8वीं बार लगा जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन, जानें कब-कब गवर्नर ने संभाली राज्य की कमान
नई दिल्ली: मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक घटनाक्रम में तेजी से बदलाव हुआ और राज्य सरकार से भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पद से इस्तीफा दे दिया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता राम माधव ने कहा था कि सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही पीडीपी विकास और शांति बहाली के मामलों में असफल रही और ऐसे में पीडीपी के साथ बीजेपी का बने रहना संभव नहीं था। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में डर की नीति नहीं चलेगी। राज्य में सत्ता के लिए नहीं बल्कि बड़े विजन को लेकर BJP के साथ गठबंधन हुआ था। वहीं अब जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू हो गया है। हालांकि ये पहला मौका नहीं है जब जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाया गया हो, अब तक 8 दफे ऐसा हो चुका है।

इस प्रकार की स्थिति का सामना पहली बार 1977 में करना पड़ा था जब जम्मू-कश्मीर में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की सरकार अल्पमत में आ गई थी। उस वक्त कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार से समर्थन वापस ले लिया था और सरकार गिर गई थी। दूसरी बार, मार्च 1986 में गुलाम मोहम्मद शाह की सरकार के अल्पमत में आने के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाया गया था। तब कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की गुलाम मोहम्मद की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।

6 साल 264 दिनों की लंबी अवधि तक राज्यपाल शासन भी रहा
जबकि तीसरी बार, जगमोहन को जनवरी 1990 में राज्यपाल बनाने के फैसले के खिलाफ फारुख अब्दुल्ला ने सरकार से इस्तीफा दे दिया। ये पहला अवसर था जब 6 साल 264 दिनों की लंबी अवधि तक जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल ने कमान संभाले रखी। चौथी बार, 2002 में चुनाव मे किसी को बहुमत न मिलने पर जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगा दिया गया। हांलाकि 15 दिनों बाद पीडीपी और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बना ली थी।

8 बार लग चुका है राज्यपाल शासन
जुलाई 2008 में अमरनाथ जमीन विवाद पर मचे संघर्ष के बाद सरकार गिरी थी। उस वक्त पीडीपी ने गुलाम नबी आजाद सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद राज्य में राज्यपाल शासन लगाया गया था। साल 2015 चुनाव के बाद एकबार फिर किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और जम्मू-कश्मीर में छठी बार राज्यपाल शासन लगाना पड़ा था।

राज्य में किसी भी दल ने सरकार बनाने की दावेदारी अभी पेश नहीं की
जबकि साल 2016 में मुफ्ती मोहम्मद सईद की मौत के बाद कुछ समय के लिए राज्यपाल शासन लगाया गया और इसके बाद महबूबा मुफ्ती ने सीएम पद की शपथ ली थी। वहीं अब बीजेपी द्वारा पीडीपी से समर्थन वापस लेने के बाद राज्यपाल एनएन वोहरा ने कमान संभाल ली है क्योंकि किसी भी दल ने सरकार बनाने की दावेदारी अभी पेश नहीं की है।












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