हाईकोर्ट बोला-वोटर आईडी, PAN कार्ड या जमीन के कागजों से नहीं साबित होती है नागरिकता
नई दिल्ली। गुवाहटी हाई कोर्ट ने मंगलवार को दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि, फोटो युक्त वोटर आईडी कार्ड किसी व्यक्ति की नागरिकता का अन्तिम सबूत नहीं हो सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि, भूमि राजस्व रसीद, पैन कार्ड और बैंक दस्तावेजों का उपयोग नागरिकता साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता है। ट्रिब्यूनल ने महिला को विदेशी नागरिक की श्रेणी में रखा था। हालांकि, भूमि और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों को प्रशासन के स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची में रखा गया है।

असम में एनआरसी की अंतिम सूची जारी होने के बाद कम से कम 19 लाख लोग अपनी नागरिकता साबित करनी है। इन मामलों की समीक्षा के लिए पूरे असम में 100 विदेशी न्यायाधिकरण स्थापित किए गए हैं। न्यायाधिकरण द्वारा खारिज मामलों को उच्च न्यायालय और अगर जरूरत पड़े तो सुप्रीम कोर्ट में उठाया जा सकता है। अदालत ने इससे पहले मुनींद्र विश्वास द्वारा दायर एक मामले में यही फैसला दिया था जिसमें तिनसुकिया जिले में एक विदेशी ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी गई थी।
अब जुबैदा बेगम उर्फ जुबैदा खातून ने विदेशी न्यायाधिकरण के खुद को विदेशी घोषित करने के आदेश को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हालांकि सरकार का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को तब तक डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा जब तक उसके सारे कानूनी विकल्प समाप्त नहीं हो जाते हैं।
हालांकि अदालत ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता 1997 से पहले की मतदाता सूची प्रस्तुत करने में विफल रही, जिससे कि यह साबित हो सके कि उसके माता-पिता 1 जनवरी, 1966 से पहले असम में प्रवेश कर चुके थे और वह 24 मार्च 1971 से पहले राज्य में रह रहे थे। दरअसल नागरिकता अधिनियम के उपबंध 6A के अनुसार, असम समझौते के तहत राज्य में नागरिकता के लिए आधार वर्ष 1 जनवरी, 1966 है।












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