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ओडिशा में बूढ़ों और युवाओं के बीच बढ़ रहा अंतर, विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए दी ये बड़ी चेतावनी

ओडिशा में युवाओं की तुलना मे वृद्धजनों की संख्‍या में तेजी से अंतर आया है। ओडिशा में प्रजनन दर में काफी कमी आने के कारण बच्‍चों की तुलना में युवाओं और बूढ़ों की संख्‍या में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों ने राज्‍य में बढ़ रहे इस अनुपात पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इस पर ध्‍यान नहीं दिया गया तो ओडिशा 2036 तक यह बुजुर्गों का राज्य बन जाएगा यानी बूढ़ा ओडिशा बन जाएगा।

 increasing gap between young and old

ओडिशा के विशेषज्ञ युवाओं और बूढ़ों के बीच बढ़ते अंतर को लेकर चिंतित हैं और जनसांख्यिकीय चुनौतियों से निपटने के लिए नीतियों की वकालत कर रहे है। उन्‍होंने कहा राज्य तेजी से जनसांख्यिकीय परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।

उन्‍होंने बताया इससे ना केवल जनसंख्या के आकार और विकास दर से निर्धारित होती है, बल्कि जनसंख्या की संरचना और वितरण के साथ-साथ लोगों के व्यवहार और आकांक्षाओं में परिवर्तन से भी निर्धारित होता है। तेजी से आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन के साथ प्रजनन क्षमता में निरंतर गिरावट राज्य के लिए एक अलग प्रक्षेपवक्र को आकार दे रही है।
गुरुवार को भुवनेश्वर में "परिवर्तनकारी ओडिशा @2036: जनसांख्यिकी और विकास" विषय पर आधारित सम्मेलन में चर्चा के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि ओडिशा में प्रजनन दर में काफी कमी आई है। जिसके परिणामस्‍वरूप बच्‍चों की तुलना में युवाओं और बूढ़ों की संख्‍या में बढ़ोत्‍तरी हुई है।

ओडिशा राज्‍य में वृद्ध व्यक्तियों में पर्याप्‍त वृद्धि होने का अनुमान है, 2021 में 11.5 फीसदी से बढ़कर 2036 में अनुमानित 17 फीसदी हो जाएगा। इसी तरह राज्य में 5-14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है। 2021 में 16 प्रतिशत से घटकर 2036 तक 13 प्रतिशत हो जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार प्रजनन दर में यह प्रवृत्ति अगले 20 वर्षों के बाद ओडिशा के लिए चिंता का विषय बन जाएगी।

सेंटर फॉर यूथ एंड सोशल डेवलपमेंट (सीवाईएसडी) के संयोजक जगदानंद ने इस कार्यक्रम में दावा किया कि ओडिशा वर्तमान में युवाओं का राज्य है। लेकिन 2036 तक यह बुजुर्गों का राज्य बन जाएगा। यह आर्थिक विकास और फिर सामाजिक व्यवस्था के लिए चुनौतियां खड़ी करेगा।

वहीं जनसांख्यिकी विशेषज्ञ प्रोफेसर अमिताभ कुंडू ने कहा

अगले 20 वर्षों के बाद भी नबरंगपुर और रायगड़ा में कोई जनसांख्यिकीय परिवर्तन नहीं होगा। इन दोनों जिलों में प्रजनन दर 2.1 प्रतिशत के स्थान पर 2.3 प्रतिशत है, जबकि ओडिशा के 14 जिलों में प्रजनन दर 1 से भी कम है। यह असमानता चिंता का कारण है।

अनुमान के अनुसार ओडिशा के 14 जिलों में कपल अपना परिवार एक बच्चे तक सीमित रखने के इच्छुक हैं। अगले 10 वर्षों में, राज्य के 30 प्रतिशत घरों में एक बच्चा होगा, जबकि नबरंगपुर और रायगड़ा जिले अपवाद होंगे। क्योंकि इन दोनों जिलों में अधिकांश जोड़े दो से अधिक बच्चे पैदा करने की इच्छा रखते हैं।

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