Gujarat Assembly Election 2017 :'मोदी को माइनस कर दो तो गुजरात में बीजेपी केवल पहुंचेगी 50 तक'
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गांधीनगर। गुजरात विधानसभा चुनाव के परिणामों की भविष्यवाणी करना कभी आसान नहीं रहा है। हर चुनाव में नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी पर विरोधियों का हमला मजबूत हुआ और विशेषज्ञों मे अपनी अपनी राय दी लेकिन हर बार नेता और भी ज्यादा भारी बहुमत से सत्ता में आए। हालांकि इस चुनाव में स्थिति अलग है। साल 2002 के बाद ऐसा पहली बार है जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री नहीं है। इसके साथ ही इस बार सत्ता विरोधी लहर भी ज्यादा है, जिसमें पाटीदार और दलित आंदोलन की भूमिका को इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में यह देखना होगा कि इतने सारे कारक भाजपा को अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव में कैसे प्रभावित करेंगे। रेडिफ डॉट कॉम की ओर से किए गए साक्षात्कार में भावनगर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. विद्युत जोशी ने इस पूरे चुनाव पर टिप्पणी की है।

पहली वजह सत्ता विरोधी लहर...
उन्होंने कहा है कि मुझे लगता है कि भाजपा 95 से 98 सीटों पर रहेगी और कांग्रेस को 85 सीटें तक मिल सकती हैं। इसके साथ ही छोटे दल जैसे आप या एनसीपी या फिर शंकरसिन्ह वाघेला को भी कुछ सीटें मिल सकती हैं। यह पूछे जाने पर उन्हें ऐसा क्यों लगता है कि भाजपा 115 सीटों से नीचे चली जाएगी इस पर जोशी ने कहा कि पहली वजह सत्ता विरोधी लहर है, जो पश्चिम बंगाल में CPI-M के साथ भी हुआ था। इसके साथ ही गुजरात में 10 बड़े आंदोलन चल रहे हैं जो सरकार के खिलाफ चल रहे हैं।

ये हैं वो आंदोलन जिन्होंने पैदा की सत्ता विरोधी लहर
इसमें पाटीदार आंदोलन, ओबीसी आंदोलन, दलित आंदोलन, छोटे व्यापारियों का आंदोलन, आशा वर्कर आंदोलन, आंगनबाड़ी महिलाओं का आंदोलन, फिक्स्ड सैलरी वर्कर मूवमेंट और एंबुलेंस वर्कर मूवमेंट शामिल है। इन आंदोलनों ने भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर बना रहे हैं। खास तौर से ओबीसी और दलित आंदोलन जो खुलेआम कह रहे हैं कि वो भाजपा के खिलाफ वोट देंगे।

22 साल से एक ही चेहरा देखते-देखते
जोशी ने साक्षात्कार में कहा है कि अगर आप 22 साल बाद भी एक ही चेहरा देखेंगे तो आपमें घृणा पैदा होगी। जनता को महसूस हो रहा है कि मंत्रियों ने अपना काम नहीं किया। इतना ही औद्योगीकरण की तेजी में भाजपा ने ग्रामीण इलाकों को नजरअंदाज किया है। फसल मूल्य निर्धारण और बीमा के लिए किसान आंदोलन कर रहे हैं। कांग्रेस को ग्रामीण इलाकों में और अधिक सीटें मिलेंगी और भाजपा सूरत के अलावा शहरी इलाकों में और अधिक सीटें हासिल करेगी क्योंकि वहां पाटीदार आंदोलन मजबूत है।

संगठन के रूप में मोदी भाजपा को कमजोर करेंगे
सवाल पूछा गया कि हर चुनाव से पहले, विश्लेषकों कहते हैं कि भाजपा अच्छा प्रदर्शन नहीं करेगी, लेकिन जब परिणाम आते हैं तो बीजेपी ने भारी बहुमत पाती है। इस पर जोशी ने कहा कि इसलिए मैं भाजपा को यही कारण है कि मैं भाजपा को 95 से 98 सीटें दे रहा हूं, और यह सिर्फ मोदी की वजह से है। जिस तरह से इंदिरा गांधी ने कांग्रेस को कमजोर कर दिया और मतदाताओं से सीधा संपर्क करेंगे, मोदी वही करेंगे। वह एक संगठन के रूप में भाजपा को कमजोर करेगे और अपने व्यक्तिगत करिश्मे पर मतदाताओं को लुभाने वाले होंगे। वे गुजरात में 25 बड़ी सभा करेंगे।

मोदी को हटा दें तो सिर्फ 50 सीटें!
जोशी ने कहा कि नरेंद्र मोदी को हटा दें तो भाजपा को गुजरात में 182 सीटों में से सिर्फ 50 में ही मिलेगी। एक करिश्माई नेता एक दूसरे पंक्ति के नेता का विकास कभी नहीं करेंगे। इंदिरा गांधी ने ऐसा नहीं किया और मोदी ने भी ऐसा नहीं किया है। कोई भी करिश्माई नेता कभी दूसरे पंक्ति का नेता नहीं बनने देना चाहता। यह पूछे जाने पर कि अमित शाह की रणनीति क्या होगी, इस पर जोशी ने कहा कि अगर भाजपा जातिप टिकट दे रही है, तो कांग्रेस भी उसी तरह टिकट देगी। तो जातिवाद कहां है? यह न केवल अमित शाह बल्कि अहमद पटेल भी उसी तरह से काम कर रहे हैं।

RSS का ही एक धड़ा अब उनके खिलाफ आएगा!
जोशी ने कहा कि मुझे लगता है कि गुजरात में भाजपा अपनी 2014 की सफलता को दोहराने में सक्षम नहीं होगी। वे सभी 26 (लोकसभा) सीटें 2019 के चुनाव में नहीं जीतेंगे। साल 2019 में, मोदी को साल 2014 की तरह से 282 सीटें नहीं मिलेंगी बल्कि उससे कम मिलेंगी। यह पूछे जाने पर कि ऐसा क्यों होगा जोशी ने कहा कि मोदी अब थक चुके हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का ही एक धड़ा अब उनके खिलाफ बाहर आएगा।















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