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कोविड वैक्सीन टेस्टिंग को गति देने के लिए सरकार ने पुणे और हैदराबाद में स्थापित किए दो नए लैब

कोविड-19 वैक्सीन के परीक्षणों को गति देने के मकसद से सरकार ने पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल कर पुणे और हैदराबाद में दो अतिरिक्त प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं।

नई दिल्ली, 4 जुलाई। कोविड-19 वैक्सीन के परीक्षणों को गति देने के मकसद से सरकार ने पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल कर पुणे और हैदराबाद में दो अतिरिक्त प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं। जैसा-जैसे सरकार अधिक टीकों की खरीद और उत्पादन के प्रयासों को बढ़ाएगी, ये अतिरिक्त लैब सरकार को त्वरित परीक्षण और टीकों को रिलीज से पूर्व प्रमाणीकरण में मदद करेगी।

vaccine

वर्तमान में देश में वैक्सीनों का परीक्षण करने के लिए दो प्रयोगशालाएं केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (कसौली), राष्ट्रीय जैविक संस्थान (नोएडा) हैं। सरकार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि टीकों के बैच परीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अपने स्वायत्त अनुसंधान संस्थानों राष्ट्रीय कोशिका विज्ञान केंद्र (एनसीसीएस), पुणे और राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, (एनआईएबी) हैदराबाद में केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) के रूप में दो वैक्सीन परीक्षण सुविधाएं स्थापित की हैं। इन प्रयोगशालाओं के लिए पीएम केयर्स फंड का इस्तेमला किया गया है।

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सरकार ने कहा कि इन प्रयोगशालाओं में लगभग प्रति माह टीकों के 60 बैच का परीक्षण होने की उम्मीद है। सरकार ने कहा कि देश की मांग के हिसाब से ऐसा किया गया है, ताकि समय पर वैक्सीनों का परीक्षण किया जा सके। सरकार के अनुसार, इससे टीकों के निर्माण और आपूर्ति में तेजी आएगी, और यह संचालन रूप से भी सुविधाजनक होगा क्योंकि पुणे और हैदराबाद वैक्सीन निर्माण केंद्र हैं।

अभी तक दी जा चुकी हैं 35 करोड़ वैक्सीन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि अभी तक देश में कोरोना की 35 करोड़ से अधिक वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं। मंत्रालय ने कहा कि 21 जून से शुरू हुए टीकाकरण के नए सत्र से अब तक 57.36 लाख से ज्यादा वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है।

मॉडर्ना के जल्द भारत में आने की उम्मीद
मंत्रालय ने कहा मॉडर्ना के कोविड वैक्सीन को हाल ही में भारत में आपातकालीन स्वीकृति मिली है, और अगले दो से तीन दिनों में वैक्सीन का पहला बैच आने की उम्मीद है। एक बार टीके पहुंचने के बाद, भारत के पास चुनने के लिए चार विकल्प होंगे- कोवैक्सिन, कोविशील्ड, स्पुतनिक वी और मॉडर्ना।

इस बीच, अहमदाबाद स्थित फार्मास्युटिकल फर्म Zydus Cadila ने अपने ZyCoV-D तीन-खुराक वाली वैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग की मंजूरी का अनुरोध किया है जो दुनिया का पहला प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन है। जॉयडस ने कहा कि उसकी वैक्सीन कोरोना के खिलाफ 66.6 प्रतिशत असरकारी है।

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