Adani Group की मानहानि शिकायत पर अभिसार शर्मा और राजू पारुलेकर को नोटिस, 20 सितंबर को कोर्ट में पेशी
Adani Group: अडानी ग्रुप ने दो जाने-माने पत्रकारों- यूट्यूबर अभिसार शर्मा (Abhisar Sharma) और ब्लॉगर राजू पारुलेकर (Raju Parulekar) के खिलाफ मानहानि का एक बड़ा आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है। इस शिकायत के बाद, गांधीनगर की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों पत्रकारों को 20 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का नोटिस जारी किया है।
यह मामला तब सामने आया जब अडानी ग्रुप ने इन दोनों पत्रकारों पर 'झूठी और मानहानिकारक' सामग्री फैलाकर कंपनी की छवि खराब करने का आरोप लगाया। अडानी ग्रुप के वकील संजय ठक्कर ने बताया कि गांधीनगर के न्यायिक मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की अदालत ने दोनों व्यक्तियों को नोटिस भेजकर उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है।

क्या हैं अडानी ग्रुप के आरोप?
अडानी ग्रुप ने अपनी शिकायत में दोनों पत्रकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
अभिसार शर्मा: उन पर आरोप है कि उन्होंने 18 अगस्त, 2025 को अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड किया। इस वीडियो में उन्होंने दावा किया कि अडानी ग्रुप को असम में हजारों बीघा जमीन आवंटित की गई है, और यह सब कंपनी को 'राजनीतिक लाभ' देने के लिए किया गया है।
राजू पारुलेकर: उन पर आरोप है कि उन्होंने जनवरी 2025 से 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर कई ट्वीट और रीट्वीट किए, जिनमें 'जमीन हड़पने,' 'घोटालों' और 'अनुचित लाभ' जैसे आरोप लगाए गए थे।
अडानी ग्रुप ने इन आरोपों के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 356 (1, 2, और 3) का सहारा लिया है, जो पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499, 500 और 501 के बराबर हैं। ये धाराएं मानहानि से संबंधित हैं।
अडानी ग्रुप का स्पष्टीकरण: क्या हैं सबूत?
अडानी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें 'आधारहीन और भ्रामक' बताया है। कंपनी ने साफ किया कि इन पत्रकारों द्वारा गुवाहाटी हाईकोर्ट के जिस आदेश का हवाला दिया जा रहा है, उस आदेश में अडानी ग्रुप का कहीं भी कोई जिक्र नहीं है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के मामले में जिस कंपनी (महाबल सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड) का जिक्र है, उसका अडानी ग्रुप से कोई संबंध नहीं है। कोर्ट में सबूत के तौर पर अभिसार शर्मा का वीडियो, उसका ट्रांसक्रिप्ट और राजू परुलेकर के सोशल मीडिया पोस्ट पेश किए गए हैं। साथ ही, गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के रिकॉर्ड भी संलग्न किए गए हैं।
अब सभी की निगाहें 20 सितंबर पर हैं, जब दोनों पत्रकारों को कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए पेश होना है। इस मामले में आगे क्या होगा, यह देखना बाकी है।












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