गुजरात: शपथ लेने के 5 दिन बाद ही नाराज होने वाले नितिन पटेल का पूरा Profile
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नई दिल्ली। गुजरात की पांच दिन पुरानी भाजपा सरकार में मंत्रालय के बंटवारे को लेकर तलवारें खिंच गई है। डिप्टी सीएम नितिन पटेल ने अपने तेवर सख्त किए हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नितिन पटेल ने पार्टी को 48 घंटे का अल्टीमेटम तक दे दिया है। आपको बता दें कि गुरुवार को विभागों के बंटवारे के बाद जब रुपाणी मीडिया से बात कर रहे थे, उस समय उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल थोड़ा निराश लग रहे थे। पटेल इस बात से नाखुश दिखाई पड़ रहे थे। उन्होंने मीडिया से भी बात नहीं की। आईए हम आपको बताते है कि कौन है नितिन पटेल। जिनके चलते गुजरात की सरकार मुश्किल में आ गई है।

आनंदीबेन पटेल के मंत्रीमंडल में नितिन पटेल हेल्थ मिनिस्टर थे
गुजरात सरकार में नंबर दो की पोजीशन वाले डिप्टी सीएम नितिन पटेल राज्य में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। आनंदीबेन पटेल के मंत्रीमंडल में नितिन पटेल सरकार में हेल्थ मिनिस्टर थे। लेकिन विजय रुपानी सरकार वे नंबर दो के नेता हैं। 60 वर्षीय नितिन पटेल राज्य सरकार में कई पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। साथ ही उनके पास बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विश्वास मत भी है।

90 के दशक से ही वह लगातार मंत्री रहे हैं
नितिन पटेल उत्तरी गुजरात के कड़वा पटेल नेता हैं। उनकी छवि जमीन से जुड़े नेता की रही है। 90 के दशक से ही वह लगातार मंत्री रहे हैं। अब तक वह केवल एक चुनाव ही हारे हैं। गुजरात में नरेंद्र मोदी कार्यकाल के समय उनकी गुजरात कैबिनेट में उनकी नंबर 2 पोजीशन थी। कहने को वह आनंदीबेन पटेल सरकार में हेल्थ मिनिस्टर थे लेकिन सरकार के प्रवक्ता वही थे। नितिन पटेल का जन्म 22 जून 1956 को विसनगर में हुआ था। उन्होंने बीकॉम 2nd ईयर के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। राजनीति में आने से पहले, उन्होंने कपास और तेल उद्योगों में काम किया।

नितिन पेश से उद्योगपति हैं
बहुत ज्यादा खबरों में नहीं रहने वाले पटेल 2016 के शुरुआती महीनों में पठानकोट हमले को 'छोटा हमला' बताया था। पटेल समुदाय से आने वाले नितिन की उच्च पटेल वर्ग में काफी पैठ मानी जाती है। नितिन पेश से उद्योगपति हैं। मेहसाणा से चुनकर आते हैं। नितिन सन 1990 में पहली बार विधायक चुने गए थे। नितिन पटेल के पक्ष में यह बात रही कि वो खुद पाटीदार समुदाय से आते हैं। गुजरात में पाटीदारों की असरदार हैसियत है और वे बीजेपी के पारंपरिक वोटर माने जाते रहे हैं। लेकिन हार्दिक पटेल के पाटीदार आरक्षण आंदोलन के बाद उनकी बड़ी संख्या बीजेपी से नाराज है।
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