भारतीय प्लेट हर साल 5 cm की दर से खिसक रही है, NGRI के वैज्ञानिक ने दी तुर्की से भी भयानक भूकंप की चेतावनी

तुर्की जितना या उससे भी भयावह भूकंप कभी भी उत्तारखंड में आ सकता है। उत्तराखंड में ही नहीं, इसके दायरे में हिमालय का पूरा क्षेत्र आ सकता है। यह आशंका हैदराबाद स्थित नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के चीफ साइंटिस्ट ने जताई है। उन्होंने कहा है कि भारतीय प्लेट हर साल लगभग 5 सेंटी मीटर की दर से खिसक रही है, जिसकी वजह से हिमालय के क्षेत्र में दबाव बनता जा रहा है, जिसका परिणाम कभी भी भयानक भूकंप की शक्ल में देखने को मिल सकता है।

उत्तराखंड में कभी भी आ सकता है भयानक भूकंप- वैज्ञानिक
हैदराबाद स्थित नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के चीफ साइंटिस्ट डॉक्टर एन पूर्णचंद्रा राव ने कहा है कि 'उत्तराखंड में हमारे पास कई सिस्मोग्राफ स्टेशनों का मजबूत नेटवर्क है। इस क्षेत्र को हिमाचल और उत्तराखंड समेत पश्चिमी नेपाल के हिस्से के बीच के seismic gap (भूकंप-सूचक) के रूप में जाना जाता है, यहां भूकंप की आशंका है, जो कि कभी भी आ सकता है। '

'पृथ्वी के नीचे काफी तनाव पैदा हो रहा है'
डॉक्टर राव का कहना है, 'पृथ्वी की सतह विभिन्न प्लेटों से मिलकर बनी है, जो कि लगातार गतिशील हैं। भारतीय प्लेट हर साल लगभग 5 सेंटी मीटर की दर से खिसक रही है, जिसके चलते हिमालय के क्षेत्र में तनाव पैदा हो रहा है, जिससे भयानक भूकंप की संभावना बढ़ रही है।' इससे पहले डॉक्टर राव कह चुके हैं कि उत्तराखंड की सतह के नीचे बहुत ही ज्यादा दबाव पैदा हो रहा है, जिसका बाहर निकलना अवश्यंभावी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि भूकंप की तारीख की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। यही नहीं, इसकी वजह से होने वाली तबाही भी कई चीजों पर निर्भर करता है, जो क्षेत्र के हिसाब से बदल सकता है।

'जीपीएस प्वाइंट बदल रहे हैं'
वह कह चुके हैं कि वे लोग रीयल-टाइम के आधार पर परिस्थितियों की निगरानी कर रहे हैं। एनजीआरआई के प्रमुख वैज्ञानिक ने बताया है कि वहां पर उनका जीपीएस नेटवर्क भी है। लेकिन, जीपीएस प्वाइंट बदल रहे हैं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि सतह के नीचे परिवर्तन हो रहा है। उनके अनुसार वैरियोमेट्रिक जीपीएस डेटा प्रोसेसिंग एक भरोसेमंद तरीका है, जिससे पता चलता है कि पृथ्वी में क्या हो रहा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है, 'हम सटीक तारीख और समय की भविष्यवाणी नहीं कर सकते, लेकिन उत्तराखंड किसी भी समय एक भयानक भूकंप का गवाह बनेगा।'
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8 से ज्यादा तीव्रता के भूकंप की आशंका
नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के टॉप साइंटिस्ट का यह आकलन ऐसे समय में आया है, जब बदरीनाथ और केदारनाथ का प्रवेशद्वार माना जाने वाले जोशीमठ में पहले से ही जमीन धंस रही है। यह समस्या उत्तराखंड के कुछ और क्षेत्रों से भी आ रही है। रिक्टर स्केल पर 8 से ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप को 'great earthquakes'कहा जाता है, जिसकी आशंका डॉक्टर राव ने उत्तराखंड के लिए जताई है। (ऊपर वाली तस्वीर- तुर्की भूकंप से संबंधित)
पूरे हिमालय क्षेत्र में भयानक भूकंप की आशंका
तुर्की और सीरिया में जो भूकंप का सबसे तगड़ा झटका आया था, उसकी तीव्रता 7.8 थी। एनजीआरआई के वैज्ञानिक के मुताबिक तकनीकी तौर पर इसे 'great earthquakes'की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है। लेकिन, तुर्की में इसके बावजूद बहुत ही भयानक तबाही हुई है। इसके कई कारण हैं, जिनमें से एक ये भी है कि निर्माण बहुत ही खराब गुणवत्ता वाले थे, जिससे इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। उन्होंने कहा है कि हिमालय के क्षेत्र में जो कि जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैला है, 8 से ज्यादा तीव्रता के भूकंप आने की संभावना है।












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