FSSAI ने डेयरी उत्पादों पर A1 और A2 लेबल के उपयोग पर लगाई रोक, जानें क्या होता है मतलब?
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में डेयरी कंपनियों को दूध, घी, मक्खन और दही जैसे डेयरी उत्पादों पर A1 और A2 लेबल का उपयोग बंद करने का निर्देश दिया है। इन लेबलों के बारे में यह धारणा है कि A2 दूध पचने में आसान और स्वास्थ्य के लिए बेहतर हो सकता है, जबकि A1 दूध से कुछ लोगों को पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
हालांकि, इन दावों का वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है, और FSSAI ने इसे भ्रामक मानते हुए इस प्रकार के लेबल के उपयोग पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। बाजार में कई दूध उत्पाद A1 और A2 लेबल के साथ बेचे जाते हैं, जिससे यह बहस छिड़ जाती है कि A1 या A2 दूध उत्पाद का उपभोग करने का क्या मतलब है?

A1 और A2 का अर्थ:
दरअसल, A1 और A2 गाय के दूध में पाए जाने वाले बीटा-कैसिइन नामक प्रोटीन के दो प्रकार हैं। कैसीन दूध में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो इसकी प्रोटीन मात्रा का लगभग 80% होता है। दूध में विभिन्न प्रकार के कैसिइन पाए जाते हैं, जिनमें बीटा-कैसिइन दूसरा सबसे आम है। यह प्रोटीन कम से कम 13 अलग-अलग रूपों में पाया जाता है। इसके दो प्राथमिक रूप हैं। आइए जानते हैं...
A1 दूध: कुछ गायों के दूध में A1 बीटा-कैसिइन प्रोटीन पाया जाता है, जिसे पारंपरिक या सामान्य गायों का दूध माना जाता है। यह मुख्य रूप से उत्तरी यूरोप में उत्पन्न गाय की नस्लों के दूध में पाया जाता है, जैसे होलस्टीन, फ्रीजियन, आयरशायर और ब्रिटिश शोरथॉर्न।
A2 दूध: दूसरी तरफ, A2 दूध में केवल A2 बीटा-कैसिइन प्रोटीन पाया जाता है, जिसे स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक माना जाता है। यह मुख्यतः चैनल द्वीप समूह और दक्षिणी फ्रांस की मूल नस्लों के दूध में मौजूद होता है, जिनमें ग्वेर्नसे, जर्सी, चारोलैस और लिमोसिन गायें शामिल हैं।
जबकि सामान्य दूध में A1 और A2 दोनों बीटा-केसीन होते हैं, A2 दूध इस मायने में विशिष्ट है कि इसमें केवल A2 प्रकार ही होता है। साल 2000 में, a2 कॉर्पोरेशन नामक एक दूध कंपनी ने A2 दूध देने वाले मवेशियों की पहचान के लिए एक आनुवंशिक विधि का पेटेंट कराया।












Click it and Unblock the Notifications