Tarun Tejpal Case: तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल सभी आरोपों से बरी
पणजी, 21 मई: तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल से जुड़े यौन शोषण मामले में शुक्रवार को कोर्ट का फैसला आया, जिसमें उनको सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। 8 साल पहले उनके साथ काम करने वाली एक महिला कर्मी ने तेजपाल पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे, हालांकि 2014 में कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी। उम्मीद जताई जा रही है कि पीड़ित पक्ष के वकील जल्द ही उच्च अदालत में इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर करेंगे।
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पीड़ित का आरोप है कि नवंबर 2013 में वो गोवा के एक फाइव स्टार होटल में थीं। इस दौरान लिफ्ट के अंदर तरुण तेजपाल ने उनका यौन शोषण किया। जिस पर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए 30 नवंबर 2013 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि कुछ महीनों बाद उन्हें जमानत मिल गई। इसके बाद पुलिस ने भी जांच करके 2014 में तेजपाल के खिलाफ 2846 पन्नों की चार्जशीट दायर कर दी। फिर सितंबर 2017 में मापुसा कोर्ट ने तेजपाल के खिलाफ आरोप तय किए। जिस पर तेजपाल ने खुद को निर्दोष बताया।
निचली अदालत में तय आरोपों के खिलाफ उन्होंने गोवा में स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच में याचिका दायर की, लेकिन वहां से उनको झटका लगा। इसके बाद अतिरिक्त जिला अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए 27 अप्रैल को फैसला सुनने की बात कही, लेकिन कोरोना के चलते इसे 12 मई कर दिया गया। 12 मई के बाद 19 मई को डेट पड़ी, लेकिन स्टॉफ की कमी के चलते फैसला नहीं आ पाया। अब शुक्रवार को कोर्ट ने मामले में विस्तार से अपना फैसला सुनाया। साथ ही तेजपाल पर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बरी कर दिया।
लगी थीं ये धाराएं
तेजपाल पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 341 (गलत संयम), 342 (गलत जब्ती), 354A (यौन उत्पीड़न) और 354B (आपराधिक हमला) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अगर ये सब आरोप सही पाए जाते तो उनको 10 साल की सजा होती।












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