तस्करी के जरिए भारत आ रहा सोना, सरकार को 6500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

नई दिल्ली। तस्करी के जरिए भारत लाया जाने वाला सोना भारत सरकार और यहां के बाजार के मुसीबत बन गया है। यही नहीं तस्करी के जरिए लाए जाने वाले सोने से सोना आयात करने वाली कंपनियों और ज्वैलर्स को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है।

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भारत को 6500 करोड़ रूपए से ज्यादा के राजस्व का नुकसान

सोने का ग्रे मार्केट भी बहुत तेजी से बढ़ने के चलते बढ़ रहा है। ग्रे मार्केट में ग्राहकों को सोना सस्ते दाम में बेचा जा रहा है।

टीओआई की खबर के मुताबिक इस साल कुल मांग का एक तिहाई सोना तस्करी के जरिए भारत लाया जा सकता है। चीन के बाद भारत में ही सबसे ज्यादा सोने के खरीददार हैं और इससे भारत को 6500 करोड़ रूपए से ज्यादा के राजस्व का नुकसान हो सकता है।

सोने की तस्करी को कैसे रोका जाए

बताया जा रहा है कि सोने के आयात पर लगी 10 फीसदी आयात शुल्क और हाल में ही सोने की ज्वैलरी पर लगाई गई लेवी के चलते ही गैर कानूनी से रूप से भारत में सोना लाए जाने के मामले सामने आ रहेे हैं।

बाजार के जानकारों के मुताबिक इस बात को लेकर सरकार भी चिंता में है और सोने की तस्करी को कैसे रोका जाए। इस बारे में सोच रही है।

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बाजार में तस्करी के जरिए लाया गए सोने की भरमार

रॉयटर्स को एसोसिएशन आॅफ गोल्ड रिफाइनरी एंड मिंट के सचिव जेम्स जोस ने बताया कि गोल्ड रिफाइनर्स को एक फीसदी से कम मार्जिन मिलता है। वहीं तस्कर इस पर 4 से 5 फीसदी की छूट दे रहे हैं। ऐसे में हमारे पास कोई चारा नहीं बचता है कि हम अपनी गोल्ड रिफाइनरी को जारी रखें।

एमएमटीसी-पीएएमपी के प्रबंध निदेशक राजेश खोसला ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में हमनें 120 टन सोने को रिफाइन किया था। इस साल लोकल स्क्रेप की मदद से हम 20 टन सोना रिफाइन कर सकते हैं।

भारत ने सोने पर तीन साल पहले ही 10 फीसदी आयात शुल्क बढ़ा दिया था। पर इसका पूरा फायदा तस्करों ने ही उठाया और बाजार में तस्करी के जरिए लाया गए सोने की भरमार कर दी।

तस्कर कारोबारियों को 100 डॉलर कम में एक औंस सोना बेचने का प्रस्ताव दे रहे हैं ​जिसकी बाजार में कीमत 1,340 डॉलर से कम है।

बीच में सोने की तस्करी कुछ कम हुई थी। पर इस साल मार्च में सोने की ज्वैलरी पर एक फीसदी टैक्स लगाने के बाद फिर से सोने की तस्करी बढ़ गई है।

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वर्ष 2016 में भारत में 300 टन सोना तस्करी के जरिए आया

आल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी ट्रेड के निदेशक बच्चराज बामालवा ने बताया कि वर्ष 2016 में भारत में 300 टन सोना तस्करी के जरिए आया।

नए टैक्स नियमों ने बाजार में छोटे ज्वैलर्स को ग्रे मार्केट की तरफ मोड़ दिया है। यह ज्वैलर्स अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए ग्रे मार्केट से सोना खरीद रहे हैं। यह ज्वैलर्स बिना रसीद के ही कारोबार भी कर रहे हैं।

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