कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज और बूस्टर के बीच के गैप को कम करने की तैयारी में सरकार
नई दिल्ली, 28 अप्रैल। कोरोना वायरस एक बार फिर से देश मे धीरे-धीरे बढ़ रहा है, ऐसे में बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने कोरोना वैक्सीन को लेकर बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। कोरोना की दूसरी डोज और बूस्टर डोज के बीच के गैप को कम करके इसे 6 महीने किया जा सकता है। फिलहाल कोरोना की दूसरी डोज के 9 महीने के बाद ही लोग बूस्टर डोज लगवा सकते है। रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल इम्युनाइजेशन टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप की 29 अप्रैल को बैठक होगी, इस बैठक में दूसरी डोज के बाद बूस्टर डोज दिए जाने की अवधि को कम किए जाने की सिफारिश की जा सकती है।

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गौर करने वाली बात है कि आईसीएमआर और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने सुझाव दिया था कि कोरोना की बूस्टर डोज को कम समय में भी दिया जा सकता है। उनका कहना था कि अगर कोरोना की दूसरी डोज के बाद ज्यादा समय के अंतर पर बूस्टर डोज दी जाती है तो एंटीबॉटी का स्तर कम हो जाता है। लिहाजा दूसरी डोज के बाद जल्द बूस्टर देने से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल अभी 18 साल से ऊपर के लोगों को ही बूस्टर डोज दी जा रही है जिन्होंने दूसरी डोज कम से कम 9 महीने पहले लगवाई हो।
एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि आईसीएमआर और अन्य वैज्ञानिकों के सुझाव के बाद जल्द ही इसपर फैसला हो सकता है कि कोरोना की दूसरी डोज के बाद बूस्टर डोज दिए जाने की अवधि को कम करके 6 महीने किया जा सकता है। इसपर अंतिम फैसला 2 अप्रैल को हो सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉक्टर भारती पवार ने राज्यसभा में कहा था कि कोवैक्सीन की बूस्टर डोज से एंटिबॉडी बढ़ती है, ऐसा खुद आईसीएमआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है। बता दें कि भारत में 10 जनवरी से फ्रंटलाइन वर्कर, स्वास्थ्यकर्मियों और बीमार व 60 साल से ऊपर के लोगों को बूस्टर डोज दी जा रही है। बूस्टर डोज के लिए कम से कम व्यक्ति की उम्र 18 साल होनी चाहिए।












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