Good News: नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिये मिलेगा समान वेतन
पटना। पिछले कई वर्षों से नियोजित शिक्षकों के द्वारा समान वेतन के लिए सामान्य कार्य की मांग को लेकर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि समान कार्य के लिए सरकार द्वारा समान वेतन नहीं देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के द्वारा इस फैसले के सुनाये जाने के बाद शिक्षकों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी और सभी ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया। दूसरी तरफ बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री पूरे मामले को संज्ञान में लेकर कोर्ट जाने की बात बता रहे हैं।

आपको बताते चलें कि बिहार के शिक्षकों ने सामान्य कार्य के लिए सामान्य वेतन की मांग को लेकर हाई कोर्ट में मामला दर्ज करवाया था जिसकी सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन आज अपना फैसला सुनाया।हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश राजेंद्र मेनन की खंडपीठ ने सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था जिसे आज सुनाया गया। अपना फैसला सुनाते हुए न्यायधीश ने कहा कि यह फैसला लागू किया जाना चाहिए नहीं तो इसे संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा।
गौरतलब हो कि बिहार के नियोजित शिक्षक इस मांग को लेकर काफी दिनों से आंदोलनरत हैं।समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर सबसे पहले मुंगेर के हवेली खड़गपुर स्थित बनहरा स्कूल के शिक्षक उपेंद्र राय ने पटना हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी जिसके बाद 13 अन्य मामले दायर किये गये थे और सभी मामलों को कोर्ट ने सुरक्षित रख लिया था। वहीं कोर्ट के इस फैसले का विभिन्न शिक्षक संघों ने स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत करार दिया है।इस फैसले के बाद शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि शिक्षकों की तरफ से वरीय अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद सिंह, पीके शाही, विश्वनाथ प्रसाद सिन्हा ने शिक्षकों को मिल रहे वेतन में भेदभाव करने का आरोप लगाया था तो वहीं, सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए महाधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति सरकार नहीं करती है। इसलिए समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत नियोजित शिक्षकों पर लागू नहीं होगा।
तो दूसरी तरफ इस मामले में जब बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि म्यूजिक शिक्षकों को समान काम समान सुविधा का जो फैसला आज कोर्ट ने दिया है राज्य सरकार उसका अध्ययन करने के बाद उसके खिलाफ कोर्ट जाएगी।












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