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Google map ने PoK को मिलाया भारत में, LoC और LAC भी गायब!

श्रीनगर। पूरे देश कोरोना वायरस महामारी में उलझा और लॉकडाउन के साए में है, लेकिन दिल्‍ली से करीब 829 किलोमीटर दूर जम्‍मू कश्‍मीर में पिछले कुछ दिनों से हलचल मची हुई है। हलचल का ताजा उदाहरण है गूगल मैप जिसने पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) को भारत में मिला दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं नक्‍शे से लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) और लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) भी गायब है। यह ताजा घटना उस समय हुई है जब खबरें आईं कि दूरदर्शन पर आने वाले न्‍यूज बुलेटिन में अब पीओके और गिलगित-बाल्टिस्‍तान का मौसम भी बताया जाएगा।

पाकिस्‍तान को अप्रत्‍यक्ष संदेश

पाकिस्‍तान को अप्रत्‍यक्ष संदेश

गूगल मैप की भारत के नक्‍शे वाली तस्‍वीरें तेजी से ट्विटर पर वायरल हो रही है। अभी तक इस पर न तो गूगल की तरफ से कोई बयान आया है, न ही सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों ने कोई टिप्‍पणी की है और न भारत सरकार की कोई प्रतिक्रिया आई है। नए नक्‍शे की तो तस्‍वीरें ट्विटर पर शेयर हो रही हैं उसमें कश्‍मीर के तहत आने वाले उन तमाम हिस्‍सों को भारतीय सीमा में दिखा दिया है जिस पर पाकिस्‍तान ने कब्‍जा कर लिया है। इसमें पीओके समेत वह नॉर्दन एरियाज भी शामिल हैं जिन्‍हें पाकिस्‍तान ने गिलगित-बाल्टिस्‍तान का नाम दिया है। न सिर्फ पाकिस्‍तान से लगी सीमा बल्कि चीन से सटी एलएसी जिसमें अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख आते हैं, नई तस्‍वीरों में वह भी भारत का हिस्‍सा नजर आ रहे हैं। रक्षा मामलों के जुड़े सूत्र की तरफ से बताया गया है कि यह सच है कि गूगल मैप ने बदलाव किया है। इससे जमीनी हालात नहीं बदलेंगे मगर एक अप्रत्‍यक्ष संदेश जाएगा।

एक हफ्ते से जारी PoK पर हलचलें

एक हफ्ते से जारी PoK पर हलचलें

पिछले एक हफ्ते से पीओके और गिलगित-बाल्टिस्‍तान को लेकर काफी हलचलें हैं। चार मई को विदेश मंत्रालय ने पाकिस्‍तान के राजनयिक को डेमार्श जारी किया था। इसमें भारत की तरफ से पाक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई थी। पाकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि साल 2018 में आए प्रस्‍ताव के तहत गिलगित-बाल्‍टीस्‍तान में तुरंत चुनाव कराए जाने चाहिए। इस आदेश के बाद भारत ने पाक को चेताया कि उसे तुरंत गिलगित को खाली कर देना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्‍तान को साफ कर दिया है कि जम्‍मू कश्‍मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र जिसमें गिलगित-बाल्टिस्‍तान का हिस्‍सा भी आता है, वह भारत का आंतरिक भाग है। साल 2009 में पाकिस्‍तान की सरकार ने नॉर्दन एरियाज का नाम बदलकर गिलगित-बाल्टिस्‍तान कर दिया था।

अंग्रेजों ने लिया हुआ था लीज पर

अंग्रेजों ने लिया हुआ था लीज पर

पाकिस्‍तान ने साल 1947 में हुए बंटवारे के बाद उसी वर्ष अक्‍टूबर में भारत पर पहला हमला किया। इस दौरान उसने जम्‍मू कश्‍मीर के कई इलाकों पर कब्‍जा कर लिया जिन्‍हें पाकिस्‍तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके के नाम से जाना गया। जबकि गिलगित-बाल्टिस्‍तान को सन् 1935 से अंग्रेजों ने जम्मू कश्मीर के महाराज हरि सिंह से लीज पर ले रखा था। उनका मकसद यहां की उंची पहाड़ियों से आस-पास के पूरे इलाके पर नजर रखना था। नजर रखने का जिम्‍मा ‘गिलगित स्काउट्स' नाम की एक सेना के पास था। बंटवारे के बाद अंग्रेज भारत से चले गए और लीज खत्म कर के यह इलाका महाराज को लौटा दिया गया। राजा ने तब ब्रिगेडियर घंसार सिंह को यहां का गर्वनर बना दिया। महाराज को गिलगित स्काउट्स के जवान भी मिले, जिनके ऑफिसर ब्रिटिश थे।

पाकिस्‍तान कमांडर ने किया कब्‍जा

पाकिस्‍तान कमांडर ने किया कब्‍जा

इतिहास के मुताबिक उस समय मेजर डब्लूए ब्राउन और कैप्टन एएस मैथीसन महाराज के हिस्से आई में सेना के अफसर थे। 1947 में जब पाकिस्तान की सेना ने कबायली लोगों की आड़ में जम्मू कश्मीर पर हमला किया, महाराज ने अपना राज्य भारत में मिला दिया। जंग के बाद 31 अक्टूबर को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर दस्तखत हुए। महाराजा हरि सिंह ने तो इस इलाके का भारत में मिला लिया मगर उनके इस कदम के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थानीय कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान ने विद्रोह कर दिया। कर्नल खान ने दो नवंबर 1947 को गिलगित-बाल्टिस्तान की आजादी का ऐलान कर दिया। 21 दिनों तक इसकी यही स्थिति बनी रही। 21 दिन बाद पाकिस्तान इस क्षेत्र में दाखिल हुआ और उसने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।

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