One Nation, One Election: तीन विधेयक लाने पर विचार कर रही है सरकार, किस बिल को पास कराना है चुनौती?
वन नेशनल, वन इलेक्शन की अपनी योजना के तहत केंद्र सरकार तीन विधेयक लाने पर विचार कर रही है, जिसमें दो संविधान संशोधन विधेयक होंगे। इस पहल का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के लिए चुनावी कार्यक्रम को एक साथ लाना है। इस दृष्टिकोण के पीछे एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशें है, जिसे सरकार ने इस महीने की शुरुआत में मंजूरी दी थी। समिति के सुझावों में इस योजना के चरणबद्ध कार्यान्वयन को शामिल किया गया है।
इस विधायी पैकेज के केंद्र में संविधान में संशोधन के लिए प्रस्तावित दो विधेयक हैं। पहला विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों के लिए एक समन्वित कार्यक्रम बनाने के लिए है। यह अनुच्छेद 82ए में बदलाव के लिए है, जिसमें इन चुनावों के लिए एक निश्चित 'नियत तिथि' निर्धारित करने के लिए एक खंड पेश किया गया है, साथ ही लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल के एक साथ समापन को सुनिश्चित करने के लिए संशोधन भी किए गए हैं।

इसके अलावा, यह लोकसभा के कार्यकाल और विघटन के संबंध में अनुच्छेद 83(2) में बदलाव का सुझाव देता है और 'एक साथ चुनाव' की अवधारणा को शामिल करने के लिए अनुच्छेद 327 में संशोधन करता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विधेयक को राज्य विधानसभाओं की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, दूसरे संविधान संशोधन विधेयक को कम से कम आधे राज्यों की ओर से समर्थन की आवश्यकता होगी। इसका ध्यान स्थानीय निकाय चुनावों को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के साथ सामंजस्य स्थापित करने पर है। इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा ताकि चुनाव आयोग (ईसी) और राज्य चुनाव आयोगों (एसईसी) को एकीकृत मतदाता सूची तैयार करने में सुविधा हो।
इसके अतिरिक्त, इस विधेयक का उद्देश्य एक नया अनुच्छेद 324ए पेश करना है, जो नगर पालिकाओं और पंचायतों के साथ-साथ चुनावों के लिए आधार तैयार करेगा।
इन संवैधानिक संशोधनों के साथ एक सामान्य प्रकृति का तीसरा विधेयक भी है, जिसका लक्ष्य केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं-विशेष रूप से पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर- में चुनावी शर्तों को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के साथ कराना है। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम-1991, केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम-1963 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 को संशोधित करने को लेकर है। संवैधानिक संशोधनों के विपरीत, इस विधेयक को संविधान में बदलाव या राज्य विधानसभाओं की ओर से पास कराने की आवश्यकता नहीं है।
ये विधायी प्रयास भारत के चुनावी ढांचे को बदलने की सरकार की व्यापक योजना का प्रतिबिंब हैं। उच्च स्तरीय समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट में संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों में 18 संशोधनों को शामिल करते हुए एक विस्तृत रणनीति की रूपरेखा तैयार की। आम चुनाव की घोषणा से ठीक पहले प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' अवधारणा के दो-चरणीय कार्यान्वयन की परिकल्पना की गई है।
पहला चरण लोकसभा और राज्य विधानसभाओं को लेकर है, जबकि दूसरा चरण स्थानीय निकाय चुनावों पर केंद्रित है, जो आम चुनाव के 100 दिनों के भीतर होने चाहिए। समिति की एक महत्वपूर्ण सिफारिश एक आम मतदाता सूची की स्थापना है, जिसके लिए चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोगों के बीच समन्वय की आवश्यकता है।
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