सस्ता हो जाएगा पेट्रोल-डीजल, अगर सरकार उठा ले ये खास कदम

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    Modi Govt करे ये काम तो काम हो जाएंगे Petrol-Diesel के दाम | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्‍ली। पेट्रोल और डीजल के दाम पिछले चार सालों में सबसे उच्चचम स्तर (80 का आंकड़ा पार) पर पहुंच गए है। पेट्रोल और डीजल के दामों अनियंत्रण बढ़ोत्तरी से सरकार के साथ-साथ आम आदमी का बजट में काफी असर पड़ने वाला है। दरअसल पेट्रोलियम मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते कच्चे तेल के दामों के मद्देनजर पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कटौती की मांग की थी, लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक फरवरी को बजट में उसकी इस मांग को नजरअंदाज कर दिया था। लेकिन पेट्रोल और डीजल की इन बढ़ती कीमतों से आपको सरकार राहत दिला सकती है। हालांकि इसके लिए सिर्फ केंद्र सरकार नहीं, बल्क‍ि राज्य सरकारों को भी कदम उठाना होगा। विस्‍तार से जानिए क्‍या करेगी सरकार कि मिलेगी इस महंगाई से राहत।

    घटाई जाए एक्‍साइज ड्यूटी और सेसघटाई जाए एक्‍साइज ड्यूटी और सेस

    घटाई जाए एक्‍साइज ड्यूटी और सेसघटाई जाए एक्‍साइज ड्यूटी और सेस

    वित्त वर्ष 2018 का बजट पास करने से पहले यह मांग जोरों पर थी कि केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाएगी। ताकि आम आदमी को पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से राहत मिले, लेकिन ऐसा होकर भी नहीं हुआ। केंद्र सरकार ने बजट में एक्साइज ड्यूटी तो घटाई, लेक‍िन दूसरी तरफ सेस बढ़ाकर तेल की कीमतों को बराबर कर दिया। बजट में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाला बेसिक उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को 2% कम करने का फैसला लिया। साथ ही सेस में 2 रुपये की बढ़ोतरी की है। इससे पेट्रोल और डीजल के दाम जस के तस हो गए। लेकिन अब अगर सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाती है, तो यह फैसला आम आदमी को काफी राहत देने वाला साबित हो सकता है।

    VAT घटाएं राज्‍य सरकार

    VAT घटाएं राज्‍य सरकार

    पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कई बार राज्‍यों से वैट घटने की अपील कर चुके हैं। उल्‍लेखनीय है कि कुछ समय पहले ही उन्‍होंने कहा था कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से अगर आम आदमी को निजात पाना है तो राज्‍य सरकारों को वैट घटाना होगा। हालांकि कुछ राज्‍यों ने इस तरफ कदम बढ़ाया लेकिन कई राज्‍यों में अभी भी वैसा ही है।

    पट्रोल भी आए GST के तहत

    पट्रोल भी आए GST के तहत

    पिछले साल से उठाई जा रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली भी इस मांग का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि उनका कहना है कि फिलहाल इसके लिए सभी राज्य तैयार नहीं हैं। इस वजह से सरकार के लिए ऐसा करना मुश्क‍िल हो रहा है। लेक‍िन अगर सभी राज्य इस पर सहमति जाहिर कर लेते हैं और जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर राजी हो जाती है, तो आपको सबसे बड़ी राहत इसकी बदौलत मिल सकती है। इससे कीमतें 50 से 60 रुपये के बीच सिमट सकती हैं।

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