एमके स्टालिन की पार्टी DMK ने सुप्रीम कोर्ट का किया रुख, 'रेवड़ी पॉलिटिक्स' को लेकर दायर की याचिका

नई दिल्ली, 16 अगस्त: देश में इन दिनों रेवड़ी पॉलिटिक्स ने जोर पकड़ा हुआ है। पीएम मोदी के हाल ही में फ्री की रेवड़ी देने की प्रथा पर करार हमला करते हुए राजनीतिक पार्टियों पर जोरदार निशाना साधा था। वहीं अब ' मुफ्त की रेवड़ी' पॉलिटिक्स का मामला देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके पार्टी के चीफ एमके स्टलिन ने एक याचिका कोर्ट में दायर कर कहा कि मुफ्तखोरी का दायरा बहुत बड़ा है और ऐसे कई पहलू हैं जिन पर विचार करने की जरूरत है।

MK Stalin Supreme Court

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके ने मंगलवार को अपनी याचिका में तर्क देते हुए बताया है कि यह मुफ्त उपहार की राजनीति सिर्फ राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई हितकारी योजना को मुफ्त की रेवड़ी के तौर समूहबद्ध नहीं किया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार विदेशी कंपनियों को टैक्स में राहत दे रही है। साथ ही प्रभावशाली उद्योगपतियों का कर्जमाफी की जा रही है। पसंदीदा समूह आदि को महत्वपूर्ण अनुबंध आदीनप्रदान करना, इस पर भी विचार किया जाना चाहिए और इसे अछूता नहीं छोड़ा जा सकता है।

याचिका में कहा गया कि एक कल्याणकारी योजना में, संविधान के अनुच्छेद 38 के तहत "आय, स्थिति, सुविधाओं और अवसरों में असमानताओं को कम करने के लिए" सामाजिक व्यवस्था और आर्थिक न्याय को सुरक्षित करने के इरादे से मुफ्त सेवा शुरू की गई है। याचिका में कहा गया है, "किसी भी कल्पनीय वास्तविकता में, इसे 'मुफ्त' के रूप में नहीं माना जा सकता है।"

बता दें कि तमिलनाडु उन राज्यों में से एक है, जहां चुनाव के समय मुफ्त गिफ्त देने की पारंपरिक चली आ रही है। पार्टी अपने लाइने से हटकर चुनाव से पहले भी कभी-कभी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन कर लोगों के बीच कपड़ा, खाना और घरेलू सामान को लोगों में बांटते हैं। चुनावों के बाद लगातार सरकारों ने भोजन और अन्य वस्तुओं पर भारी सब्सिडी भी दी है। यहां तक की राज्य के विपक्षी दल अन्नाद्रमुक की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता को उनकी "अम्मा कैंटीन" के लिए जाना जाता था, जहां कम पैसे में भरपेट भोजन मिलता था।

पहले की एक सुनवाई में चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली पीठ ने कहा था कि मुफ्त का प्रावधान एक गंभीर आर्थिक मुद्दा है और चुनाव के समय "मुफ्त बजट" नियमित बजट से ऊपर होता है। बता दें कि कोर्ट एक याचिका पर पहले से ही सुनवाई कर रही है, जिसमें चुनाव के समय फ्री गिफ्ट देने के वादे को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया है कि यह प्रथा किसी राज्य पर वित्तीय संबंधी बर्बादी लाने में सक्षम है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, जो मुफ्त बिजली और पानी देने के लिए जानी जाती है ने याचिका के रुख को चुनौती दी है, जिसे भाजपा के अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है।

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