80,000 करोड़ के डिफेंस प्रोजेक्ट्स और मोदी का 'मेक इन इंडिया'
नई दिल्ली। पिछले 10 वर्षों में देश की सेनाओं और रक्षा क्षेत्र के कमजोर होने का खामियाजा आगे आने वाले समय में देश को न भुगतना पड़े इसके मद्देनजर शनिवार को नरेंद्र मोदी ने 80,000 करोड़ रुपए के मेगा डिफेंस प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है।

जिन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है उनकी खासियत यह है कि कई प्रोडक्ट्स अब भारत में ही तैयार होंगे। यहां पर मोदी ने अपने 'मेक इन इंडिया' फॉर्मूले को ध्यान में रखा है।
इंडियन नेवी को दी गई प्राथमिकता
केंद्र सरकार की ओर से यह फैसला डिफेंस एक्यूजीशिन काउंसिल के साथ हुई मीटिंग में लिया गया जिसके प्रमुख रक्षा मंत्री अरुण जेटली हैं। दो घंटे तक चली इस मीटिंग में रक्षा सचिव, तीनों सेनाओं के प्रमुख, डीआरडीओ प्रमुख और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। खास बात रही कि इन प्रोजेक्ट्स में प्राथमिकता इंडियन नेवी को दी गई।
इसी वजह से नेवी से जुड़े ज्यादातर सौदों को सरकार ने मंजूरी दी है। नेवी पिछले कई वर्षों से मॉर्डनाइजेशन की समस्या से जूझ रही थी।
क्या है खास इन प्रोजेक्ट्स में जिन्हें मिला है ग्रीन सिग्नल
- 50,000 करोड़ की लागत से देश में छह सबमरींस को निर्मित करने का फैसला किया गया है।
- इजरायल से इंडियन आर्मी के लिए 3,200 करोड़ रुपए की लागत से 8,356 एंटी टैंक्स गाइडेड मिसाइल खरीदेगा।
- इंडियन आर्मी इन मिसाइल के लिए 321 लांचर्स भी खरीदेगा।
- एनहैंस्ड सेंसर्स से लैस 1,850 करोड़ रुपए की लागत से एचएएल 12 डॉर्नियर सर्विलांस एयरक्राफ्ट्स का निर्माण होगा।
- पश्चिम बंगाल के मेडक स्थित ऑर्डिनेंस से 662 करोड़ रुपए की लागत से 362 इंफ्रेंट्री फाइटिंग व्हीकल खरीदने का फैसला।
- 662 करोड़ की लागत से 7.5 टन रेडियो कंटेनर्स की 1,761 यूनिट खरीदने का फैसला।
- 740 करोड़ की कीमत से 1,768 वैगन खरीदने का फैसला।
अमेरिका के बजाय इजरायल को तरजीह
जिन डिफेंस प्रोजेक्ट्स को मोदी सरकार ने ग्रीन सिग्नल दिया है उनमें सबसे खास बात थी कि अमेरिका को दरकिनार कर इजरायल को तरजीह देना। भारत के पास अमेरिकी जैवलिन मिसाइल खरीदने के प्रस्ताव भी था लेकिन उसने अपने पुराने रक्षा साझीदार को नजरअंदाज नहीं किया।
इजरायल की रक्षा तकनीक दुनिया में सर्वोत्तम है।












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