खुद को 'भारत का मार्क जकरबर्ग' कहने वाले फ्रॉड अनुभव मित्तल का पर्दाफाश, STF ने कसा शिकंजा
अनुभव मित्तल धोखाधड़ी के जिस बिजनेस में था वहां उसने अपने परिवार को भी लगा रखा था। उसने अपनी पत्नी आयुषी अग्रवाल को कंपनी की पहली मेंबर बनाया।
नोएडा। यूपी एसटीएफ ने ऑनलाइन फ्रॉड करने वाली कंपनी का भंडाफोड़ कर उसके मालिक और रैकेट के मास्टरमाइंड अनुभव मित्तल को गिरफ्तार कर लिया। मामले की तहकीकात हुई तो एक से बढ़कर एक राज सामने आए। फर्जीवाड़े के इस पूरे का खेल का मास्टरमाइंड खुद को भारत का मार्क जकरबर्ग कहता था। उसने अपनी पैठ बनाने के लिए एक सोशल नेटवर्किंग साइड भी लॉन्च की थी जिसके जरिए वह लोगों का ध्यान आकर्षित करता था।

अगस्त 2011 में शुरू हुआ था ये काम
आरोपी अनुभव मित्तल अपने दो साथियों के साथ मिलकर 'socialtrade.biz' नाम से एक पोर्टल चलाते था। ये लोगों को पैसे कमाने का लालच देकर उनसे निवेश कराते थे। कंपनी की मेंबरशिप के लिए 5750 रुपये से 57500 रुपये तक की फीस तय की गई थी। एक बार सदस्य बन जाने पर लोगों को सोशल मीडिया पर एक लिंक पर क्लिक करने का 5 रुपये दिया जाता था। एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि कंपनी ने सोशल मीडिया ट्रेड के लिए 2011 में काम करना शुरू किया था। READ ALSO: नोएडा में 3700 करोड़ के ऑनलाइन फ्रॉड का भंडाफोड़, तीन अरेस्ट

लगातार बदला पोर्टल का नाम
एसटीएफ ने जांच के दौरान पाया कि आरोपियों ने कंपनी 'एब्लेज इन्फो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से रजिस्टर की थी और लगातार पोर्टल का नाम बदल रहे थे। पोर्ट पर लाइक्स और क्लिक के बदले पैसे देने का लालच देकर इन लोगों ने करीब 6.5 लाख लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया। उन्होंने करीब 3700 करोड़ रुपये की ठगी की। अनुभव मित्तल ने अपने दो साथियों श्रीधर प्रसाद और महेश दयाल के साथ मिलकर इस धोखाधड़ी के काम को आगे बढ़ाया था। READ ALSO: सनी लियोन-अमीषा पटेल के साथ बर्थडे मनाता था 3700 करोड़ गबन करने वाला अनुभव मित्तल

पत्नी बनी थी कंपनी की पहली मेंबर
अनुभव मित्तल धोखाधड़ी के जिस बिजनेस में था वहां उसने अपने परिवार को भी लगा रखा था। उसने अपनी पत्नी आयुषी अग्रवाल को कंपनी की पहली मेंबर बनाया। यह नहीं, उसके पिता सुनील मित्तल कंपनी के निदेशक रह चुके हैं। एसटीएफ ने उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया है। इनते अलावा सनी मेहता को भी नामजद किया गया है। छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने कंपनी से करीब 9 लाख पहचान पत्र बरामद किए थे। READ ALSO: सेक्स के बदले मोटी रकम चाहती थी युगांडा की लड़की, मिली मौत

ईडी और आरबीआई को दी गई जानकारी
एसटीएफ के एसएसपी ने बताया कि रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद पूरे मामले की जानकारी प्रवर्तन निदेशालय (ED), सेबी और आरबीआई को दे दी गई है। उन्होंने बताया, 'हमने संबंधित अथॉरिटी से 524 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन पर रोक लगाने को कहा है। हमें जांच के लिए एक हफ्ते का समय और चाहिए। कंपनी ने साल 2011 में सिर्फ एक लाख की कमाई की लेकिन 2012 से 2016 के बीच इसका बिजनेस 1.5 लाख से बढ़कर 3700 करोड़ पहुंच गया।' READ ALSO: फेसबुक पर हुए इश्क का ऐसा खौफनाक अंजाम कि पुलिस के भी होश उड़े












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