Gold Rate Today ₹1,00,000: भारत की वो 7 जगह भी जान लो, जहां जमीन से निकलता है सोना, KGF सबसे पुरानी खदान
Gold Rate Today ₹1,00,000: भारत में आज 22 अप्रैल 2025 को उस वक्त इतिहास रच गया जब सोने की कीमत पहली बार ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम के पार पहुँच गई। घरेलू बाज़ारों में निवेशकों और आम जनता के बीच हलचल मच गई है, वहीं सरकार और उद्योग विशेषज्ञों की नज़र अब देश के भीतर मौजूद सोने के विशाल खनिज संसाधनों पर जा टिकी है।
बता दें कि भारत हर साल करीब 800 मीट्रिक टन सोने का आयात करता है, जबकि विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) के अनुसार, भारत के पास 2,191.53 मीट्रिक टन सोने के अयस्क संसाधन हैं। यह समय भारत के लिए अपनी खुद की धरती से स्वर्ण उत्पादन को बढ़ाने का सुनहरा अवसर हो सकता है।

आइए एक नज़र डालते हैं भारत की उन सात प्रमुख स्वर्ण खदानों पर, जो देश को आयात पर निर्भरता से मुक्ति दिला सकती हैं:
1. कोलार स्वर्ण क्षेत्र (KGF), कर्नाटक (Kolar Gold Fields (KGF), Karnataka)
भारत की सबसे पुरानी और सबसे गहरी खदान। 1880 से 2001 तक चली इस खदान से करीब 800 टन सोना निकाला गया था। अब इसे नई तकनीक के साथ पुनर्जीवित करने की योजना बन रही है।
2. हट्टी गोल्ड माइंस, रायचूर, कर्नाटक (Hatti Gold Mines, Raichur, Karnataka)
भारत की एकमात्र सक्रिय खदान, जो हर साल करीब 1.8 टन सोना उत्पन्न करती है। यह खदान करीब 2,000 साल पुरानी मानी जाती है।
3. सोनभद्र स्वर्ण क्षेत्र, उत्तर प्रदेश (Sonbhadra Gold Fields, Uttar Pradesh)
2020 में खोजा गया यह क्षेत्र देश का सबसे बड़ा नया सोने का भंडार बन सकता है। यहाँ 700 टन अयस्क मौजूद है और भविष्य में देश की सोने की ज़रूरतों को काफी हद तक पूरा कर सकता है।
4. गणजुर गोल्ड माइन, कर्नाटक (Ganjur Gold Mine, Karnataka)
डेक्कन गोल्ड माइंस की यह परियोजना सरकार की अनुमति के अभाव में रुकी हुई है, लेकिन 1.5 टन/वर्ष उत्पादन की क्षमता रखती है। यदि दोबारा अनुमति मिलती है, तो यह परियोजना पुनर्जीवित हो सकती है।
5. जोनागिरी गोल्ड माइन, आंध्र प्रदेश (Jonagiri Gold Mine, Andhra Pradesh)
भारत की पहली निजी स्वामित्व वाली ओपन-पिट खदान। 2023 में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद थी, और इसमें 1.2 टन/वर्ष उत्पादन क्षमता है।
6. लावा गोल्ड माइन, झारखंड (Lava Gold Mine, Jharkhand)
एक कम चर्चित लेकिन संभावनाशील खदान, जो चांडिल क्षेत्र में स्थित है। अभी शुरुआती खोज चल रही है लेकिन विशेषज्ञ इसे भविष्य का गेमचेंजर मानते हैं।
7. रामगिरी स्वर्ण क्षेत्र, आंध्र प्रदेश
एक ऐतिहासिक खदान जिसे ब्रिटिश काल में संचालित किया गया था। आज MECL द्वारा इसका पुनरुद्धार किया जा रहा है। यहाँ 4 टन सोने का अयस्क और अन्य बहुमूल्य खनिज मौजूद हैं।
क्या कहती है अर्थव्यवस्था?
सोने की कीमत में बेतहाशा वृद्धि और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए भारत की इन खदानों का रणनीतिक महत्त्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत इन संसाधनों का पूरी क्षमता से दोहन करता है, तो यह न सिर्फ़ आयात बिल को कम करेगा, बल्कि रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।












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