पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता बूटा सिंह का निधन, लंबे वक्त से थे बीमार
Buta Singh Passes Away: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह का शनिवार सुबह निधन हो गया, वो लंबे वक्त से बीमार चल रहे थे। उनका जन्म पंजाब के जालंधर जिले के मुस्तफापुर गांव में 21 मार्च 1934 को हुआ था। इसके अलावा वो 8 बार सांसद चुने गए। बूटा सिंह को दलितों का मसीहा कहा जाता था। साथ ही उन्होंने कई बार कांग्रेस को मुश्किल हालात से बाहर निकाला। इससे पहले नवंबर में कांग्रेस के दिग्गज नेता और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल का निधन हुआ था।
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जानकारी के मुताबिक बूटा सिंह 86 साल के थे, जिस वजह से उन्हें उम्र संबंधित कई बीमारियां भी थीं। एम्स के डॉक्टरों की तमाम कोशिशें असफल रहीं और शनिवार को उन्होंने दिल्ली में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को ही किया जाएगा। बूटा सिंह के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सीएम अशोक गहलोत समेत कई नेताओं ने दुख व्यक्त किया है।
मुश्किल वक्त में इंदिरा का दिया साथ
बूटा सिंह को नेहरू-गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद लोगों में से एक माना जाता था। जब 1977 से देश में जनता पार्टी की लहर आई और कांग्रेस बुरी तरह हारी, तो कई दिग्गज नेताओं ने इंदिरा गांधी का साथ छोड़ दिया। उस दौरान बूटा सिंह कांग्रेस के इकलौते राष्ट्रीय महासचिव थे। उनकी कड़ी मेहनत की वजह से पार्टी में कई बड़े चेहरे जुड़े और 1980 में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई। तब से बूटा सिंह गांधी परिवार के सबसे करीबी रहे। इसी वजह से उनको गृह, कृषि, खेल, रेल समेत कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारियां भी मिलीं। इसके अलावा उन्होंने बिहार के राज्यपाल के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी। जब सरकार ने उन्हें अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाया तो उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए काफी काम किया।












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