रोच्चारण किए और उन्हें निर्देश दिया कि जब तक वे अनुमति न दें, बाहर न आएं। इस दौरान मुनि उस कमरे में पहुंचे जहां युवती अकेली थी और उसने वहां दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।
पीड़िता के अनुसार, विरोध करने पर मुनि ने उसके परिजनों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और कहा कि जब भी वे बुलाएं, उसे आना होगा।
आरोपी 2017 से जेल में बंद
मामले की शिकायत के बाद मुनि शांतिसागरजी को अक्टूबर 2017 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में बंद हैं। सरकारी वकील नयन सुखड़वाला के अनुसार, उन्हें अब शेष ढाई साल की सजा भुगतनी होगी।
अभियोजन ने मांगी थी उम्रकैद
अभियोजन पक्ष ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा देने की मांग करते हुए दलील दी थी कि पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से अत्यंत गहरा आघात पहुंचा है, और यह अपराध उस व्यक्ति ने किया है, जिसे उसका परिवार गुरु के रूप में पूजता था।












Click it and Unblock the Notifications