Gita Press Prize row: कांग्रेस के गोडसे वाले बयान पर भड़की भाजपा, कहा- 'इससे शर्मनाक कुछ नहीं'

गोरखपुर गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्‍कार 20221 से सम्‍मानिक किया गया तो सरकार के फैसले को कांग्रेस ने बताया उपद्रव।

गोरखपुर गीता प्रेस (Gorakhpur Geeta Press) को गांधी शांति पुरस्कार (Gandhi Peace Prize 2021) से मोदी सरकारसम्‍मानित कर रही है। सरकार के इस फैसले का कांग्रेस ने विरोध करते हुए कहा कि यह एक उपहास है और गोडसे तुलना करते हुए कांग्रेस सांसद ने विवादित बयान दे डाला।

दरअसल, कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम नरेश ने ट्वीटर पर एक पोस्‍ट लिखी जिसमें सरकार के इस कदम को उपद्रव कहा। इसके साथ ही कहा कि ये सावरकर और गोडसे (महात्‍मा गांधी के हत्‍यारे नाथू राम गोडसे) को पुरस्‍कृत करने जैसा है।

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कांग्रेस से और क्‍या उम्‍मीद की जा सकती है

कांग्रेस सांसद और पूर्व मंत्री जयराम नरेश के इस बयान पर भाजपा ने पलटवार किया है। बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने कांग्रेस द्वारा गीता प्रेस को दिए जाने वाले गांधी शांति पुरस्कार 2021 की आलोचना पर कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस से और क्‍या उम्‍मीद की जा सकती है। जिसने राम मंदिर की राह में रोड़े अटकाए। जिसने तीन तलाक का फेवर करती है।

इससे ज्‍यादा शर्मनाक क्‍या हो सकता है?

मंत्री रविशंकर ने कहा गीता प्रेस को गांधी पुरस्‍कार दिए जाने पर कांग्रेस की टिप्‍पणी से ज्‍यादा शर्मनाक क्‍या हो सकता है? उन्‍होंन कहा भाजपा इसकी निंदा करती है।

मंंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा मैं ये भारी मन से कहना चाहता हूं कि देश पर शासन करने वाली पार्टी में अब माओवादी मानसिकता वाले लोग है, वो राहुल गांधी के भी सलाहकार है। इसके साथ भाजपा मंत्री ने आह्वान किया कि कांग्रेस का पूरा देशवासियों को विरोध करना चाहिए।

असम सीएम ने कह कांग्रेस खुले तौर पर कांग्रेस ने....

वहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जमकर कांग्रेस की आलोचना की।

सरमा ने लिखा कर्नाटक में जीत मिलते के साथ कांग्रेस पार्टी ने अब खुले तौर पर भारत के सभ्यता और मूल्यों और समृद्ध विरासत के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया है, चाहे वह कर्नाटक राज्‍य में भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द करना हो या गीता प्रेस के खिलाफ आलोचना के रूप में हो।

रमेश ने एक ट्वीट में जानें क्‍या लिखा है?

जयराम रमेश ने लिए लिखा गोरखपुर में गीता प्रेस को 2012 का गांधी शांति पुरस्‍कार प्रदान किया है जो इस वर्ष अपना शताब्‍दी वर्ष मना रहा है। उन्‍होंने कटाक्ष करते हुए लिखा 'गीता प्रेस के अध्‍यक्ष मुकुल द्वारा इस संगठन की 2015 की एक बहुत ही बेहतरीन जीवनी है जिसमें वह महात्मा गांधी के साथ उनके तूफानी संबंधों और उनके राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक एजेंडे पर उनके साथ चल रही लड़ाइयों का पता लगाता है। जयराम नरेश ने आगे लिखा यह फैसला वास्तव में एक उपहास है और सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है।'

बता दें कांग्रेस जिस गांधी शांति पुरस्‍कार गीता प्रेस को दिए जाने पर विरोध कर रही है उसी गीता प्रेस ने गांधी शांति पुरस्‍कार तो स्‍वीकार कर लिया है लेकिन इस पुरस्‍कार के तहत दी जाने वाली 1 करोड़ की धनराशि को लेने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया है।

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