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Manipur violence: फिर सुलगा मणिपुर! चुराचांदपुर सीमा पर ताजा फायरिंग, क्या तोरबुंग बन रहा है नया फ्लैशपॉइंट?

Manipur violence:मणिपुर में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। राज्य के बिष्णुपुर और चुराचांदपुर जिलों की सीमा से सटे तोरबुंग इलाके में मंगलवार शाम करीब 8:30 बजे अचानक गोलीबारी की घटना सामने आई।

अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा बलों और अज्ञात सशस्त्र बदमाशों के बीच क्रॉस फायरिंग हुई, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। मिली जानकारी के मुताबिक, 16 दिसंबर को देर रात हुई इस घटना में कम से कम एक आम नागरिक घायल हुआ है। हालांकि, घायल व्यक्ति की पहचान अब तक नहीं हो पाई है।

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घायल को इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने कहा है कि हालात पर नजर रखी जा रही है और मामले की जांच जारी है।

पुनर्वास के बीच भड़की हिंसा, चुराचांदपुर की ओर से हमला

स्थानीय लोगों के अनुसार, सरकार के निर्देश पर हाल ही में फौगाकचाओ इखाई और तोरबुंग क्षेत्र में 67 परिवारों के करीब 389 आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को फिर से बसाया गया था। इसी पुनर्वास प्रक्रिया के बाद इलाके में तनाव की आशंका जताई जा रही थी। बताया जा रहा है कि पुनर्वास के विरोध या असंतोष के चलते हालात बिगड़े।

अधिकारियों के मुताबिक, 16 दिसंबर की शाम करीब 8:30 बजे चुराचांदपुर जिले की ओर से कुछ अज्ञात सशस्त्र बदमाशों ने तोरबुंग गांव पर हमला किया। हमलावरों ने कथित तौर पर बमों का भी इस्तेमाल किया। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। यह मुठभेड़ करीब 20 मिनट तक चली।

ग्रामीणों में दहशत, इलाके में तनाव

लगातार गोलीबारी और धमाकों के चलते तोरबुंग और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। कई ग्रामीण अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियों को मौके पर भेजा गया है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

3 मई 2023 से जारी है मणिपुर संकट

गौरतलब है कि मणिपुर में 3 मई 2023 से जातीय हिंसा का दौर जारी है। अब तक इस संकट में 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 60 हजार से ज्यादा लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। हालात को काबू में करने के लिए राज्य में 13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है।

पुनर्वास की कोशिशों के बीच बढ़ी चुनौती

राष्ट्रपति शासन के बाद सरकार ने बिष्णुपुर जिले से विस्थापित लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की है। लेकिन ताजा घटना से साफ है कि शांति बहाली की राह अभी आसान नहीं है और पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। इसी बीच, 14 दिसंबर को भाजपा के विधायकों की एक अहम बैठक दिल्ली में हुई थी। इस बंद कमरे की बैठक में चार कुकी-जो समुदाय के विधायक भी शामिल थे। बैठक में शामिल विधायकों ने इसे मणिपुर में शांति बहाली की दिशा में एक अहम कदम बताया था।

डीजीपी ने चुराचांदपुर का दौरा किया

घटना के दिन ही मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने चुराचांदपुर जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में नए कॉन्फ्रेंस रूम का उद्घाटन किया। इसके बाद डीजीपी ने मणिपुर पुलिस और जिले में तैनात अन्य सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुरक्षा समीक्षा बैठक की। डीजीपी ने जिले के विभिन्न सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशन (CSO) के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की और उनसे संवाद किया। अधिकारियों के अनुसार, बैठक में मौजूदा सुरक्षा हालात, तैयारी और शांति बनाए रखने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

फिलहाल, तोरबुंग इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासन हालात सामान्य करने की कोशिश में जुटा हुआ है। हालांकि, ताजा हिंसा ने एक बार फिर यह संकेत दे दिया है कि मणिपुर में शांति बहाली की प्रक्रिया अभी नाजुक दौर से गुजर रही है।

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