गोवा विधानसभा चुनाव : किसने कहा ? “कांग्रेस, भाजपा की बोतल में पुरानी शराब जैसी”
नई दिल्ली, 04 दिसंबर। "कांग्रेस और गोवा फॉरवर्ड पार्टी का तालमेल एक अपवित्र गठबंधन है। कांग्रेस, भाजपा की बोतल में एक पुरानी शराब जैसी है। यह गठबंधन एक विश्वासघात है। इसने गोवा को भाजपा के हाथों बेचने के लिए चुनावी समझौता किया है।"

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री फेलेरियो लुइजिन्हो ने कांग्रेस के नये गठबंधन पर जोरदार हमला बोला है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) ने ही 2017 में भाजपा की सरकार बनवायी थी। लेकिन अप्रैल 2021 में वह भाजपा गठबंधन से अलग हो गयी थी। अब जीएफपी ने 2022 में कांग्रेस के साथ जाने का फैसला किया है। तृणमूल ने कांग्रेस के इस गठबंधन को अवसरवादी करार दिया है।

गोवा में तृणमूल की धमक बढ़ी
गोवा विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की धमक बढ़ती जा रही है। ममता बनर्जी 13 दिसम्बर को फिर गोवा के चुनावी दौरे पर आने वाली हैं। गोवा में चर्चित हस्तियों को जोड़ कर तृणमूल को मजबूत करने की प्रक्रिया उन्होंने शुरू कर दी है। कई विधायक टूट कर तृणमूल में शामिल हो रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री फेलेरियो लुइजिन्हो भी पहले कांग्रेस के ही विधायक थे। तीन महीना पहले वे कांग्रेस से इस्तीफा दे कर तृणमूल में आये थे। ममता बनर्जी ने पहले उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया। फिर पिछले महीने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा भेजा। जिस जीएफपी ने कांग्रेस से समझौता किया है उसके कार्यकारी अध्यक्ष रहे किरण कांडोलकर भी तृणमूल में आ चुके हैं। टीएमसी नेता बने लिएंडर पेस के पिता गोवा के रहने वाले हैं। उनकी भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गयी हैं। हाल ही में जब कोलकाता में तृणमूल कार्यसमिति की बैठक हुई थी तब उसमें लिएंडर पेस भी शामिल हुए थे। तृणमूल, पेस को गोवा में अहम जिम्मेदारी देने की तैयारी में है।

कांग्रेस की जगह तृणमूल को खड़ा करने की कोशिश
ममता बनर्जी कांग्रेस के विध्वंस पर अपनी राजनीतिक इमरात खड़ा करना चाहती हैं। राष्ट्रीय राजनीति हो या राज्यों की राजनीति, वे कांग्रेस को धाराशायी कर खुद उस जगह को पाना चाहती हैं। कांग्रेस गोवा में कभी सबसे मजबूत पार्टी रही है। सत्ता पर अधिकतर उसका ही कब्जा रहा है। लेकिन अन्य राज्यों की तरह गोवा में भी कांग्रेस अब कमजोर पड़ चुकी है। 2017 में कांग्रेस के 17 विधायक जीते थे और वह सबसे बड़ी पार्टी थी। कम (13) सीटें जीतने के बाद भी भाजपा ने सरकार बना ली थी। 2019 में कांग्रेस में 15 विधायक ही बचे थे। इसी दौरान भाजपा ने कांग्रेस में जोरदार सेंध लगा दी। कांग्रेस के 15 में से 10 विधायक भाजपा में शामिल हो गये। 40 सदस्यों वाले सदन में भाजपा के विधायकों की संख्या 27 पर पहुंच गयी। दिसम्बर 2022 में स्थिति ये है कि अब कांग्रेस के पास सिर्फ चार विधायक बचे हैं। करीब पांच साल में कांग्रेस टूट फूट कर पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। ममता बनर्जी कमजोर कांग्रेस को रिप्लेस कर उसकी जगह तृणमूल को खड़ा करना चाहती हैं।

कांग्रेस, भाजपा की बोतल में पुरानी शराब
तृणमूल सांसद फेलेरियो लुइजिन्हो गोवा के लोगों को भरोसा दिला रहे हैं अब केवल उनकी पार्टी ही भाजपा को रोक सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और जीएफपी का गठबंधन अवसरवादी है और यह गोवा में स्थायी सरकार नहीं दे सकता। 2017 में जीएफपी ने गोवा की जनता से बहुत बड़ा विश्वासघात किया था। उसने जनादेश का अपमान कर भाजपा की सरकार बना दी थी। चार साल तक सरकार में रह कर अपने हितों की पूर्ति की। अब वह भाजपा सरकार की आलोचना कर रही है। कांग्रेस के आधे से अधिक विधायक भाजपायी हो चुके हैं। कांग्रेस अब भाजपा की बोतल में पुरानी शराब की तरह हो गयी है। दोनों पार्टियां विश्वसनीय नहीं हैं। क्या गारंटी है कि दोनों दल आगे ऐसा नहीं करेंगे ? तृणमूल जनमत का सम्मान करने वाली पार्टी है। अपने फायदे के लिए वह अपने विचार नहीं बदलती। इसलिए गोवा में अगर भाजपा की जोड़तोड़ वाली सरकार को हटाना है तो तृणमूल सबसे बेहतर विकल्प है।

“कांग्रेस ने भाजपा को हराने के लिए कुछ नहीं किया”
गोवा में तृणमूल के संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सांसद महुआ मोइत्रा को सौंपी गयी है। वे विदेश में पढ़ी हैं और एक इनवेस्टमेंट बैंकर रही हैं। आर्थिक मामलों की जानकार हैं। वे तृणमूल की इंटेलेक्चुअल फेस हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए गोवा में डेरा डाल रखा है। प्रशांत किशोर की टीम उनकी मदद कर रही है। उन्होंने ने भी कांगेरेस को ही निशाने पर ले रखा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गोवा में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। कांग्रेस राजनीति को गंभीरता से नहीं ले रही जिसकी वजह से भाजपा मजबूत हो रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदम्बरम एक दिन के लिए गोवा आये और रैली कर चले गये। भाजपा को हराने और हटाने के लिए लगातार संघर्ष करना होगा। मैं यहां हर दिन मौजूद हूं। हमारा एजेंडा जैसे- तैसे सत्ता की प्राप्ति नहीं बल्कि गोवा की समस्या का समाधान खोजना है। तृणमूल 2022 के विधानसभा चुनाव को एक बड़े अवसर के रूप में देख रही है।












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