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देशद्रोहियों से निपटने के लिए भारत सरकार का खुफिया मिशन!

श्रीनगर। अलगाववादी नेता मसरत को भारत के खिलाफ नारे लगाने और पाकिस्तान का झंडा फहराने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं गिरफ्तार होने के बाद आलम का बयान है कि वह अपना अभियान जारी रखेंगे। इस बाद से इतना तो तय है कि पाकिस्तान के पैसों पर पलने वाले ये अलगाववादी कभी भी अपना रुख नहीं बदलने वाले हैं।

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आर्थिक मदद को कुचल देना चाहिए

लेकिन ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इन देशद्रोही तत्वों से निपटा कैसे जाये। अगर इनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाती है तो स्थानीय लोगों में इनके प्रति सहानुभूति पैदा होगी। रिसर्च एंड एनालिसिस के पूर्व अधिकारी अमर भूषण का मानना है कि इन कट्टरपंथियों के पास पहुंचने वाली आर्थिक मदद को पूरी तरह से रोक दिया जाए तो इनपर काबू पाया जा सकता है।

भूषण ने वनइंडिया से बात करते वक्त कहा कि इन कट्टरपंथियो के खिलाफ मनी लांड्रिंग का केस है। ऐसे में इन कट्टरपंथियो के खिलाफ मनी लांड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए ताकि इन कट्टरपंथियो का अधिकतर समय कानूनी वाद में जाया हो जिससे ये देश विरोधी गतिविधियों पर ध्यान नहीं दे पाये।

सरकार इन कट्टरपंथियो के खिलाफ क्या कार्यवाही कर सकती है?

इन कट्टरपंथियो से निपटने का सबसे बेहतर तरीका है इनतक पहुंचने वाली आर्थिक मदद को पूरी तरह से बंद किया जाए। इन सभी कट्टरपंथियो के खिलाफ कानून के तहत इन मामलों में मुकदमें दर्ज किये जाए।

इन अलगाववादियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा

यह सुनिश्चित करना चाहिए इन कट्टरपंथियो को किसी भी तरह की राहत नहीं मिलने पाये और ये कोर्ट के चक्कर लगाने पर मजूबर हो। जमीनी तौर पर इन कट्टरपंथियो को बहुत बड़ा समर्थन नहीं प्राप्त है लेकिन इन कट्टरपंथियो को काफी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। जमीनी तौर पर इन कट्टरपंथियो का समर्थन करने वाले लोगों की संख्या से 5000 से अधिक नहीं होगी।

इन लोगों को कुचलना जरूरी है।

भूषण कहते हैं कि इन कट्टरपंथियो की सबसे बड़ी ताकत पैसा है जोकि पाकिस्तान से आता है। भारत को पाकिस्तान से आने वाली इस मदद को किसी तरह रोकना होगा। हालांकि जम्मू-कश्मीर में इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करना ज्यादा कारगर नहीं होगा।

गौर करने वाली बात हे कि इन कट्टरपंथियो को जो पैसा मिलता है वो जम्मू-कश्मीर में नहीं आता है। यह पैसा हमेशा दिल्ली या मुंबई से नेपाल के रास्ते आता है। यह पैसा जिन जगहों पर आता है वह अहम है और इनके खिलाफ इन शहरों में ही मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

कोर्ट के चक्कर लगाने पर मजबूर करना होगा

ऐसा करने से यह सुनिश्चित होगा कि इन कट्टरपंथियो को जम्मू-कश्मीर से बाहर की कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ेगा। यह इन कट्टरपंथियो को व्यस्त रखेगा, ऐसे में इन अलगाववादियों को देश विरोधी षड़यंत्र रचने के लिए समय कम मिलेगा।

भारत हमेशा दुनिया को यह दिखाता है कि वह एक लोकतांत्रिक देश है। ऐसे में अगर इन कट्टरपंथियो के खिलाफ मनी लांड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है तो दुनिया में इसका सकारात्म संदेश जाएगा। इसके अलावा अगर इन कट्टरपंथियो के खिलाफ कार्यवाही की जाती है तो इनके समर्थन में लोगों में सहानुभूति बढ़ेगी।

सरकार ऐसा क्यूं नहीं कर पा रही है?

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि जम्मू-कश्मीर में राजनैतिक महात्वाकांक्षा के चलते इन कट्टरपंथियो के दम पर लोग चुनाव जीतना चाहते हैं। वहीं सरकार को लगता है कि अगर इनके खिलाफ कार्यवाही की जाती है तो लोगों में इनके समर्थन में सहानुभूति बढ़ेगी। ऐसे में सरकारों को लगता है कि इन कट्टरपंथियो को नजरअंदाज करना ही बेहतर विकल्प होगा।

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