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Women's day पर गौतम अडानी ने लिखी भावुक पोस्‍ट " वो महिलाएं जिन्होंने मेरी दुनिया को आकार दिया"

Gautam Adani post on Women's day: अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज 8 मार्च को एशिया के दूसरे सबसे अमीर बिजनेसमैन गौतम आडानी ने उन सभी महिलाओं को धन्‍यवाद दिया जिन्‍होंने जिंदगी के विभिन्‍न पड़ाव में अहम योगदान दिया। लिंक्‍उइन पर अडानी ने एक पोस्‍ट शेयर की और जिसमें उन्‍होंने लिखा महिलाओं को सशक्त बनाने और लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने के लिए अपने संकल्‍प और समर्पण को दोहराया।

अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने एक इमोशनल मैसेज लिखा और बताया कैसे उनकी मां, पत्‍नी और पोतियों ने एक ऐसी दुनिया बनाने के उनके संकल्प को मजबूत किया है, जहां महिलाओं को अपने सपनों को प्राप्त करने में कोई बाधा नहीं आती है। अडानी ने कहा इन महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण पर उनके दृष्टिकोण को आकार दिया है।

Gautam Adani post on Women s day

अडानी ने इमोशनल पोस्‍ट में लिखा 'ये अंतराष्‍ट्रीय महिला दिवस केवल एक तारीख नहीं है ये हमारे अब तक के और आगे के सफर की कहानी है। अडानी ने बताया कि उनके जीवन में मौजूद सशक्त महिलाओं से काफी प्रभावित रही है। उन्‍होंने बताया एक बिजनेस लीडर के तौर पर कॉर्पोरेट जगत में उन्‍हें प्रेरणा मिली जहां उन्‍होंने महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को करीब से देखा।

अडानी ने बताया युवावस्‍था में मुझे मेरी मां से प्रेरणा मिली। मेरी मां जिन्होंने एक बड़े परिवार को तन्यकता से संभाला! एक पति के तौर पर अडानी फाउंडेशन के प्रति अपनी पत्नी प्रीति अडानी के समर्पण से प्रेरित हुआ। जिनके काम ने फाउंडेशन के साथ काम ने ग्रामीण भारत पर काफी प्रभाव डाला है। इसके बाद एक दादा के तोर पर मैंने बच्चियों के लिए एक ऐसी दुनिया का सपना देखा, जिसकी की कोई सीमा ना हो।

अडानी ने भावुक पोस्‍ट में लिखा "एक दशक पहले, जब मैंने अपनी पहली पोती की नाजुक उंगलियों को सहलाया, तो मैंने एक मौन प्रतिज्ञा ली कि एक ऐसी दुनिया बनाने में मदद करना जहां उसकी आकांक्षाओं की कोई सीमा न हो, जहां उसकी आवाज़ को किसी भी पुरुष की तरह ही सम्मान मिले, और जहां उसकी कीमत केवल उसके चरित्र और योगदान से मापी जाए"।

अडानी ने लिखा " मेरी पोतियों के लिए, जो एक दिन यह पढ़ सकती हैं। मेरी प्यारी लड़कियों, आपको जो दुनिया विरासत में मिलेगी, वह ऐसी होनी चाहिए जहां आपकी प्रतिभा का स्वागत खुले दरवाजों से हो, न कि कांच की छतों से। जहां आपकी महत्वाकांक्षाओं पर कभी सवाल नहीं उठाया जाता, केवल प्रोत्साहित किया जाता है। जहां आपकी आवाज को न केवल सुना जाता है, बल्कि उसकी तलाश की जाती है।

इसके साथ ही अडानी ने अपनी पोस्‍ट में लिखा " पोस्‍ट पढ़ने वाली हर एक महिला जो खुद को कम आंकती है या स्‍वयं को अनदेखा करती है, उन्‍हें ये पता होना चाहिए, उनका सफर मायने रखता है। आपकी लीडरशिप स्‍वागत योग्य ही नहीं बल्कि जरूरी भी है।

इसके साथ ही अडानी ने पुरूषों से अनुरोध किया कि लैंगिक समानता को सिर्फ महिलाओं से जोड़कर वो ना देखें बल्कि इंसानियत के लिए जरूरी है। उन्‍होंने कहा महिलाओं की प्रतिभा, अंतर्दृष्टि और नेतृत्व अमूल्य संसाधन हैं जिन्हें हम बर्बाद नहीं कर सकते।"

अडानी ने बताया कि उन्‍हें लैंगिक समानता की सीख अपने घर से मिली किसी बोर्डरूम या पॉलिसी डिबेट से नहीं। अडानी ने अपने बचपन की बात शेयर की और बताया कि वो बनारकांठा के रेगिस्‍तानी इलाके में पले- बड़े। आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए मेरे मां ने सहजता से हर चुनौती का डट कर मुकाबला किया। उन्‍होंने बताया अडानी फाउंडेशन से दूरदराज की महिलाओं के जुड़ते पर उनके संघर्षो को करीब से देखा।

अडानी जीवन के विभिन्न चरणों में महिलाओं की सहायता कर रहे अडानी फाउंडेशन की पहलों के बारे में भी बात की। बटरफ्लाई इफेक्ट फ्रेमवर्क और लखपति दीदी कार्यक्रम महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समूह के प्रयासों के उदाहरण हैं। लखपति दीदी पहल ने विशेष रूप से 1,000 से अधिक महिलाओं को उद्यमिता के माध्यम से वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने में सक्षम बनाया है।

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